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रिज़र्व बैंक, केंद्र सरकार के बीच कोई दरार नहीं

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक के बीच दरार जैसी कोई बात नहीं है और उन्होंने दोनों के बीच मतभेद की अफवाहों को खारिज किया। जेटली ने उम्मीद जतायी कि बैंक ब्याज दरों में कटौती के मामले में केंद्रीय बैंक की नीतियों का अनुसरण करेंगे। वित्त वर्ष 2015-16 के […]
Author March 22, 2015 15:45 pm
Arun Jaitley ने कहा “उनकी सरकार इस पर मतभेद दूर करने के लिए विपक्षी दलों के साथ विचार विमर्श को तैयार है।” (फ़ोइल फ़ोटो-पीटीआई)

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक के बीच दरार जैसी कोई बात नहीं है और उन्होंने दोनों के बीच मतभेद की अफवाहों को खारिज किया। जेटली ने उम्मीद जतायी कि बैंक ब्याज दरों में कटौती के मामले में केंद्रीय बैंक की नीतियों का अनुसरण करेंगे।

वित्त वर्ष 2015-16 के बजट प्रस्तावों पर रिजर्व बैंक के निदेशक मंडलों को संबोधित करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के बीच नियमित तौर पर बातचीत होती रहती है और सरकार प्राय: केंद्रीय बैंक से सुझाव और परामर्श लेती रहती है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम रिजर्व बैंक के साथ बजट से पहले और उसके बाद चर्चा करते हैं, हमारे बीच मुक्त और खुली चर्चा होती है और इसीलिए किसी प्रकार की कोई दूरी जैसी कोई बात नहीं है। मैंने बार-बार इसे स्पष्ट किया है।’’

उल्लेखनीय है कि जेटली ने अपने बजट भाषण में सरकारी बांड बाजार के विनियमन का अधिकार रिजर्व बैंक से लेकर पूंजी बाजार नियामक सेबी को देने का प्रस्ताव किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक वित्त विधेयक में प्रस्ताव का संबंध है, वह अभी संसद के समक्ष है। उनमें से कुछ के बारे में पहले चर्चा हुई है, हमने अभी भी इस पर चर्चा की है, मैं इस समय इस पर कुछ नहीं कहना चाहता।’’

यह पूछे जाने पर कि रिजर्व बैंक द्वारा पिछले तीन महीने में रेपो दर में दो बार कटौती के बावजूद बैंकों द्वारा इसका लाभ ग्राहकों को नहीं दिये गया और क्या सरकार इसके लिये बैंकों पर दबाव देगी उन्होंने कहा, ‘‘सरकार किसी पर दबाव नहीं देती लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि बैंक रिजर्व बैंक की नीतियों के अनुरूप इस दिशा में कदम उठाएंगे।’’

उल्लेखनीय है कि पिछले तीन महीने में रिजर्व बैंक ने रेपो देर में दो बार कुल 0.5 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। फिलहाल यह 7.5 प्रतिशत है। रेपो वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अप्लकालिक उधार देता है।

रिजर्व बैंक की नीतिगत दरों में कटौती के बावजूद बैंकों ने इसका लाभ अब तक ग्राहकों को नहीं दिया है। वित्त मंत्री जेटली ने कहा, ‘‘हम उन पर (बैंकों पर) दबाव नहीं देते। हम केवल उम्मीद करते हैं और हमारी उम्मीदें सही साबित होती हैं।’’

सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं पर व्यय में कटौती के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘इन क्षेत्रों में वास्तविक खर्च बढ़ा है। केवल खर्च करने का तरीका बदला है जिसका कारण 14वें वित्त आयोग की सिफारिशें हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों पर व्यय का जिम्मा केंद्र सरकार तो ले ही रही है पर अब राज्यों को केंद्रीय कर आय में अपेक्षाकृत बड़ी हिस्सेदारी मिलने से, राज्य सरकारें भी इन योजनाओं पर अतिरिक्त राशि खर्च करेंगी।’’

जेटली ने कहा, ‘‘इसीलिए इन क्षेत्रों में कुल खर्च किसी भी अन्य वर्ष के मुकाबले इस साल ज्यादा रहेगा और इसमें उल्लेखनीय वृद्धि होगी।’’
17 सदस्यीय रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल में केंद्रीय बैंक के गवर्नर रघुराम राजन, चार उप गवर्नर, वित्त मंत्रालय द्वारा नामित सदस्य, उद्योग प्रतिनिधि तथा अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं।

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