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गंदी सोच की हदें पार कर रहा विश्व का युवा, मानवता को कहां ले जा रहा है

आज जब सुबह सुबह जनसत्ता में ही यह घृणित समाचार पढ़ा कि हैदराबाद में एक 22 साल के युवक को गर्भवती कुतिया को मारकर रेप करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
प्रतिकात्मक तस्वीर

आज जब सुबह सुबह जनसत्ता में ही यह घृणित समाचार पढ़ा कि हैदराबाद में एक 22 साल के युवक को गर्भवती कुतिया को मारकर रेप करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, तो आप यकीन नहीं मानेंगे कि मानवता की ऐसी निकृष्ट पतित घटना से मितली सी आ गई और कलम को रोक पाना मुश्किल हो गया। कहाँ जा रहा है मानव समाज और आज का युवा, जिसे मानवता के भविष्य को आगे ले जाना है। शर्म आती है, मनुष्यता की ऐसी हैवानियत को पढ़कर, जिसने निरीह पशु को भी अपनी पिशाची प्रवृत्ति से नहीं बख्शा है। क्या अब क्राइम की खबरों में मासूम बच्चियों के बलात्कार से हटकर ये खबरें सामने आने लगेंगी कि फलां व्यक्ति ने आज इस जानवर का या उस जानवर का शील भंग किया। धिक्कार है ऐसी मानवता को क्योंकि अब तो मनुष्यता पशुता कहलाने का भी अधिकार नहीं रखती। मनुष्य का मनुष्य से जी भर गया तो पशुओं को अपने मनोरंजन के लिए कुछ दिन पहले ही बिल्डिंग से फेंकते देर नहीं लगी थी और आज ये इतना जुगुप्सीय समाचार।

जल्दी ही अब ऐसी हैवानियत के चलते संविधान में नए कानून बनाने होंगे कि फलां धारा के तहत हैवान को कुत्ते के बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया। विश्व स्तर पर युवाओं की सोच उनको कहां ले जा रही है, यह अत्यंत विचारणीय मुद्दा है। आज विश्व का ऐसा कोई देश नहीं है जिसका युवा आतंकवादी न बन रहा हो, राष्ट्रद्रोही न बन रहा हो और गंदी राजनीति में लिप्त न हों। युवाओं ने उद्दण्डता की हदें पार कर रखी हैं। वे शीलता को डस रहे हैं। इसमें हमारी परवरिश की कमी और माता पिता का अपनी संतान की अपेक्षा अपनी व्यावसायिक व्यस्तताओं को अधिक समय दे पाना हो सकता है। युवाओं को या तो माता-पिता से या सामाजिक भ्रष्ट व्यवस्था से या वैश्विक आतंकवादी आकाओं से सबकुछ आसानी से बिना संघर्ष किए मिल रहा है और इसी ने उसे पंगु बना दिया है। उसे दैहिक पिपासा की संतुष्टि के अलावा और किसी तुष्टि की परवाह नहीं रह जाती। सम्भवत- यही कारण है कि ऐसे अपराधों की ओर युवा बढ़ने लगे हैं।

लेकिन आज ये खबरें एक या दो ही आ रही हैं। समय रहते इस पर रोक लग सके इस बात पर ध्यान केंद्रित करना हमारा सामाजिक दायित्व बनता है, क्योंकि बुरी आदतों का संक्रमण समाज में फैलते देर नहीं लगती। अतः जरुरी है कि मनोवैज्ञानिक रुप से विश्लेषण करते हुए इस पिशाची प्रवृत्ति के मानव समाज में और गहरे न बढ़ने देने के बारे में गम्भीर कदम उठाया जाना चाहिए।

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  1. A
    Alaknada singh
    Nov 13, 2016 at 5:19 am
    Aise logo ki samaj me koi jagah nhi h agar is trh ki mansikta is desh ke yuva rakhege to is desh ko peeche jane se koi nhi bacha skta
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    Reply
    1. S
      shikhar Kesarwani
      Oct 31, 2016 at 3:43 am
      Youths is tarah ki harkat kr rhe h, aise logo ke liye kathor saja ka pravdhan krna chahiye
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      Reply
      1. V
        Vijay Goswami
        Nov 4, 2016 at 3:13 pm
        esi mansikata se manvata shrmsar ho rahi hai....
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        Reply
        सबरंग