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Union Budget 2017: अरुण जेटली ने चंदा छिपाने वाली राजनीतिक पार्टियों को झटका तो दिया मगर प्यार से

बुधवार (एक फरवरी) को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राजनीतिक दलों के 2000 रुपये से अधिक नकद चंदे पर रोक लगाकर ऐसे टूटे हुए दिलों पर मरहम लगाने का काम किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बाएं) और वित्‍त मंत्री अरुण जेटली।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में भ्रष्टाचार का विरोध लम्बे समय से करते रहे हैं। पीएम बनने से पहले उन्होंने जनता को उम्मीद दिलायी थी कि वो  देश से भ्रष्टाचार मिटाएंगे और विदेशों में रखा काला धन वापस लाएंगे लेकिन पीएम बनने के बाद उन्होंने विदेश तो छोड़िए देश के अंदर ही भ्रष्टाचार कम करने को लेकर कोई बड़ा ठोस कदम नहीं उठाया। ये कोई छिपी बात नहीं है कि देश में भ्रष्टाचार के दो बड़ा स्रोत है राजनीतिक दल और राजनेता। इसलिए जब नरेंद्र मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कह दिया कि वो राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत लाने के खिलाफ है तो बहुतों का दिल टूट गया था। बुधवार (एक फरवरी) को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राजनीतिक दलों के 2000 रुपये से अधिक नकद चंदे पर रोक लगाकर ऐसे टूटे हुए दिलों पर मरहम लगाने का काम किया है। लेकिन इससे क्या ये घाव पूरा भरेगा?

पिछले साल दिसंबर ने चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया था कि भ्रष्टाचार कम करने और पारदर्शिता लाने के लिए राजनीतिक दलों को नकद चंदे की अधिकतम सीमा 20 हजार से घटाकर दो हजार रुपए कर देनी चाहिए। आयोग ने इसके लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन का सुझाव दिया था। राजनीतिक दलों को मिलने वाला चंदा आयकर अधिनियम 1961 की धारा 13 (ए) के अंतर्गत आता है। एडीआर के मुताबिक साल 2004 से 2015 के बीच हुए विधानसभा चुनावों में विभिन्न राजनीतिक दलों को 2100 रुपए का चंदा मिला जिसका करीब 63 प्रतिशत नकद था। यानी मोदी सरकार के इस फैसले से राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में काले धन के प्रयोग की संभावना पहले से कम हो जाएगी। लेकिन राजनीति में काले धन के प्रयोग का मसला केवल नकद लेन-देन से नहीं जुड़ा है। राजनीतिक दलों के चंदे का सबसे बड़ा पेंच है 20 हजार रुपये से कम चंदे का स्रोत न बताना।

मौजूदा कानून के अनुसार राजनीतिक दलों को 20 हजार रुपये से कम के चंदे का स्रोत नहीं बताना होता। 20 हजार रुपये से कम यानी अज्ञात स्रोतों से चंदा पाने के मामले मे सबसे आगे भाजपा ही रहे हैं। साल 2013-14 में कांग्रेस की कुल आय 598.10 करोड़ थी जिसमें 482 करोड़ अज्ञात स्रोतों से आए थे। कांग्रेस को कुल आय का 80.6 प्रतिशत अज्ञात स्रोतों से मिला था। बीजेपी की कुल आय 673.8 करोड़ रुपये थी जिसमें 453.7 करोड़ रुपये अज्ञात स्रोतों से आए थे। बीजेपी को कुल आय का 67.5 प्रतिशत अज्ञात स्रोतों से मिला था।

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक (एडीआर) रिफॉर्म्स के साल 2013-14 के आंकड़ों के अनुसार देश की छह राष्ट्रीय पार्टियों की कुल आय का 69.3 प्रतिशत “अज्ञात स्रोत” से आया था। एडीआर के आंकड़ों के अनुसार साल 2013-14 में छह राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के पास कुल 1518.50 करोड़ रुपये थे। राजनीतिक दलों में सबसे अधिक पैसा बीजेपी (44%) के पास था। वहीं कांग्रेस (39.4%), सीपीआई(एम) (8%), बीएसपी (4.4%) और सीपीआई (0.2%) का स्थान था। सभी राजनीतिक दलों की कुल आय का 69.30 प्रतिशत अज्ञात स्रोतों से आया था।

भले ही राजनीतिक दल अब दो हजार रुपये से अधिक चंदा नकद नहीं ले सकेंगे लेकिन पहले की तरह 20 हजार रुपये से कम चंदे का स्रोत आयकर विभाग को नहीं बताने की छूट जारी रहेगी तो इससे मौजूदा स्थिति पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। ऐसे ये कहना ज्यादती नहीं होगी कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चंदा छिपाने वाली राजनीतिक पार्टियों को झटका तो दिया मगर प्यार से।

देखें बजट पर वीडियो चर्चा-

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वीडियोः बजट 2017: अरुण जेटली ने पेश किया बजट, जानिए इसकी मुख्य बातें

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