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‘नोटबंदी से जीडीपी की वृद्धि दर का होगा आधा फ़ीसद नुकसान’

आर्थिक समीक्षा 2016-17 में कहा गया है कि 8 नवंबर, 2016 को 500 और 1,000 का नोट बंद किए जाने के बाद पैदा हुए नकदी संकट का जीडीपी पर उल्लेखनीय प्रभाव होगा।
Author नई दिल्ली | January 31, 2017 16:24 pm
केंद्रीय वित्‍तमंत्री अरुण जेटली। (फाइल फोटो)

नोटबंदी की वजह से चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में 0.25 से 0.50 प्रतिशत का नुकसान होगा। हालांकि, दीर्घावधि में इससे अर्थव्यवस्था को कई लाभ मिलेंगे। मसलन ब्याज दरों में कमी आएगी, भ्रष्टाचार खत्म होगा और आपचारिक क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ेंगी। आर्थिक समीक्षा 2016-17 में कहा गया है कि 8 नवंबर, 2016 को 500 और 1,000 का नोट बंद किए जाने के बाद पैदा हुए नकदी संकट का जीडीपी पर उल्लेखनीय प्रभाव होगा। सात प्रतिशत को आधार मानकर इसमें 0.25 से 0.50 प्रतिशत की गिरावट आएगी। समीक्षा में हालांकि अनुमान लगाया गया है कि 2017-18 में वृद्धि दर बढ़कर 6.75 से 7.5 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। चालू वित्त वर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है जो केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के इसी महीने जारी 7.1 प्रतिशत के अनुमान से कम है।

इसमें उम्मीद जताई है कि प्रणाली में नकदी पुन: पहुंचने के बाद अप्रैल, 2017 से नकदी संकट समाप्त हो जाएगा। साथ ही इसमें कहा गया है कि नोटबंदी का जीडीपी की वृद्धि दर पर प्रतिकूल असर अस्थायी होगा। दस्तावेज में कहा गया है कि एक बार नकदी आपूर्ति पूरी होने के बाद अर्थव्यवस्था सामान्य स्थिति में आ जाएगी। यह काम मार्च अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। नोटबंदी के रीयल एस्टेट पर प्रभाव के बारे में समीक्षा में कहा गया है कि आठ प्रमुख शहरों में 8 नवंबर, 2016 के बाद से संपत्ति कीमतों में गिरावट का रुख है। समीक्षा कहती है, ‘एक सुधरी हुई कराधान प्रणाली से आय घोषणा बढ़ेगी तथा कुछ अधिक उत्साही कर प्रशासन की आशंकाओं को दूर किया जा सकेगा।’

इससे पहले आर्थिक सुधारों को और गति देने पर जोर देते हुये वर्ष 2016-17 की आर्थिक समीक्षा में चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि दर के कमजोर पड़कर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, अगले वित्त वर्ष के दौरान इसके सुधर कर 6.75 से 7.5 प्रतिशत के दायरे में पहुंच जाने की उम्मीद व्यक्त की गई है। वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा संसद में पेश वर्ष 2016-17 की आर्थिक समीक्षा में और सुधारों पर जोर दिया गया है।

पिछले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रही थी जबकि केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने चालू वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी वृद्धि के 7.1 प्रतिशत रहने का अग्रिम अनुमान लगाया है। आर्थिक समीक्षा में देश की आर्थिक प्रगति के रास्ते में आड़े आने वाली चुनौतियों के बारे में बताया गया है। इनमें संपत्ति के अधिकार तथा निजी क्षेत्र के बारे में दुविधा की स्थिति और खास कर आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति तथा आय के पुनर्वितरण में के मालों में सरकार की कमियां शामिल हैं।

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