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बजट में होंगे और नए वादे? पर अब तक ये तीन बड़े वादे पूरे नहीं कर पाई नरेंद्र मोदी सरकार

भाजपा ने आम चुनाव से पहले कहा था कि अगर केंद्र में उसकी सरकार बनी तो वो अगले 10 सालों में करीब 25 करोड़ रोजगार सृजन करने की कोशिश करेगी।
संसद का बजट सत्र शुरू होने से पहले मीडिया को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीआईबीफोटो)

साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)  के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बार-बार कहा कि मुझे बस 60 महीने दे दीजिए। चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। देखते ही देखते ही उनका आधा कार्यकाल बीत भी गया। नरेंद्र मोदी सरकार बुधवार (एक फरवरी) को अपना तीसरा आम बजट पेश करने जा रही है लेकिन क्या सरकार अब तक अपने आधे वादे भी पूरे कर पायी है? और क्या सरकार इस आम बजट में इन वादों को पूरा करने के लिए जरूरी घोषणाएं करेगी?

 1- भ्रष्टाचार मिटाने का वादा-  2014 के लोक सभा चुनाव में सबसे बड़े मुद्दों में से एक था भ्रष्टाचार मिटाने का वादा। नरेंद्र मोदी ने देश में होने वाले भ्रष्टाचार को मिटाने और विदेशों में पड़े काले धन को वापस लाने का बार-बार जिक्र किया था। लेकिन क्या ढाई साल में मोदी सरकार का प्रदर्शन अपने वादे के अनुरूप रहा है? दुनिया के प्रमुख देशों में भ्रष्टाचार की निगरानी करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल की करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (सीपीआई) 2015 में भारत को 168 देशों में 76वें स्थान पर रखा था। संस्था ने भ्रष्टाचार के मामले में भारत को 100 में 38 अंक दिए गए थे। संस्था में 0 अंक का अर्थ होता है पूरी तरह भ्रष्ट और 100 अंक का मतलब है पूरी तरह ईमानदार। साल 2014 में भी भारत सीपीआई तालिका में इसी स्थान पर था। भ्रष्टाचार के मामले में भारत ब्राजील, बुरकीना फासो और थाईलैंड जैसे देशों के बरारब था। साल 2013 और 2012 में भारत को इस तालिका में 36 अंक मिले थे। यानी भारत में भ्रष्टाचार में बहुत मामूली कमी आयी है। इस कमी में मोदी सरकार के आने के बाद कोई उल्लेखनीय तेजी नहीं आयी है। बहरहाल, 2016 की सीपीआई तालिका सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले से भ्रष्टाचार पर कितना फर्क पड़ा है।

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2- सबको घर देने का वादा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक सबको घर देने का वादा किया था। मोदी सरकार ने 2015 में “2022 तक सबको घर” कार्यक्रम को मंजूरी भी दे दी। इसका मकसद शहरी झुग्गियों को खत्म करना और लोगों को किफायती दर पर आवास उपलब्ध कराना है। केपीएमजी एलएलपी की रिपोर्ट के अनुसार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 11 करोड़ नए घर बनाने पड़ेंगे। इस योजना पर लगभग 2000 अरब डॉलर की लागत आएगी। इस तरह भारत सरकार को “2022 तक सबको घर” के मकसद को पूरा करने के लिए साल 2022 तक हर वर्ष 250-260 अरब डॉलर खर्च करना होगा। आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय के अनुसार इस योजना के तहत 27 अक्टूबर 2016 तक 14,511 घरों का निर्माण हुआ है। 1,44,321 घरों का निर्माण चल रहा है और 434,723 घरों का निर्माण शुरू होना बाकी है। लेकिन नए घरों के निर्माण की मौजूदा दर देखकर नहीं लगता कि सरकार इस योजना का लक्ष्य पाने के लिए जरूरी वार्षिक औसत को पूरा कर पाएगी।

3- हर साल ढाई करोड़ लोगों को रोजगार का वादा- भाजपा ने आम चुनाव से पहले कहा था कि अगर केंद्र में उसकी सरकार बनी तो वो अगले 10 सालों में करीब 25 करोड़ रोजगार सृजन करने की कोशिश करेगी। वहीं नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में हर साल एक करोड़ रोजगार तैयार करने की बात कही थी। केंद्र में भाजपा गठबंधन की सरकार भी बन गयी और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री भी बन गए लेकिन रोजगार के मामले में देश की हालत पहले से बुरी ही हुयी। भारत सरकार के श्रम कार्यालय द्वारा पिछले साल जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार पीएम मोदी पहले दो सालों में रोजगार तैयार करने के मामले में अपने पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार से पीछे ही रहे हैं। इस आंकड़े के अनुसार जहां साल 2013 में 4.19 लाख नई नौकरियां निकली थीं, वहीं साल 2014 में 4.21 लाख और 2015 में वह 1.35 लाख नई नौकरियां ही तैयार हुईं। इन आंकड़ों के अनुसार पिछले छह सालों में सबसे कम रोजगार 2015 में तैयार हुए। ये आंकड़े रोजगार के आठ प्रमुख क्षेत्रों टेक्सटाइल, लेदर, मेटल, ऑटोमोबाइल और जूलरी इत्यादि के 1,932 यूनिट के अध्ययन पर आधारित थे। ये आंकड़े इसलिए भी चिंतजनक हैं क्योंकि एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर महीने 10 लाख नए युवा रोजगार बाजार में आते हैं। वहीं साल 2016 में सरकार द्वारा नोटबंदी लागू करन से भी असंगठित क्षेत्र में काफी लोगों का रोजगार छिन जाने की बात कही जा रही है।

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