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यूनियन बजट 2017: युवाओं को किफायती फीस, सस्ते गैजेट व रोज़गार की आस

देश की फिलहाल 47.8 फीसदी आबादी 29 वर्ष से नीचे की है। भारत अगले तीन वर्षो में विश्व के कुल श्रमबल का 20 फीसदी होने जा रहा है।
Author नई दिल्ली | February 1, 2017 10:10 am
बजट सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक के बाद संसद भवन में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली। (PTI Photo by Manvender Vashist/30 Jan, 2017)

वित्तवर्ष 2017-18 के आम बजट से देश, विशेष रूप से युवाओं को बहुत उम्मीदें हैं। युवाओं को इस साल के आम बजट से किफायती फीस, सस्ते इलेक्ट्रॉनिक गैजेट और रोजगारों की आस है। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली एक फरवरी, यानी बुधवार को संसद में आम बजट पेश करेंगे। इस संदर्भ में कई छात्रों से बात की। इस बातचीत में युवाओं ने युवा केंद्रित बजट की मांग की है जो गरीब छात्रों को उच्च शिक्षा जारी रखने में मदद कर सके, सरकार के डिजिटल इंडिया के अभियान को सफल बनाने के लिए सस्ते इलेक्ट्रॉनिक गैजेट उपलब्ध करा सके।

देश की फिलहाल 47.8 फीसदी आबादी 29 वर्ष से नीचे की है। भारत अगले तीन वर्षो में विश्व के कुल श्रमबल का 20 फीसदी होने जा रहा है। कई युवा पुरूष और महिलाएं सरकार को संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करने देने पर जोर दे रहे हैं कि किस तरह से युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक रूप से प्रयोग में लाया जा सके, ताकि अधिक उपयोगी नतीजे मिल सके। वाराणसी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे अंकित मिश्रा ने कहा, “मैं चाहता हूं कि सरकार ऐसी घोषणा करे जिससे छात्रों को लाभ मिल सके। ऐसे कई छात्र हैं जो उच्च शिक्षा की भारी भरकम फीस का भुगतान करने में समक्ष नहीं हैं।”

मिश्रा ने बताया, “फीस भुगतान की सरंचना को सामान्य बनाए जाने की जरूरत है। कई बार होनहार छात्र वित्तीय दिक्कतों की वजह से पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते। यह अरुण जेटली के ध्यान में बना रहना चाहिए।” सिंह ने बताया, “यह कराधान प्रणाली पर निर्भर करता है। सरकार को अब आम लोगों के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। कर इतने अधिक हैं कि लोगों को जरूरी आवश्यकता के सामान भी नहीं मिल रहे। आम आदमी पहले ही नोटबंदी से जूझ चुके हैं। बजट से उनकी समस्याएं नहीं बढ़नी चाहिए।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का दोश को डिजिटल बनाने और नकदी रहित बनाने का एजेंडा बनाने की उम्मीद है, जबकि कुछ को जेटली के बजट से गैजेटों के किफायती होने की उम्मीद है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र मोहित शर्मा ने कहा, “सरकार खुद ही डिजिटल इंडिया का प्रचार कर रही है। सरकार को मोबाइल सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतें कम करनी चाहिए।” शर्मा ने कहा, “भारत केवल तभी डिजिटल बन सकता है जब सभी के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा हो। इन्हें या तो सब्सिडी देनी चाहिए या कीमतों में कटौती करनी चाहिए।” आईटी पेशेवर सामिया खान भी कहती हैं, “सरकार को कुछ कौशल आधारित योजनाओं का ऐलान करना चाहिए जिससे डिजिटल इंडिया का सपना संभव हो सके। ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों को निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।”

खान चाहती हैं कि सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करे। वह कहती हैं, “इन्हें अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों की शिक्षा के लिए अधिक छात्रवृत्तियों के लिए धनराशि आवंटित करनी चाहिए। युवा मुसलमान महिलाओं के लिए शिक्षा ऋण की व्यवस्था करनी चाहिए।” एक 23 वर्षीया वकील समीक्षा शर्मा सरकार की आलोचना करती हुई कहती हैं कि उन्हें बजट से कुछ नए की उम्मीद नहीं है। उन्हें संदेह होता है कि वास्तव में बजट में सभी क्षेत्रों के लिए धनराशि का आवंटन होता भी है या नहीं।

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  1. G
    Gaurav
    Feb 1, 2017 at 4:17 am
    Umid. To.. Bhut.. H.. Is.. Bjt s.. Or.. Umid.. P.. Duniyaaa kaym.. H.. I.. Things.. Is bar bjt.. Hogoo.. Student. K.. Liyeee
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    सबरंग