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आम बजट 2017: जेटली की चतुराई, चुनाव आयोग के डंडे का मान भी रखा और चुनावी चाल भी चली

Union Budget 2017: जेटली ने चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश के मुताबिक भले ही अपने बजट भाषण में चुनावी राज्यों का नाम न लिया हो लेकिन उनकी बजट घोषणाओं से स्पष्ट हो जाता है कि उन्होंने पंजाब और उत्तर प्रदेश के किसान वोटरों को खींचने की एक कोशिश जरूर की है।
Author February 1, 2017 19:15 pm
संसद में आम बजट पेश करने जाते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली। (फोटो-PTI)

केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने चौथे आम बजट के जरिए किसानों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों समेत समाज के तमाम वर्गों को लुभाने की कोशिश की है। हालांकि, उनकी इस कोशिश का शेयर बाजार ने भी स्वागत किया है, बजट पेश करते ही सेंसेक्स में 265.79 अंकों की उछाल दर्ज की गई लेकिन देश के मिडिल क्लास को इस बजट से कोई खास फायदा होता नहीं दिख रहा है। आयकर में छूट के नाम पर जेटली ने नौकरी-पेशा लोगों को झुनझुना थमाया है। चुनावी मौसम में बड़ी आय कर राहत की उम्मीद लगाए बैठे मिडिल क्लास को 2.5 लाख से 5 लाख तक की आय पर 5 फीसदी कर की छूट देकर जेटली ने न सिर्फ उन्हें बड़ा झटका दिया है बल्कि अपनी मंशा भी जाहिर कर दी है कि उनकी कथनी और करनी में अब भी बड़ा फर्क है। ये बात इसलिए यहां तार्किक है क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने अमृतसर में खुद कहा था कि आय कर छूट की सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख की जानी चाहिए। इससे देश के 3 करोड़ लोग करीब 24 करोड़ रुपये की बचत कर सकेंगे, उससे उनकी क्रय शक्ति बढ़ सकेगी और अंतत: इससे देश का खजाना बढ़ेगा लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। नोटबंदी के बाद इसकी बड़ी उम्मीद की जा रही थी।

वैसे जेटली ने अपने बजट भाषण के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से चुनावी लॉलीपॉप थमाने की भी कोशिश की है। पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले पेश किए गए इस बजट में किसानों के लिए बड़े-बड़े सपने दिखाए गए हैं। उत्तर प्रदेश और पंजाब में किसानों का मुद्दा बड़ा चुनावी मुद्दा है। जेटली ने बजट में एलान किया है कि अगले पांच सालों में किसानों की आमदनी दोगुनी की जाएगी। इसके अलावा उन्हें भूमि अधिग्रहण पर मिलने वाले मुआवजे को कर मुक्त कर दिया गया है। किसानों के लिए सिंचाई एक बड़ी समस्या है। इस दिशा में भी उन्हें लुभाने की कोशिश करते हुए जेटली ने 5 हजार करोड़ रुपये से सूक्ष्म सिंचाई निधि बनाने की बात कही है। फसल बीमा के लिए भी 9000 करोड़ रुपये बजट में आवंटित करने की बात कही है। इसके अलावा किसानों के कल्याण के लिए काम करने वाली केन्द्रीय एजेन्सी नाबार्ड को तीन सालों में 20,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का भी एलान वित्त मंत्री ने बजट भाषण में किया है।

यहां ये जिक्र जरूरी है कि हर बजट में किसानों के लिए लोक-लुभावन वादे किए जाते हैं मगर इस बार खासकर यूपी और पंजाब चुनाव में किसानों का मुद्दा सभी राजनीतिक दलों के लिए गले की हड्डी की तरह है। शायद यही वजह रही कि कांग्रेस उपाध्यक्ष को यूपी में न केवल खाट सभाएं और किसान यात्रा करनी पड़ी बल्कि उन्हें अपनी हर जनसभा में किसानों की बात कहनी पड़ रही है। इसलिए भाजपा की केन्द्रीय सरकार ने भी बजट में किसानों को सबसे ऊपर रखा है, ताकि किसान वोटरों का रुझान किसी एक दल तक सीमित होकर न रह जाय। सभी जाति-संप्रदाय के वोटरों में किसानों की आबादी कुल मतदाताओं का करीब 70 फीसदी है। ऐसे में जेटली ने कोई क्षेत्र विशेष की ओर इशारा करने वाली घोषणाओं से बचते हुए देश के समस्त किसानों की बात की है। जेटली ने चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश के मुताबिक भले ही अपने बजट भाषण में चुनावी राज्यों का नाम न लिया हो लेकिन उनकी बजट घोषणाओं से स्पष्ट हो जाता है कि उन्होंने पंजाब और उत्तर प्रदेश के किसान वोटरों को खींचने की एक कोशिश जरूर की है।

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इस बात का प्रमाण बजट से पहले आया भाजपा का चुनावी घोषणा पत्र है जिसमें कई ऐसे बिन्दु हैं जिसका उल्लेख साधे-सीधे जेटली के बजट भाषणों में दिखता है। मसलन, छोटे किसानों को बिना ब्‍याज फसली लोन देना, भूमिहीन किसानों को दो लाख का बीमा देना, बुंदेलखंड में सिंचाई के लिए अलग फंड मुहैया कराना, उत्तर प्रदेश के हर चार जिले में मिल्‍क प्रोसेसिंग यूनिट लगाना ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं जो भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा थे और अब एन-केन-प्रकारेण वो बजट भाषण के हिस्से हैं। अखिलेश यादव ने सपा का चुनावी घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा था कि यूपी दुग्ध उत्पादन में अव्वल हो चुका है। उस दिशा में जेटली ने डेयरी विकास के लिए 8000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है। जाहिर है कि इससे देशभर के दुग्ध उत्पादकों के साथ-साथ यूपी के दुग्ध उत्पादक मतादाता भी प्रभावित होंगे।

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जेटली के बजट भाषण पर कई चुनावी छाप दिखते हैं। मसलन, गर्भवती महिलाओं को 6000 रुपये सीधे उनके खाते में देना। हाइवे के लिए 64 हजार 900 करोड़ रुपये के फंड की व्यवस्था करना, ई-टिकट पर सर्विस टैक्स से मुक्ति, मनरेगा के लिए पिछले साल 38000 करोड़ की तुलना में इस बार 48000 करोड़ रुपये का प्रावधान करना, कालेधन पर लगाम लगाने की दिशा में राजनीतिक दलों के चंदे पर शिकंजा कसना और तीन लाख से ऊपर के कैश ट्रांजैक्शन पर रोक लगाना। कहना न होगा कि बजट के इन प्रावधानों को लागू होने में अभी वक्त लगेगा और तब तक पांचों राज्यों में चुनाव संपन्न हो चुके होंगे, मगर दूरदर्शिता और लोक-लुभावन बजट के मामले में जेटली ने मतदाताओं के भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार की छवि और दुरुस्त करने की कोशिश की है क्योंकि अभी भी उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े राज्य में चुनाव नरेंद्र मोदी के चेहरे और कामकाज के आधार पर ही लड़ा जा रहा है। और शायद यही वजह है कि बजट भाषण के तुरंत बाद खुद प्रधानमंत्री मोदी ने बजट की तारीफ की और इसे दाल के दाम से लेकर डेटा की स्पीड तक, रेलवे के आधुनिकीकरण से लेकर सरल इकॉनमी बनाने की दिशा में, शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक, उद्यमी से लेकर उद्योग तक हर किसी के सपने के साकार करने का ठोस कदम उठाने वाल बजट करार दिया है।

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  1. A
    Abhay Krishna
    Feb 1, 2017 at 12:57 pm
    बजट में किसे क्या मिला? समझ में नहीं आया. नौकरी पेश को तो आयकर से मुक्त कर देना चाहिए.
    Reply
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