December 08, 2016

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Blog: नित्यानंद राय को बिहार बीजेपी का अध्यक्ष बनाकर मोदी-शाह ने लगाया एक तीर से दो निशाने

बिहार के उजियारपुर से लोक सभा सांसद नित्यानंद राय का जाति से यादव होना भी उनके हक में गया।

नित्यानंद राय यादव जाति से आने वाले दबंग नेता माने जाते हैं। (तस्वीर- लोकसभा वेबसाइट)

बुधवार (30 नवंबर) को भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में दो बड़े बदलाव किए। पार्टी द्वारा किए गए दोनों ही बदलाव चौंकाने वाले रहे। पार्टी ने दिल्ली बीजेपी का अध्यक्ष सांसद मनोज तिवारी को बनाया तो बिहार बीजेपी का अध्यक्ष सांसद नित्यानंद राय को बनाया गया। नित्यानंद राय को बिहार बीजेपी के सबसे बड़े नेता सुशील मोदी का विरोधी समझा जाता है। ऐसे में इन फैसलों को संगठन पर पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बढ़ते दबदबे और सुशील मोदी को हाशिए पर डालने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

बिहार में बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने पहली बार सुशील मोदी को दरकिनार नहीं किया है। अभी हाल ही में पार्टी ने राज्य सभा के प्रबल दावेदार सुशील मोदी की जगह गोपाल नारायण सिंह को उच्च सदन के लिए चुना। नरेंद्र मोदी और अमित साह की सुशील मोदी से नाराजगी की मुख्य वजह सुशील मोदी का पार्टी के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य और सांसद लाल कृष्ण आडवाणी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार का करीबी होना माना जाता है। अभी हाल ही में सुशील मोदी ने नीतीश कुमार को बिन मांगी सलाह देते हुए दोबारा बीजेपी के साथ आने का परोक्ष न्योता दे दिया था। नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी को बीजेपी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद ही गठबंधन तोड़ दिया था।

बीजेपी के सूत्रों की माने तो जब नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय राजनीति में खुद को स्थापित करने में लगे थे तब सुशील मोदी उनके विरोधी खेमे में थे। माना जाता है कि सुशील मोदी नीतीश कुमार के साथ मिलकर लाल कृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनवाने के लिए लामबंदी कर रहे थे। उस समय से ही नरेंद्र मोदी और सुशील मोदी के रिश्तों में खटास आ गई थी। सूत्रों का कहना है कि सुशील मोदी की ओर से कई बार रिश्ते को सामान्य करने का भी प्रयास किया गया था। लेकिन उन्हें इसमें कोई सफलता नहीं मिली।

बिहार के उजियारपुर से लोक सभा सांसद नित्यानंद राय का जाति से यादव होना भी उनके हक में गया। नित्यानंद ने राजनीति की शुरुआत छात्र जीवन से ही एबीवीपी के साथ की थी। राय साल 2000 में भाजपा के टिकट पर हाजीपुर से विधायक चुने गए। राय इस सीट से लगातार चार बार विधान सभा चुनाव जीते। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें उजियारपुर से सांसद प्रत्याशी बनाया गया और वे भारी मतों से जीत कर संसद पहुंचे हैं। नित्यानंद राय की छवि एक दबंग नेता की रही है। उन पर हत्या का भी आरोप लग चुका है।

माना जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान ने एक यादव को बिहार बीजेपी की कमान थमाकर लालू प्रसाद के परंपरागत वोटरों की ओर चारा फेंका है। बीजेपी लंबे समय से मानती रही है कि बिहार में उसकी सीधी लड़ाई लालू प्रसाद यादव से है। लालू के यादव जनाधार को तोड़ने के लिए बीजेपी ने पिछले लोक सभा चुनाव में लालू के हनुमान कहे जाने वाले रामकृपाल यादव को न केवल टिकट दिया बल्कि चुनाव जीतने के बाद केंद्र में मंत्री भी बनाया। इनके अलावा बीजेपी ने पहले से ही वरिष्ठ नेता नंद किशोर यादव को सदन से लेकर पार्टी तक में अहम भूमिका दे रखी है। बिहार के मधेपुरा से बीजेपी सांसद हुकुमदेव नारायण सिंह भी पार्टी के प्रमुख यादव नेता हैं। जिस तरह बीजेपी बिहार में यादव नेताओं को आगे बढ़ा रही है उससे स्पष्ट है कि वो लालू प्रसाद को उन्हीं की जमीन पर चित करना चाहती है।

ऐसे में साफ है कि नित्यानंद राय को बिहार बीजेपी का अध्यक्ष बनाकर नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश की है। एक तो पार्टी के अंदर विरोधी खेमे के माने जाने वाले सुशील मोदी का कद कम होगा दूसरी तरफ बिहार में पार्टी की सत्ता तक पहुंचने की राह में सबसे बड़े रोड़े लालू यादव की जड़ कमजोर होगी।

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First Published on November 30, 2016 5:35 pm

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