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नोटबंदी के चलते घटी ऐप्पल आईफोन की सेल, छूट और ऑफर्स देने को हुए मजबूर

नोटबंदी के कारण कंपनी की रिवेन्यू और सेल दोनों एक साथ खतरे पड़ गई हैं
आईफोन 7 में 4.7 इंच की डिस्प्ले दी गई है। (Photo: Apple India)

नोटबंदी के कारण मुनाफे में हुए घाटे का ताजा शिकार ऐप्पल का आईफोन है। नोटबंदी के कारण कंपनी की रिवेन्यू और सेल दोनों एक साथ खतरे पड़ गई हैं। अक्टूबर-नवंबर धमाकेदार सेल होने से तिमाही की अच्छी शुरुआत हुई थी। बिजनेस अखबार द इकॉनमिक टाइम्स के मुताबिक, नोटबंदी से पहले जहां बड़ी संख्या में आईफोन खरीदे जा रहे थे, नोटबंदी के बाद कैश की किल्लत के चलते आईफोन की सेल में भारी गिरावट हुई। यही कारण है कि कंपनी को चालू वित्त वर्ष (अक्टूबर 2016- सितंबर 2017) के लिए इंडिटन रिवेन्यू टारगेट को 3 बिलियन डॉलर से घटाकर 2 बिलियन डॉलर करना पड़ा है।

दो वरिष्ठ विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और रिटेल स्टोर्स से होने वाली आईफोन की 80 फीसदी से ज्यादा सेल कैश ट्रांजेक्शन से होती है। लेकिन दिसंबर के बाद से यह काफी कम हो गई है। यही कारण हैं कि इस वित्त वर्ष 3 मिलियन डॉलर के आईफोन बेचने के लक्ष्य को पाना नामुमकिन लगता है। यह लक्ष्य ऐप्पल के सीईओ टिम कुक ने अपनी मई 2016 की भारत यात्रा के दौरान तय किया था।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कैलिफॉर्निया स्थित ऐप्पल ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 8 से 9 लाख आईफोन भारत भेजे थे। रिटेलर्स के मुताबिक, नोटबंदी के बाद से स्मार्टफोन की सेल में 30-35 फीसदी की गिरावट हुई है, वहीं ऐप्पल की विकास दर में 50 फीसदी की गिरावट हुई। एक सेल्स एग्जिक्यूटिव ने बताया कि बिक्री के आंकड़े बढ़ाने का काफी दबाव है, यही कारण है कि आईफोन की सेल बढ़ाने के लिए ग्राहकों को कैशबैक समते कई ऑफर्स दिए जा रहे हैं। हालांकि इसका सीधा असर प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा।

बिक्री घटने के कारण भारत में आईफोन बनाने और खुद के स्टोर्स से बेचने की ऐप्पल की योजना को कंपनी जल्द ही शुरू कर सकती है। इसके अलावा देश से रिवेन्यू बढ़ाने के लिए कंपनी अपने स्टोर्स से पुरानी डिवाइसों को भी बेचेगी।

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