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यूनियन बजट 2017: कृषि क्षेत्र के लिए रिकॉर्ड ₹10 लाख करोड़ का कर्ज देने का लक्ष्य

वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि अलग से 5,000 करोड़ रुपए के कोष से सूक्ष्म सिंचाई कोष बनाया जाएगा।
Author नई दिल्ली | February 2, 2017 11:22 am
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य के साथ सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए कृषि ऋण का लक्ष्य 11 प्रतिशत बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपए कर दिया है तथा लघु सिंचाई और डेयरी प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने के लिए बजट में 13,000 करोड़ रुपए के कोष के साथ दो विशेष कोष बनाने की घोषणा की गयी है। आज (बुधवार, 1 फरवरी) पेश अगले साल के बजट में सरकार ने कृषि मंत्रालय के बजट आवंटन को भी छह प्रतिशत बढ़ाकर इस बार के 48,072 करोड़ रुपए (संशोधित अनुमान) की जगह वर्ष 2017-18 के लिए 51,026 करोड़ रुपए कर दिया है। अगले वित्तवर्ष के लिए कृषि एवं सहायक क्षेत्रों के लिए कुल आवंटन 58,663 करोड़ रुपए है जो पहले 52,821 करोड़ रुपए था।

संसद में वर्ष 2017-18 के लिए केन्द्रीय बजट प्रस्तुत करते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने नई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत अगले वित्त वर्ष में 40 प्रतिशत कृषि रकबे को दायरे में लेने का लक्ष्य निर्धारित किया है और इस योजना के लिए 9,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा, ‘बेहतर फसल के लिए किसानों को समय पर पर्याप्त ऋण उपलब्ध होना चाहिये। वर्ष 2017-18 में कृषि ऋण के लिए लक्ष्य को 10 लाख करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है जो एक नया रिकॉर्ड है।’ सरकार ने किसानों को अल्पावधिक फसल ऋण पर ब्याज सहायता के लिए 15,000 करोड़ रुपए का अलग प्रावधान किया है। चालू वित्तवर्ष 2016-17 में नौ लाख करोड़ रुपए का फसल ऋण देने का लक्ष्य है।

जेटली ने कहा कि सरकार दूरदराज के क्षेत्रों .. पूर्वी राज्यों के साथ साथ जम्मू कश्मीर में कृषि के लिए ऋण का पर्याप्त रिण प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास करेगी। किसानों को तीन लाख रुपए तक का अल्पावधिक फसल ऋण सात प्रतिशत प्रतिवर्ष की सब्सिडीप्राप्त ब्याज दर पर दिया जाता है। बिना भूल चुक के ऋण लौटाने वालों को तीन प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी जाती है जिसके कारण प्रभावी ब्याज दर चार प्रतिशत बैठता है। जेटली ने कहा कि बेहतर मानसून के कारण कृषि क्षेत्र की वृद्धि चालू वित्तवर्ष में 4.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ किसानों को बचाने के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार के द्वारा शुरू की गई फसल बीमा योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत वर्ष 2016-17 में बीमित रकबे को 30 प्रतिशत प्रतिशत से बढ़ाकर 2017-18 में 40 प्रतिशत और वर्ष 2018-19 में 50 प्रतिशत किया जायेगा।’

जेटली ने कहा कि इस फसल बीमा योजना को लागू करने के लिए अगले वित्तवर्ष में बजट आवंटन को 9,000 करोड़ रुपए रखा गया है। चालू वर्ष के लिए आवंटन 13,240 करोड़ रुपए है जिसका कारण पहले के दावों का निपटान किया जाना है। कृषि क्षेत्र में बेहतर पानी के इस्तेमाल पर जोर देते हुए जेटली ने सूचित किया कि नाबार्ड में पहले ही दीर्घावधिक सिंचाई कोष को स्थापित किया गया है जिसके कोष को हाल में बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए किया गया है। उन्होंने कहा कि अब ‘इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नाबार्ड में एक समर्पित लघु सिंचाई कोष को स्थापित किया गया है, ‘प्रति बूंद अधिक फसल’। इस कोष में आरंभ में 5,000 करोड़ रुपए का कोष होगा।’

किसानों के लिए डेयरी क्षेत्र को अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण स्रोत बताते हुए जेटली ने नाबार्ड में अलग से ‘डेयरी प्रसंस्करण एवं आधारभूत ढांचा विकास कोष’ का निर्माण करने की घोषणा की जिसका तीन वर्षो में कुल कोष 8,000 करोड़ रुपए का होगा और आरंभिक कोष का आकार 2,000 करोड़ रुपए का होगा। जेटली ने कहा कि सरकार ठेका खेती पर एक आदर्श कानून को तैयार करेगी जिसे राज्य सरकारों को वितरित किया जायेगा। सरकार ने अगले वित्तवर्ष के लिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा प्रबंधित किये जाने वाले मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के तहत चालू वित्तवर्ष के 3,400 करोड़ रुपए की जगह 3,500 करोड़ रुपए का प्रस्ताव किया है। इस कोष का इस्तेमाल मौजूदा समय में दलहनों के बफर स्टॉक को निर्मित करने के लिए किया जा रहा है।

बाजार हस्तक्षेप योजना और मूल्य समर्थन योजना के तहत सरकार ने अगले वित्तवर्ष के लिए करीब 200 करोड़ रुपए रखा है जो चालू वर्ष में 146 करोड़ रुपए था। कृषि बाजार सुधार के बारे में मंत्री ने कहा कि राज्यों से शीघ्र नष्ट होने वाले कृषि उत्पादों को कृषि मंडी कानून की सूची से बाहर करने की अपील की जायेगी ताकि किसानों को ऐसा उत्पाद बेचने के अधिक विकल्प उपलब्ध हो और वे बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें। वित्तमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई.नाम) के दायरे को मौजूदा 250 बाजार से बढ़ाकर 585 मंडियों तक किया जायेगा। उन्होंने कहा कि हरेक ई.नाम बाजार को साफ सफाई, ग्रेडिंग करने और पैकेजिंग सुविधाओं की स्थापना के लिए 75 लाख रुपए तक की सीमा तक सहायता प्रदान की जायेगी। इससे किसानों के उत्पादों का मूल्यवर्धन होगा।

उन्होंने कहा कि चूंकि 40 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसान ऋण के लिए सहकारी संस्थाओं पर निर्भर करते हैं इसलिए प्राथमिक ऋण समितियां (पैक्स) इस क्षेत्र के लिए रिण सहायता उपलब्ध कराने के अग्रिम मोर्चे की भूमिका निभाती हैं। जेटली ने कहा, ‘नाबार्ड को 63,000 क्रियाशील पैक्स को जिला सहकारी बैंकों के कंप्यूटर आधारित कोर बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने के लिए मदद दी जायेगी। यह काम तीन साल में पूरा किया जायेगा और इसमें 1,900 करोड़ रुपए का खर्च आयेगा। इसमें राज्य सरकारें भी मदद करेंगी।’ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करने के काम में गति लाने के लिए जेटली ने सभी 648 केवीके कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) में नयी छोटी प्रयोगशालाओं को स्थापित करने की घोषणा की। कुछ प्रसंस्कृत खाद्य सामग्रियों के आयात को रोकने और घरेलू उद्योगों को संरक्षित करने के लिए सरकार ने भुने हुए और नमकीन बनाये गये काजू पर सीमाशुल्क को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया है।

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  1. S
    sach
    Feb 1, 2017 at 10:49 am
    किसानों को कर्जदार बनाने से नहीं बल्कि कर्जमुक्त बनाने से किसान सशक्त होगा....करना था तो देशभर के किसानों के २.५ लाख रुपये तक के सारे कर्ज माफ़ कर देते...!
    Reply
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