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क्या भारतीय टैक्स चोर हैं? 121 करोड़ से अधिक आबादी में सालाना 5 लाख से अधिक कमायी बताने वाले केवल 76 लाख

Union Budget 2017: वित्त वर्ष 2015-16 में देश में कुल 3.7 करोड़ लोगों ने टैक्स रिटर्न भरा था। इनमें से 99 लाख लोगों ने अपनी सालाना आय ढाई लाख रुपये बतायी थी यानी कानूनन इन लोगों को सरकार को कोई टैक्स नहीं देना पड़ा।
बुधवार (एक फरवरी) को आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि देश में टैक्स देने वालों की बड़ी आबादी पांच लाख रुपये से कम सालाना आय बताती है। (पीटीआई फोटो)

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार (एक फरवरी) को वित्त वर्ष 2017-18 के लिए बजट पेश करते समय कहा कि भारतीयों द्वारा दिए जाने वाले टैक्स के आंकड़े उनकी आमदनी और खर्च के आंकड़ों से मेल नहीं खाते। वित्त मंत्री ने संसद में टैक्स चोरों पर हमला करते हुए कहा, “भारत में टैक्स चोरी एक जीवन पद्धति बन चुकी है। हम मोटे तौर पर टैक्स न देने वाला समाज हैं। जब बहुत सारे लोग टैक्स चुराते हैं तो इसका खमियाजा ईमानदार लोगों को भुगतना पड़ता है।”  साल 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 121 करोड़ थी। अनुमान के मुताबिक इस समय देश की आबादी 125 करोड़ से अधिक हो चुकी है जिसमें से केवल 3.7 करोड़ लोग आयकर रिटर्न भरते हैं।

जेटली ने संसद में केवल जुमलेबाजी नहीं की। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में ठोस आंकड़े भी पेश किए। वित्त मंत्री  द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2015-16 में देश में कुल 3.7 करोड़ लोगों ने टैक्स रिटर्न भरा था। इनमें से 99 लाख लोगों ने अपनी सालाना आय ढाई लाख रुपये बतायी थी यानी कानूनन इन लोगों को सरकार को कोई टैक्स नहीं देना पड़ा। 1.95 करोड़ लोगों ने अपनी सालाना कमायी ढाई लाख रुपये से पांच लाख रुपये बतायी थी। 52 लाख लोगों ने अपनी सालाना आय पांच लाख रुपये से 10 लाख रुपये बतायी थी। पूरे देश में केवल 24 लाख लोगों ने अपनी आय 10 लाख रुपये सालाना से अधिक बतायी थी।

इतना ही नहीं जिन 76 लाख लोगों ने आयकर विभाग को अपनी सालाना पांच लाख रुपये से अधिक बतायी है उनमें से 56 लाख लोग नौकरी करने वाले हैं। देश में 50 लाख रुपये से अधिक कमाने वाले लोगों की संख्या केवल 1.72 लाख है। जेटली ने इन आंकड़ों को रखते हुए ही देश के आमदनी और खर्च के आंकड़ों और टैक्स देने वालों की संख्या से जुड़ी विसंगति पर तंज किया।

जेटली ने संसद में कहा, “हम इन आकंड़ों की उलटबांसी समझने के लिए पिछले पांच सालों में बिकी 1.25 कारों के आंकड़ों के संग रखकर देख सकते हैं। और साल 2015 में कारोबार या पर्यटन के लिए विदेश जाने वाले भारतीयों की संख्या दो करोड़ रही थी।” जेटली ने कहा कि भारत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तुलना में टैक्स का अनुपात बहुत कम है। जेटली ने कहा कि सामाजिक न्याय की दृष्टि से प्रत्यक्ष कर (आयकर इत्यादि) का आंकड़े अप्रत्यक्ष कर (सर्विस टैक्स इत्यादि) की तुलना में नगण्य है।

जेटली ने देश को बताया कि देश में कुल 4.2 करोड़ लोग नौकरीपेशा हैं लेकिन आयकर रिटर्न केवल 1.74 करोड़ नौकरीपेशा लोगों ने भरा। वहीं असंगठित क्षेत्र के निजी उद्यम और संस्थानों की संख्या 5.6 करोड़ है लेकिन आयकर रिटर्न केवल 1.81 करोड़ लोगों ने भरा था। जेटली ने संसद को बताया, “देश में पंजीकृत 13.94 लाख कंपनियों में से 31 मार्च 2014 तक केवल 5.97 ने वित्त वर्ष 2016-17 के लिए आयकर रिटर्न भरा है। इनमें से 2.76 लाख कंपनियों ने खुद को घाटे में या शून्य आय दिखायी है।”

वित्त वर्ष 2016-17 के आयकर रिटर्न में केवल 2.85 कंपनियों ने खुद को मुनाफे में बताया है। इन कंपनियों ने अपना सालाना मुनाफा एक करोड़ रुपये से कम बताया है। वहीं केवल 28,667 कंपनियों ने एक करोड़ रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक का सालाना मुनाफा दिखाया है। केवल 7781 कंपनियों ने अपनी सालाना आय 10 करोड़ रुपये से ज्यादा बतायी है।

वीडियोः बजट 2017 की मुख्य बातें

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  1. A
    Ajit Rajput
    Feb 2, 2017 at 6:45 am
    सर नौकरीपेशा इंसान तो टैक्स भर ही रहा है, पर में चाहूंगा की सरकार उन लोगो पे भी नकेल कैसे जो बड़े बड़े लोन नहीं चुकाते, अधिक आय होने के बाद भी टैक्स चुराते है, हवाला करने वालो को सजा के नियम कठोर हो, सभी लोगो को डिजिटलिज़शन के मार्फ़त ही लेनदरी देनदारी करने के लिए बाध्य करे. और एक अहम् फैसला ये भी ले की नेता लोग भी टैक्स भरे. क्योंकि ये नेतागिरी करने वाला तबका सबसे ज्यादा मजे कर रहा है इस देश में लोगो के टैक्स के पैसे पे.
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  2. S
    sach
    Feb 2, 2017 at 2:18 am
    नोटबंदी करके तो देख लिया....इतने लोगों की जान ली.... अब भी भारतीयों को चोर कह रहे हो? ......असली चोर तो कुर्सी पर बैठे हैं...
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