May 25, 2017

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एयरसेल-मैक्सिस मामला: 2G विशेष अदालत के अधिकार क्षेत्र के ख़िलाफ़ याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

कोर्ट ने उस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि एयसेल-मैक्सिस मामला 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से संबंधित नहीं है।

Author नई दिल्ली | October 17, 2016 21:32 pm
एयरसेल-मैक्सिस सौदा। (चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।)

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार (17 अक्टूबर) को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाने से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही विशेष अदालत को एयरसेल-मैक्सिस मामले को सुनने का न्यायिक अधिकार नहीं है। एयरसेल मैक्सिस मामले में अन्य के अलावा पूर्व दूससंचार मंत्री दयानिधि मारन और उनके भाई कलानिधि मारन भी अभियुक्त हैं। न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ और न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की पीठ ने साउथ एशिया एंटरटेनमेंट होल्डिंग लि. कंपनी की याचिकों में उस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि एयसेल-मैक्सिस मामला 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से संबंधित नहीं है। यह कंपनी भी इस मामले में एक अभियुक्त है।

इस कंपनी के वकील कपिल सिब्बल ने बहस के दौरान तर्क रखा कि 2जी विशेष अदालत के वादकालीन आदेश को उच्च न्यायाल में चुनौती देने के अभियुक्तों के ‘प्रक्रिया संबंधी अधिकार’ की रक्षा किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, ‘मैं (कंपनी) 2जी मामले में कोई अभियुक्त नहीं हूं। मुझे विशेष अदालत में अपने खिलाफ सुनवाई से कोई परेशानी नहीं है पर यह 2जी का मामला नहीं है। ऐसे में प्रक्रिया संबंधी मेरे अधिकार की रक्षा किया जाना अनिवार्य है।’ उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने आदेश दे रखा है कि विशेष 2जी स्पेक्ट्रम अदालत के विवादकालीन किसी भी आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई केवल उसके यहां (उच्चतम न्यायालय) में ही की जाएगी। लेकिन इस कंपनी को ऐसे आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देने के प्रक्रिया संबंधी उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।’

सिब्बल के जवाब में विशेष सरकारी वकील आनंद ग्रोवर ने कहा कि एयरसेल मैक्सिस मामला विशेष 2जी अदालत में ही चलना चाहिए। इस अदालत को उच्चतम न्यायालय ने विशेष रूप में 2जी घोटाले से उत्पन्न मामलों की सुनवायी के लिए गठित किया है। इससे पहले इस कंपनी ने सीबीआई के इस आरोप का उच्चतम न्यायालय में विरोध करते हुए कहा था कि इस आरोप का 2जी घोटाले से कोई वास्ता नहीं है कि 2006 में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन ने चेन्नई के उद्यमी और एयरसेल के प्रवर्तक सी शिवशंकरन पर दबाव डाल कर उन्हें उस कंपनी को मलेशिया के मैक्सिस समूह को बेचने के लिए मजबूर किया था। विशेष 2जी अदालत ने इससे पहले 17 सितंबर को अपने अदेश में मारन बंधुओं और अन्य द्वारा दायर उन अर्जियों को खारिज कर दिया था जिसमें सीबीआई और प्रवर्तन निदेशलय द्वारा एयरसेल -मैक्सिस सौदे से संबंधित दो मामलों पर सुनवाई करने के उसके अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी गयी थी। उनका दावा था कि ये मामले प्रत्यक्ष या परोक्ष, किसी भी प्रकार से 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से संबंधित नहीं हैं।

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First Published on October 17, 2016 9:32 pm

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