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कपड़ा मंत्रालय में स्‍मृति इरानी के पहले ऑर्डर से ही मची हलचल, नए दफ्तर में ऐसे बीता पहला दिन

स्‍मृति ईरानी को मानव संसाधन मंत्रालय से हटाकर कपड़ा विभाग का मंत्री बनाया गया है। इसी पर पढ़ि‍ए यह काल्‍पनिक खबर।
केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्‍मृति ईरानी।

नई-नई कपड़ा मंत्री बनाई गईंं स्‍मृति इरानी ने अपना कार्यभार संभाल लिया है। उन्‍होंने शुक्रवार को दफ्तर पहुंचते ही अपने स्‍टाफ से कुछ कपड़े मंगवाए। उनसे फाइलों पर पड़ी धूल साफ करवाई (अपने पुराने मंत्रालय में वह यह काम कागजों से करवाती थीं)। कपड़े का एक टुकड़ा लेकर उन्‍होंने बाती बनाई और दीप जला कर मां सरस्‍वती (क्‍योंकि कपड़ा मंत्री कभी शिक्षा मंत्री भी थीं) का स्‍मरण किया। फिर उन्‍होंने कामकाज शुरू किया। तमाम बड़े अफसर पहले से मुस्‍तैद थे। सभी झक सफेद कपड़े में आए थे। यह सोच कर कि नई बॉस कपड़े की सफाई देख कर खुश होंगी। पर दावं उल्‍टा पड़ गया। स्‍मृति ने बड़े साहब से सीधा सवाल किया- क्‍या आप नेता हैं? मानव अवतार में ‘ठाकुरजी’ के दूत हैं? बड़े साहब को समझ ही नहीं आया कि आखिर गुस्‍ताखी क्‍या हो गई? मैडम ने उन्‍हें ज्‍यादा देर तक दिमाग पर जोर डालने का मौका भी नहीं दिया। एक क्षण रुक कर बोलीं- तो फिर सफेद कपड़ों में क्‍यों आ गए हैं? भगवा क्‍यों नहीं पहना? मेरा मंत्रालय ही तो बदला है, मैं तो वही हूं। अब जाकर बात बड़े साहब की समझ में आई।

smriti irani, smriti irani ministry, textiles ministry, smriti irani textiles ministry, HRD minister टैक्‍सटाइल्‍स मंत्री के रूप में काम संभालने के बाद स्‍मृति ईरानी। (Photo: PIB)

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मैडम की बात समझते ही बड़े साहब ने एक फाइल आगे बढ़ाई। इसमें भगवा कपड़ा सप्‍लाई करने के लिए टेंडर निकालने का प्रपोजल था। बड़े साहब ने कहा- मैडम, हमें इस फाइल पर आपके दस्‍तखत का इंतजार था। डिलीवरी आते ही हम पूरे मंत्रालय को भगवा कपड़ों से ही रंग देंगे। मैडम का गुस्‍सा शांत हुआ। उन्‍होंने कपड़ों की प्राइस लिस्‍ट मंगवाई। शुरू से अंत तक नजर दौड़ाई। फिर बोलीं- ये क्‍या? मफलर इतने सस्‍ते मिल रहे हैं। तभी इस देश के कुछ नेता सर्दी नहीं होने पर भी इसे ओढ़े घूमते रहते हैं। मफलर पर कितने तरह के टैक्‍स लगाए जा सकते हैं, मुझे बताएं। बड़े साहब होमवर्क करके आए थे। उन्‍होंने तपाक से कहा- मैडम, पांच तरह के टैक्‍स लगा कर हम तत्‍काल प्रभाव से मफलर की कीमत तीन गुनी कर सकते हैं। लेकिन हमें इससे कमाई नहीं होगी, क्‍योंकि अभी मफलर ओढ़ने का सीजन नहीं है। मैडम बोलीं- कमाई की चिंता आप छोड़‍िए, मफलर पर टैक्‍स लगाने की फाइल तैयार कराइए। बड़े साहब ने आनन-फानन में ऑर्डर ड्राफ्ट कराया और मंत्री महोदया की टेबल पर रख दिया। मैडम इरानी ने फौरन उस पर दस्‍तखत किए और मफलर तीन गुना महंगा हो गया।

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आम आदमी में से एक चपरासी बना शख्‍स संयोग से इन दिनों कपड़ा मंत्रालय में ही तैनात है। उसे जब ऑर्डर सर्कुलेट करने के लिए पकड़ाया गया तो उसने पढ़ लिया। उसकी उत्‍सुकता यह थी कि देखें तो मैडम ने सबसे पहला फरमान क्‍या जारी किया। पर ये क्‍या? ऑर्डर पढ़ते ही वह क्षुब्‍ध हो गया। उसने ‘सबसे बड़े आम आदमी’, जो दिल्‍ली के सीएम भी हैं, तक बात लीक कर दी। फिर क्‍या था, अब इधर हलचल मच गई। आनन-फानन में एक बयान जारी किया गया- यह पीएम की साजिश है। हमारी खांसी ठीक नहीं होने देने की साजिश है। हम इसका विरोध करेंगे। हम जान दे देंगे, पर मफलर महंगा नहीं होने देंगे। बिना टैक्‍स चुकाए लाखों की संख्‍या में मफलर खरीदेंगे और हर आम आदमी के गले में बांध कर कपड़ा मंत्री के घर के बाहर धरने पर बैठेंगे।

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टीवी पर यह बयान देख कर दफ्तर में बैठीं मैडम मंत्री खुश थीं। उन्‍होंने बड़े साहब से कहा- देख लीजिए, पहले ही ऑर्डर पर कैसी हलचल हो गई। और लोग कहते हैं कि काम नहीं करने के चलते हमारा मंत्रालय बदल गया। कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। चलती हूं, आज का काम पूरा हुआ।

(नोट: इसे सच्‍ची खबर मान कर पढ़ लिया हो तो अब जान लें कि यह लेखक की कल्‍पना है और इसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।)

स्‍मृति को शिक्षा मंत्रालय से हटाया गया तो उन्‍हें लेकर सोशल साइट्स पर कई जोक भी शेयर किए जाने लगे थे। ऐस कुछ जोक्‍स पर नजर डालिए:

मोदी मंत्रीमंडल में हुए फेरबदल के बाद स्मृति ईरानी से शिक्षा मंत्रालय छीनकर उन्हें कपड़ा मंत्री बनाया गया है। एचआरडी मिनिस्‍ट्री से हटाकर टेक्सटाइल मिनिस्टर बनाने को लेकर Smriti Irani पर जमकर जोक बनाए जा रहे हैं और उन्हें सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर शेयर किया जा रहा है। नजर डालिए ऐसे ही कुछ जोक्स पर-

मोदी मंत्रीमंडल में हुए फेरबदल के बाद स्मृति ईरानी से शिक्षा मंत्रालय छीनकर उन्हें कपड़ा मंत्री बनाया गया है। एचआरडी मिनिस्‍ट्री से हटाकर टेक्सटाइल मिनिस्टर बनाने को लेकर Smriti Irani पर जमकर जोक बनाए जा रहे हैं और उन्हें सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर शेयर किया जा रहा है। नजर डालिए ऐसे ही कुछ जोक्स पर-

उधर उच्च शिक्षा में किए गये एतिहासिक काम के बाद स्मृति ईरानी को कपड़ा मन्त्री बना दिया गया है, उम्मीद है कि वे वालीवुड में चल रही कपड़ों की कमी को दूर करेंगी उधर उच्च शिक्षा में किए गये एतिहासिक काम के बाद स्मृति ईरानी को कपड़ा मन्त्री बना दिया गया है,
उम्मीद है कि वे वालीवुड में चल रही कपड़ों की कमी को दूर करेंगी
आज फिर से एक बेटी से किताब छीन कर सिलाई मशीन और कपड़ा थमा दिया गया। आज फिर से एक बेटी से किताब छीन कर सिलाई मशीन और कपड़ा थमा दिया गया।

 

स्मृति ईरानी अपनी शिक्षा ही नहीं, शिक्षा मंत्रालय का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाई। स्मृति ईरानी अपनी शिक्षा ही नहीं, शिक्षा मंत्रालय का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाई।

बतौर शिक्षा मंत्री लोकसभा में दिया गया स्‍मृति इरानी का यह भाषण काफी चर्चित रहा था। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी तारीफ की थी:

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  1. A
    ashwini
    Jul 8, 2016 at 1:52 pm
    पत्रकारिता का चीरहरण है येह लेख कितनी भरष्ट सोच और गिरी हुई मानसिकता है लेख के अंदर
    Reply
    1. C
      chandan
      Jul 8, 2016 at 5:20 pm
      @झा जी ... आपके बाबू जी ने यही संस्कार दिए थे आपको ....के एस वाक्य लिखिए....पहले पत्रकारिता का पाठ फिर से पढ़िए ...बेहूदा आदमी .....दीप जला कर मां सरस्‍वती (क्‍योंकि कपड़ा मंत्री कभी शिक्षा मंत्री भी थीं) का स्‍मरण किया। -
      Reply
      1. V
        Vijay
        Jul 9, 2016 at 3:53 am
        लगता है आपको संस्कार के नाम पर अंधभक्ति सिखाया गया है. आँखों पर पड़ी पट्टी हटाए बिना यह समझ पाना आपके बूते का नहीं.
        Reply
        1. P
          PMohan
          Jul 9, 2016 at 12:47 am
          झाजी के लेख मे जो संस्कार और संस्कृति झलकती है, भक्त यदि उसका शतांश भी अपना ले, तो उसका और उसकी भावी पीढ़ी का जीवन सुधर जाए।
          Reply
        2. S
          sanjay kr
          Jul 8, 2016 at 11:51 am
          पहली बात तो यह कि लोग इस तरह के मजाक के लिए जनसत्ता के साइट पर नहीं जाते ....... दूसरा यह कि अगर यह कल्पना है तो फेसबुक पोस्ट के ऊपर न्यूज फ्रॉम जनसत्ता क्यों लिखा है.............. ? आपको लगा होगा कि आपने बड़ा तीर मार लिया लेकिन वास्तव में आपने अपनी विश्व़नियता का मजाक उड़ाया है ............
          Reply
          1. M
            Mithu
            Jul 10, 2016 at 5:57 pm
            व्यंग को न्यूज़ के रूप में क्यों लिख रहे हैं आपलोग? जो लोग सिर्फ हैडिंग पढ़ेंगे वो यह थोड़े न जान पाएंगे की यह समाचार काल्पनिक है! आप लोग जानबूझकर ऐसा करते हैं . भाई आप अखबार निकाल रहे हैं , व्यंग की पत्रिका नहीं !
            Reply
            1. N
              nc
              Jul 8, 2016 at 12:46 pm
              वे तेज तर्रार महिला है कपड़ा मंत्रालय में बहुत काम है भारत के कपड़ा उद्योग की हालत ठीक नहीं है ६००० करोड़ का पॅकेज सरकार ने दिया है
              Reply
              1. A
                ANAND
                Jul 8, 2016 at 10:53 am
                @ विजय कुमार झा..रोज के तनाव से मुक्त होने के तरीके बताऊंगा तो पानी नहीं मांगोगे..तुम सालो को एक स्त्री की इज्जत भी नहीं करनी आती कहाँ के लेखक हो तुम...घटियापन की हद होती है..
                Reply
                1. P
                  PMohan
                  Jul 9, 2016 at 12:54 am
                  झाजी मे कल्पनाशीलता है और लेखन क्षमता है , लेकिन भक्त जिनका ज्ञान और विवेक गलौज, झगड़ा फसाद तक सीमित है, यत जीवन तत मरणम है।
                  Reply
                2. A
                  ANAND
                  Jul 8, 2016 at 10:55 am
                  अगर कल्पना करनी है तो खुजलिवाल और अपने आका राहुल गांधी की कर क्यों फटी हुई है उनसे...अपनी कल्पना अपने पास रख..जनता सब जानती है..
                  Reply
                  1. A
                    a
                    Jul 8, 2016 at 10:26 pm
                    नैरो माइंडेड कउम्मुनिस्ट लेफ्टिस्ट पत्रकार से क्या उम्मीद की जा सकती है
                    Reply
                    1. R
                      ravi dhakad
                      Jul 23, 2016 at 6:52 pm
                      Bus yahi kahunga..patr kaarita ka charitr haran.....yadi ensan h jan satta balon ko to news jaisa bilkul bhi na daale kebal byang hi daale or bo bhi sab politicians pr...............................Same on such type of mentality
                      Reply
                      1. R
                        Ronit
                        Jul 8, 2016 at 6:47 pm
                        Lol bhakton ko badi mirchi lagi hai is imagination se.
                        Reply
                        1. C
                          Citizen
                          Jul 8, 2016 at 2:22 pm
                          "येल" शिक्षित और कपडा मंत्री? जय हो...
                          Reply
                          1. S
                            Sanjay Yadav
                            Jul 8, 2016 at 8:57 pm
                            रियल और रील लाइफ मैं बहुत अंतर है
                            Reply
                            1. S
                              SHARAD GOEL
                              Jul 8, 2016 at 9:53 am
                              ये ख़बरें झूठी लगाती हे ,,,,,,,,,,,,, वैमनस्य के कारण बनायी गयी हें ,,,, जनसत्ता तो वेसे भी बीजेपी विरोधी रही हे पत्रकारिता का चरित्रहनन कर रहे हें ये लोग ...
                              Reply
                              1. S
                                Shrikant Sharma
                                Jul 8, 2016 at 2:14 pm
                                प्रेष्य पत्रकारिता का उत्कृष्ट नमूना है खूब कमाई होती है ऐसी परवेर्टेड कल्पनाओं se
                                Reply
                                1. V
                                  Vinay Totla
                                  Jul 8, 2016 at 10:19 am
                                  श्री मान जी आप बिलकुल ठीक कह रहे है खबर काल्पनिक है और लेखक ने नीचे लिखा भी है|
                                  Reply
                                2. विश्वनाथ रा
                                  Jul 8, 2016 at 8:56 am
                                  जनता इतना थोडी है! जनसत्ता काल्पनिक खबरोंपरही चलती है,यह सभी जानते हैं!
                                  Reply
                                  1. V
                                    Vinay Totla
                                    Jul 8, 2016 at 10:20 am
                                    लेकिन आपकी ी सामने आ गयी लेखक ने नीचे पहले ही लिख दिया की खबर काल्पनिक है|
                                    Reply
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