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जानें: यूनियन बजट 2017 में क्या हुआ सस्ता और महंगा

जेटली ने कहा, "जीएसटी लागू होने से केंद्र और राज्य सरकारों को अधिक कर मिल सकता है क्योंकि इससे कर का दायर बढ़ेगा।'
Author नई दिल्ली | February 2, 2017 00:39 am
संसद में आम बजट 2017 पेश करते केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली। (PTI Photo/TV Grab/1 Feb, 2017)

सिगरेट पीने और तंबाकू खाने वालों को अब ज्यादा जेबें ढीली करनी होगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 के अपने बजट में सिंगरेट और तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। इसके अलावा देश में एसेम्बल होने वाले मोबाइल फोन और एलईडी लाइट महंगे होंगे। वित्त मंत्री ने आयातित प्रिंटेड सर्किट बोर्ड तथा कल-पुर्जों पर शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। हालांकि वित्त मंत्री ने सोलर टेम्पर्ड ग्लास, फ्यूल सेल आधारित बिजली उत्पादन प्रणाली पवन ऊर्जा चालित ऊर्जा इकाइयों पर शुल्क कटौती कर स्वच्छ ऊर्जा को सस्ता बनाने का प्रयास किया है। जीएसटी के क्रियान्वयन की उम्मीद से बजट में कर ढांचे में बड़े बदलाव से बचा गया है। इससे दैनिक रूप से उपयोग होने वाले ज्यादातर सामान के मामले में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

जेटली ने बजट प्रस्तुत करते हुए कहा, ‘जीएसटी के क्रियान्वयन से कर का दायरा बढ़ने से केंद्र तथा राज्य सरकार दोनों को अधिक कर मिलने की संभावना है। इसीलिए मैंने उत्पाद शुल्क और सेवा कर की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव नहीं किया क्योंकि जल्दी ही इसका स्थान जीएसटी लेगा।’ इसके बावजूद तंबाकू और सिगरेट को नहीं छोड़ा गया। गैर-प्रसंस्कृति तंबाकू पर उत्पाद शुल्क को मौजूदा 4.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.3 प्रतिशत कर दिया गया जबकि पान मसाला पर उत्पाद शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है।

इसी प्रकार, सिगार, चिलम (चुरूट) पर उत्पाद शुल्क को 12.5 प्रतिशत या प्रति 1,000 नग पर 4,006 रुपए, इनमें जो भी ज्यादा होगा, किया गया है। पहले यह 12.5 प्रतिशत या 3,755 रुपए प्रति 1,000 नग था। खैनी, जर्दा जैसे चबाने वाला तंबाकू पर भी उत्पाद शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किया गया है। इसी प्रकार, हाथ से बनी बीड़ी पर उत्पाद शुल्क मौजूदा 21 रुपए से बढ़ाकर 28 रुपए प्रति 1,000 नग (बीड़ी) किया गया है। वहीं ‘पेपड़ रोल्ड’ बीड़ी के मामले में उत्पाद शुल्क 21 रुपए से बढ़ाकर 78 रुपए प्रति 1,000 किया गया है। मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाली पोपुलेटेड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) पर एसएडी 2 प्रतिशत होगा जो पहले शून्य होगा।

इसी प्रकार, एलईडी लाइट के विनिर्माण में लगने वाले कल-पुर्जे पर मूल सीमा शुल्क 5 प्रतिशत और सीवीडी 6 प्रतिशत लगेगा जो पहले शून्य था। बजट में की गयी घोषणा के तहत आयातित काजू (भुना हुआ, नमकीन) भी महंगा होगा। इस पर मूल सीमा शुल्क मौजूदा 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है। आयातित चांदी के मेडल, चांदी के सिक्के (चांदी की मात्रा 99.9 प्रतिशत से कम नहीं हो), चांदी के अर्द्ध-विनिर्मित रूप तथा चांदी के सामान भी महंगे होंगे। क्योंकि इस पर अब 12.5 प्रतिशत सीवीडी लगेगा। वहीं दूसरी तरफ वित्त मंत्री ने ऐसी भी कुछ घोषणा की है जिससे उपभोक्ताओं को मदद मिलेगी। आईआरसीटीसी की वेबसाइट के जरिये टिकट की बुकिंग अब सस्ती होगी क्योंकि इस पर सेवा शुल्क को वापस ले लिया गया है।

‘आरओ वाटर प्यूरिफायर’ भी थोड़ा सस्ता होगा। आयातित मेम्ब्रेन शीट और आरओ मेम्ब्रेन में उपयोग होने वाले उपकरण पर मूल सीमा शुल्क 12.5 प्रतिशत से कम कर 6 प्रतिशत किया गया है। हालांकि आरओ मेम्ब्रेन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये सरकार ने इस पर मूल सीमा शुल्क मौजूदा 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया है। एलएनजी पर सीमा शुल्क की मूल दर पांच से घटा कर 2.5 प्रतिशत की गयी है। इससे बिजली और उर्वरक की लागत कम होगी। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के इरादे से सरकार ने सौर पैनल में उपयोग होने वाले सौर टेम्पर्ड ग्लास पर मूल सीमा शुल्क को पांच प्रतिशत से कम कर शून्य कर दिया गया है। इसी प्रकार, देश में स्थापित फ्यूल सेल आधारित बिजली उत्पादन प्रणाली के लिये जरूरी सभी मशीनरी पर सीमा शुल्क तथा सीवीडी को कम कर 5 और 6 प्रतिशत किया गया है जो पहले 10:7 और 12.5 प्रतिशत था।

साथ ही पवन चालित ऊर्जा उत्पादकों के लिये ‘कास्ट कंपोनेनेट’ के विनिर्माण में काम आने वाले रेजिन और उत्प्रेरक पर लगने वाला बीसीडी, सीवीडी और एसएडी (विशेष अतिरिक्त शुल्क) 24 प्रतिशत से कम कर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है। बजट में इन सामानों पर उत्पाद शुल्क शून्य करने का प्रस्ताव किया गया है जो फिलहाल 12.5 प्रतिशत है। चमड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिये जेटली ने बैग और जूते जैसे चमड़ा का उत्पाद बनाने में उपयोग होने वाले वनस्पति सत पर सीमा शुल्क 7.5 प्रतिशत से कम कर 2.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया। इसी प्रकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में मदद के लिए प्वाइंट ऑफ सेल कार्ड रीडर मशीन, अंगुली के निशान को पहचाने वाली मशीन भी सस्ती होंगी क्योंकि इन पर शुल्क को शून्य कर दिया गया है। साथ ही रक्षा सेवाओं के लिये सामूहिक बीमा को भी सस्ता बनाने का प्रस्ताव किया गया है।

सस्ते हुए सामान : पवन चक्की, आरओ, पीओएस, पार्सल, चमड़े का सामान, सौर पैनल, प्राकृतिक गैस, बायोगैस, नायलॉन, ऑनलाइन रेल टिकट, सिल्वर फॉयल, सौर ऊर्जा, डिब्बाबंद सब्जियां, नमक, जीवन रक्षक दवाइयां, एलसीडी एवं एलईडी, फिंगर प्रिंट रीडर एवं स्कैनर

महंगे हुए सामान : मोबाइल फोन, पान मसाला, सिगरेट, सिगार, बीड़ी, तंबाकू, एलईडी बल्ब, चांदी का सामान, हार्डवेयर, स्टील का सामान, ड्राय फ्रूट्स, चांदी के गहने, एल्यूमीनियम, मोबाइल फोन विनिर्माण में काम आने वाले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, एलईडी बल्ब विनिर्माण में उपयोग होने वाले कल-पुर्जे, पार्सल के जरिए आयातित सामान, वाटर फिल्टर मेंब्रेन, स्टेनलेस स्टील टेप्स, चमड़े के फुटवियर, विदेशी साइकिल।

 

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  1. S
    sach
    Feb 2, 2017 at 2:02 am
    फेंकली ने सभी चीजों के दाम तो बढ़ा दिए हैं....इससे बढ़िया बजट तो नर्सरी के बच्चे बना सकते हैं...
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग