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तो क्‍या इन मजबूर‍ियों के चलते बार-बार गुजरात जा रहे हैं पीएम नरेंद्र मोदी?

भाजपा 15 वर्षों के बाद राज्य में फिर से गुजरात गौरव यात्रा का आयोजन कर रही है। इससे पहले 2002 में तब के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका आयोजन किया था।
Author October 7, 2017 09:55 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

इस साल के आखिर तक होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव ना केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए नाक की लड़ाई बनकर रह गई है बल्कि भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के लिए भी यह प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। चूंकि, दोनों सियासी महारथी इसी राज्य से आते हैं, इसलिए इन्हीं दोनों के कंधों पर गुजरात चुनाव का दारोमदार भी टिका है। मौजूदा दौर में जब प्रधानमंत्री मोदी खुद और उनकी केंद्रीय सरकार गिरती अर्थव्यवस्था के लिए अपनी ही पार्टी के सांसदों और विरोधियों के निशाने पर हैं, तब उनकी लोकप्रियता का आंकड़ा भी पैमाने पर परखे जाने की प्रतीक्षा में आ खड़ा हुआ है। शायद यही वजह है कि इन दोनों नेताओं को अब गुजरात के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अमित शाह के बाद अब पीएम मोदी शनिवार (7 अक्टूबर) से दो दिवसीय गुजरात दौरे पर हैं। पीएम बनने के बाद पहली बार वो अपने जन्मस्थान वाडनगर भी जाएंगे।

इन दोनों नेताओं और भाजपा के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए भी गुजरात चुनाव एक लिटमस टेस्ट की तरह बन गया है क्योंकि पिछले दो दशकों से यह पश्चिमी राज्य इन्हीं के कब्जे में रहा है। उधर, 22 सालों से सत्ता के स्वाद से कोसों दूर रहने वाली कांग्रेस भी वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम और वातावरण से उत्साहित नजर आ रही है। राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल की जीत और गिरती अर्थव्यवस्था पर चौतरफा घिरी मोदी सरकार से कांग्रेसी कुनबा गुजरात में वापसी की उम्मीद लगाए हुए है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात के सघन दौरे के साथ-साथ अब भाजपा की तरह धार्मिक लामबंदी भी शुरू कर दी है।

पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल भी पिछले दो सालों से भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी करते रहे हैं। इनके अलावा आम आदमी पार्टी भी कुछ चुनिंदा सीटों पर ताल ठोकने को बेकरार है। आप कोई सीट जीते या नहीं लेकिन सत्ताधारी भाजपा का कई सीटों पर खेल बिगाड़ने में कामयाब हो सकती है। अन्य विपक्षी पार्टियों में मायावती की बहुजन समाज पार्टी भी मोदी-भाजपा-संघ की तिकड़ी को दलित विरोधी ठहराकर उनके खेल को बिगाड़ने की मुहिम में जुटी हुई हैं। ऊना और वडोदरा में दलित समुदाय भाजपा के खिलाफ आवाज बुलंद किए हुए हैं। शरद यादव की अगुवाई वाले जनता दल (यू) के धड़े के कार्यकारी अध्यक्ष और गुजरात से विधायक छोटू भाई वासावा पहले ही अपने इरादे जता चुके हैं कि वो भाजपा का खेल बिगाड़ने के लिए मैदान में डटे हुए हैं।

ऐसी परिस्थितियों में 182 सदस्यों वाले गुजरात विधानसभा में भाजपा के लिए ना सिर्फ मौजूदा 122 सीटें बचाना एक बड़ी चुनौती है बल्कि नरेंद्र मोदी के विकास के गुजरात मॉडल का किला सहेजकर रखना भी कठिन टास्क हो सकता है। शायद यही वजह है कि भाजपा 15 वर्षों के बाद राज्य में फिर से गुजरात गौरव यात्रा का आयोजन कर रही है। इससे पहले 2002 में तब के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका आयोजन किया था। अब फिर से गुजराती अस्मिता और वोटरों को जगाने के लिए मोदी-शाह की जोड़ी पुराने नुस्खे को आजमा रही है। ये दोनों नेता यात्रा के समापन समारोह में हिस्सा लेंगे।

यात्रा में गुजरात प्रभारी अरुण जेटली के अलावा केंद्र सरकार के कई मंत्री, भाजपा के कई पदाधिकारी, अन्य राज्यों के कई मुख्यमंत्री-मंत्री भी शामिल हो सकते हैं। यह यात्रा कुल 149 विधानसभा क्षेत्रों में 4,657 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इस दौरान कुल 138 जनसभा किए जाने की योजना है। मोदी, शाह और गुजरात भाजपा को उम्मीद है कि 2001 से 2014 तक प्रदेश की मोदी सरकार के कामकाज, उनका विकास मॉडल और केंद्र में भाजपा की साफ-सुथरी विकासवादी सरकार का फायदा उन्हें गुजरात चुनावों में मिलेगा, मगर उन्हें इस बात की भी आशंका है कि कहीं विपक्षियों की लामबंदी और मीडिया में रोज-रोज हो रही मोदी सरकार की आलोचनाओं से उनके जीतने वाले कदम कहीं लड़खड़ा ना जाएं।

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