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भारत का दुनिया में महत्त्व बढ़ा, पर देश की मौजूदा वृद्धि काफी नहीं: जेटली

दुनिया में धीमी वृद्धि पर जेटली ने कहा कि कोई भी इस बात को लेकर आशान्वित नहीं है कि कब तक यह स्थिति बनी रहेगी।
Author वाशिंगटन | October 10, 2016 06:15 am
वॉशिंगटन में हो रहे अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्वबैंक वार्षिक सम्मेलन के एक पैनल में बोलते केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली। (REUTERS/James Lawler Duggan/7 Oct, 2016)

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि भारत आज दुनिया में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। इसका कारण विपरीत माहौल में बेहतर करने की आकांक्षा है और यह पहले से कहीं अधिक है। साथ ही उन्होंने आगाह किया कि उसके स्वयं के मानदंडों के आधार पर देश की मौजूदा वृद्धि पर्याप्त नहीं है। जेटली ने यहां भारतीय पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पहले के मुकाबले हम कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण स्थान पर हैं। लेकिन भारत पहले से कहीं अधिक महत्त्वाकांक्षा वाला देश भी बन गया है। दुनिया के शेष भागों से तुलना करने पर हम जरूर अच्छा कर रहे हैं। लेकिन खुद के मानदंडों से तुलना करने पर यह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि हम अभी और भी अच्छा कर सकते हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि चीजें खराब हैं।

वित्त मंत्री यहां उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक की बैठक में भाग लेने आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के अन्य देशों के लिए जहां हम विपरीत माहौल में बेहतर करने की आकांक्षा रखते हैं, वे हमारे प्रदर्शन को अत्यंत प्रभावी मानते हैं। इसीलिए भारत को लेकर दुनियाभर में काफी चर्चा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक के ताजा अनुमान के अनुसार भारत की वृद्धि दर अगले दो साल में 7.6 फीसद रहेगी। यह उसे उभरती अर्थव्यवस्था में विश्व की तीव्र वृद्धि वाला देश बनाता है। उन्होंने कहा कि आने वाले सालों के लिए जिस तरह की आर्थिक गतिविधियों और निवेश की हमने योजना बनाई है, उससे वृद्धि के नीचे जाने की संभावना नहीं है। जिस तरह के दोनों घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेश हमें प्राप्त हो रहे हैं, एक उपयुक्त मात्रा में वृद्धि हमेशा बनी रहेगी। जीएसटी जैसे संरचनात्मक सुधारों से इसमें और इजाफा होगा।

दुनिया में धीमी वृद्धि पर जेटली ने कहा कि कोई भी इस बात को लेकर आशान्वित नहीं है कि कब तक यह स्थिति बनी रहेगी। भारत को ऐसे माहौल में रहना सीखना है जहां दुनिया धीमे-धीमे आगे बढ़ रही है। दुनिया वृद्धि के लिए बहुत मददगार नहीं होने जा रही है। वैश्विक माहौल वृद्धि के लिए बहुत अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले तेजी से वृद्धि कर रहा है। वह अधिक एफडीआइ प्राप्त करने वाला स्वाभाविक देश बन गया है। अच्छा मानसून, वेतन आयोग और उपयुक्त वृद्धि दर के साथ ग्रामीण मांग समेत घरेलू खपत में तेजी आई है। दिशा और फैसले लेने के संदर्भ में भारत में संरचनात्मक सुधार पहले से कहीं आसान हैं।

जेटली ने कहा कि बुनियादी ढांचे में व्यय और निवेश वृद्धि को बनाए रखेगा। भारत के समक्ष कुछ चुनौतियां हैं। पहला प्रतिकूल वैश्विक माहौल। दूसरा कुछ क्षेत्रों में निजी निवेश बढ़ा है लेकिन वह अभी पहले जैसा नहीं है। तीसरा, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अधिक मजबूत होने व उन्हें एनपीए से बाहर निकलने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी में कई कारणों से वृद्धि को आगे बढ़ाने की काफी संभावना है। यह काफी कुशल कर व्यवस्था है। इससे व्यापार आसान होगा। यह सेवाओं और वस्तुओं की आवाजाही को सुगम बनाएगा। एक जगह से दूसरी जगह वस्तु भेजने में लगने वाला समय कम होगा। इससे कर पर कर नहीं लगेगा और लागत कम होगी। कुल मिलाकर इससे उत्पाद ज्यादा दक्ष होंगे।

जेटली ने बैंकिंग प्रणाली में कम और नकारात्मक ब्याज दरों और उल्लेखनीय संख्या में कर्ज के खराब होने से वैश्विक वित्तीय स्थिरता के समक्ष जोखिम को लेकर आगाह किया है और वृद्धि को गति देने के लिए बहीखातों को दुरुस्त करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि अव्यवस्थित रूप से निजी कर्ज को कम करने के उपाय से भी वृद्धि प्रभावित हो सकती है।

 

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