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अंतरिक्ष वैज्ञानिक प्रोफेसर राव अंतरिक्ष में विलीन

UR Rao ISRO: यू आर राव उनके अथक प्रयासों और सुदृढ़इच्छाशक्ति के कारण ही भारत आज अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी विशेष पहचान बना पाया है।
भारत का पहला सैटेलाइट बनाने वाले उडुपी रामचंद्रन राव। (Source: Screengrab/Youtube))

भारत को अंतरिक्ष की ऊँचाइयों में पहुंचाने वाले प्रोफेसर यू आर राव आज स्वयं अंतरिक्ष के स्थायी निवासी हो गए। इसी वर्ष 2017 में पद्म विभूषण से सम्मानित किए गए प्रोफेसर राव स्वयं देश का सर्वोच्च अंतरिक्ष सम्मान थे। सन् 1975 में भारत को प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट प्रदान करने वाले देश के जाने-माने वैज्ञानिक और इसरो के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर यू आर राव का 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। एक समय वह भी था जब भारत में अंतरिक्ष विज्ञान प्रोफेसर राव का पूरक बन गया था। उनके अथक प्रयासों और सुदृढ़इच्छाशक्ति के कारण ही भारत आज अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी विशेष पहचान बना पाया है।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों में प्रोफेसर राव की सांसों का स्पंदन कभी रुक ही नहीं सकता। अपनी अंतरिक्षीय सोच के बल पर ही वे भारत को उपग्रह प्रौद्योगिकी के विकास और सक्षमताओं का सम्बल प्रदान कर सके। अनेक अन्तरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित प्रोफेसर राव भारतीय युवा वैज्ञानिकों के लिए साक्षात प्रेरणास्तम्भ हैं। भारत के छोटे से राज्य केरल के छोटे से गांव आदमपुर में जन्मे प्रोफेसर राव की अनमोल अंतरिक्षीय सफलताओं ने सिद्ध किया है कि गांवों की छोटी सी भौगोलिकता में ही अंतरिक्ष का अनंत विराट समाहित होता है।

भारत के इस महान अंतरिक्ष वैज्ञानिक ने 1984 से1994 के बीच के दस वर्षों तक इसरो के अध्यक्ष के रूप में अपनी अमूल्य सेवाओं से देश के प्रति अपनी कर्तव्यनिष्ठा की अनूठी मिसाल पेश की है। प्रोफेसर राव ने आर्यभट्ट से लेकर मंगल ग्रह मिशन तक इसरो की कई परियोजनाओं में अपने अमूल्य मार्गदर्शन व योगदान दिया है। अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रकाण्ड भारतीय मनीषी का चला जाना देश की अपूर्णीय क्षति है। अपनी मृत्यु से पहले तक तिरुवनंतपुरम में भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान के कुलपति के पद पर देश की सेवा करने वाले प्रोफेसर राव को अंतरिक्षीय नमन।

डॉ. शुभ्रता मिश्रा

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