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भारतीय नेताओं के ‘कुकृत्य’ देखकर विंस्टन चर्चिल परलोक में बहुत खुश होगा…

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की खबरें न सिर्फ देश की चहु दिशाओं से आ रही हैं, बल्कि यह भी लगता है कि यह लगभग किसी अघोषित सर्वदलीय कार्यक्रम का हिस्सा है।
शायद ही कोई राजनीतिक पार्टी बची हो जिसके दो-चार नेता भ्रष्टाचार के आरोपों से न घिरे हों। (एक्सप्रेस ग्राफिक्स)

मानो राजनीति के कुएं में भांग पड़ गयी हो। देश के चारों ओर से बड़े- बड़े नेताओं के खिलाफ लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों की खबरों की इन दिनों बाढ़ सी आई है। भारत की स्वतंत्रता से पहले ब्रिटेन के पूर्व प्रधान मंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि आजादी के बाद भारत के नेता देश की दुर्दशा कर देंगे। यहां के नेताओं को चाहिए था कि वे आजादी विरोधी चर्चिल की उपर्युक्त भविष्यवाणी को अपने कर्मों के जरिए गलत साबित करने की कोशिश करते । पर उसके विपरीत हो रहा है। पहले भ्रष्टाचार की छोटी मोटी घटनाएं सामने आती थीं। अब तो घोटाले महा घोटालों में बदल गए हैं।

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की खबरें न सिर्फ देश की चहु दिशाओं से आ रही हैं, बल्कि यह भी लगता है कि यह लगभग किसी अघोषित सर्वदलीय कार्यक्रम का हिस्सा है। चाहे हिमाचल प्रदेश के मुख्य मंत्री वीरभद्र सिंह का मामला हो या भाजपा के नेता एक नाथ खडसे का। चाहे पश्चिम बंगाल का नारद और शारदा घोटाला हो या फिर तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री विजय भास्कर के यहां आयकर छापे का सवाल। उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम सर्वत्र भ्रष्टाचार का सर्वग्राही दानव सक्रिय है।

इधर पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद का परिवार मिट्टी खरीद घोटाले में फंसता नजर आ रहा है। यह मामला रेल होटल बिक्री घोटाले तक भी जा सकता है। शुंगलू कमेटी की रपट ने तो अरविंद केजरीवाल सरकार की भी कलई खाल कर रख दी है। पिछले महीने जब कोलकाता हाई कोर्ट ने जब नारद स्टिंग मामले को जांच के लिए सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि इस जांच को रोकवाने के लिए हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। यदि आप निर्दोष हैं तो फिर जांच से घबराहट क्यों?

प्रवर्तन निदेशालय ने जब धन शोधन मामले में वीरभद्र सिंह के 27 करोड़ रुपए की लागत से तैयार फार्म हाउस को जब्त किया तो हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनके खिलाफ साजिश का परिणाम है। इसी महीने जब सीबीआई ने एसोसिएटेड जर्नल के लिए भूमि आवंटन के मामले में भूपेंदर सिंह हुड्डा के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र का केस दर्ज किया तो हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह राजनीतिक बदले की भावना से उठाया गया कदम है।

जनसत्ता डाॅटकाम द्वारा उद्घाटित पटना के मिट्टी घोटाले पर उप-मुख्य मंत्री तेजस्वी यादव ने इसी तरह का बयान दिया है। मुख्य मुददे पर चर्चा से बचते हुए उन्होंने कहा है कि भाजपा नेता सुशील मोदी बदनाम करने की राजनीति नहीं करें अन्यथा पछताएंगे। जांच हो रही है। सच सामने आ जाएगा। करुणानिधि परिवार के कई सदस्यों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। केस भी चल रहे हैं। जयललिता यदि जीवित रहतीं तो संभवतः वह भी आज जेल में होतीं। उसी केस में शशिकला जेल में सजा काट रही हैं।

राजनीति की जो हालत हो चुकी है, उसमें इस खबर ने किसी को नहीं चौंकाया जब तमिलनाडु के मंत्री विजय भास्कर के घर से 85 करोड़ रुपए का सोना और साढ़े चार करोड़ रुपए नकद बरामद किए जाने की खबर आई। चारा घोटाले में पूर्व मुख्य मंत्री लालू प्रसाद और डा जगन्नाथ मिश्र तथा कुछ अन्य नेताओं और अफसरों को रांची की निचली अदालत से सजा हो चुकी है। इन मामलों में रांची हाई कोर्ट में अपील विचाराधीन है।

कुछ ही महीने पहले मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि अमर सिंह ने मुझे जेल जाने से बचा लिया था। याद रहे कि मुलायम सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला था। यानी आज कोर्ट से पहले कोई ‘अमर सिंह’ किसी नेता को बचा लेता है। आयकर विभाग के दस्तों ने इसी शुक्रवार को मायावती के भाई आनंद कुमार के कई व्यापारिक संस्थानों पर छापे मारे। खुद मायावती पर आय से अधिक संपत्ति को लेकर मुकदमे चल चुके हैं।

महाराष्ट्र सरकार के भाजपा मंत्री एकनाथ खडसे के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप जब सामने आए तभी उन्हें पद से हटाया गया। आज कोई सुप्रीमो अपने दल के विवादास्पद आचरण वाले नेता या मंत्री को खुद नहीं हटाता। मायावती और मुलायम जैसे नेताओं के खिलाफ मामलों की गति कभी तेज होती है तो कभी मद्धिम। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आरोपितों के संबंध केंद्र सरकार से कैसे हैं।

जितने नेताओं के नाम दिए गए हैं, वे तो सिर्फ कुछ बानगियां हैं। कुछ थोड़े से अपवादों को छोड़ दें तो लगभग पूरी राजनीति का यही हाल है।
उस हाल का पता तब और चल जाता है जब नेताओं से निजी संपत्ति का ब्योरा मांगा जाता है। या फिर राजनीतिक दलों से कहा जाता है कि उन्हें सूचना के अधिकार कानून के तहत आना चाहिए। अधिकतर नेता आज चुनावी चंदों का पूरा हिसाब देने को तैयार नहीं हैं। देश की सुरक्षा तक के मामलोंं में अक्सर नेताओं के बीच भारी मतभेद रहते हैं। पर जब सांसदों और विधायकों केे वेतन-भत्ते बढ़ाने का प्रस्ताव आता है तो सभी एक हो जाते हैं।

वीरप्पा मोइली के नेतृत्व वाले प्रशासनिक सुधार आयोग ने कई साल पहले कहा कि सांसद क्षेत्र विकास फंड का प्र्रावधान बंद होना चाहिए।उसकी बुराइयों का ध्यान में रखते हुए ऐसी सिफारिश की गयी। पर अधिकतर सांसद चाहते हैं कि उसकी सालाना धन राशि 5 करोड़ से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपए कर दी जाए। एक सपा सांसद ने तो हाल में यह भी मांग कर दी उसे खर्च करने का पूरा अधिकार सांसदों को दे दिया जाए। यह है आज की राजनीति के हालात! भारत की आजादी के कट्टर विरोधी विंस्टन चर्चिल परलोक में बहुत खुश हो रहा होगा!

वीडियो: नोटबंदी पर एक बार फिर बोले राहुल गांधी; कहा- “भ्रष्टाचार के खिलाफ यज्ञ में चढ़ रही है आम आदमी की बलि”

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  1. S
    surendra kishore
    Apr 11, 2017 at 3:56 pm
    सन् 1700 में दुनिया की पूरी आय में भारत का हिस्सा 22 दश व 6 प्रतिशत था। पर अंग्रेजी राज की ‘मेहरबानी’ से 1952 तक वह घटकर 3 दश व 8 प्रतिशत रह गया था।उसी अवधि में ब्रिटेन की समृद्धि बढ़ी । भारत में ब्रिटेन के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स द्वारा लूट से ब्रिटिश सरकार भी परेशान हो उठी थी। उसके भ्रष्टाचार और अन्य कारनामों को लेकर ब्रिटिश संसद में महाभियोग चलाया गया था। क्योंकि ब्रिटेन के शासक संभवतः यह चाहते थे कि लूट मंे भी थोड़ा अनुपात बोध होना चाहिए। क्या स्वतंत्र भारत के कई नेताओं में उतना भी अनुपात बोध रहा है ? अब सवाल यह भी है कि ब्रिटिश शासकों ने भारत में प्रशासन व विकास के जो कार्य किये,उनमें कितने कार्य भारतीयों के भले के लिए थे और कितने उनके अपने शासन के सुचारू रूप से संचालन के लिए ?
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    1. M
      manish agrawal
      Apr 10, 2017 at 11:08 pm
      British Govt.ne hame Railways di,mombatti ki jagah gharon ko bijli se roshan kiya,schools,colleges,secondary boards& universities establish kar unified&modern education di,neem hakimon ke desi non-scietific ilaaz ki jagah modern allopathic medicine ka tohafaa diya aur district hospitals ka concept laakar,desh ke pratyek ilaake mai free medical treatment diya. kaazi aur Panchayat adhaarit bogus nyaay vyavsthaa ki jagah District Courts,High Court&Supreme Court ke maadhyam se saare desh mai ek sa kanoon aur nyaay vyavsthaa laagoo ki,telephone & radio station diye,hindu samaaz ke kalank Sati prathaa ko khatam kiya,nirdosh people ko lootkar hatya karne wali thug community ko khatm kiya,Airforce,Navy&Indian Army establish ki,teer&talwaar ki jagah modern weapons guns,fighter planes,warships aur submarines India main introduce kiye,printing technology di aur sabse badi baat! hundreds of riyaasaton mai bate Hindostan ko ek kiya aur hamne unko bhagaa diya taaki desi politicians hame loot saken !
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      सबरंग