December 08, 2016

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गंगा को रोकने के खिलाफ ब्रितानी हुकूमत से भी लड़े थे: पुरुषोत्तम शर्मा

महामना मदन मोहन मालवीय ने सौ साल पहले 1916 में हरिद्वार में श्री गंगा सभा की स्थापना की थी। श्री गंगा सभा इस साल शताब्दी वर्ष मना रही है। सभा हरकी पैड़ी हरिद्वार की प्रबंधकारिणी संस्था है। सौ सालों में श्री गंगा सभा महामना मालवीय के गंगा रक्षा के सपनों को कितना साकार रूप दे पाई है, इस बारे में श्री गंगा सभा के अध्यक्ष पंडित पुरुषोत्तम शर्मा गांधीवादी से बातचीत।

सुनील दत्त पांडेय
सवाल : श्री गंगा सभा का इतिहास बताएं।
जवाब : ब्रिटिश सरकार ने 1854 में हरिद्वार से कानपुर तक खेतों में सिंचाई के लिए गंगा नहर बनाने की योजना बनाई थी। हरिद्वार से कानपुर तक गंग नहर खोदी गई और हरिद्वार में भीमगोड़ा के पास ब्रिटिश सरकार ने बांध बनाकर गंगा की अविरल निर्मल धारा को बांधने का काम शुरू किया। 1914 में जब हरकी पैड़ी की उत्तर दिशा में गंगा की धारा को बांधा जाने लगा तो हरिद्वार के तीर्थ पुरोहित समाज ने इसका विरोध किया। तीर्थ पुरोहितों का एक प्रतिनिधिमंडल वाराणसी जाकर मालवीय जी से मिला। पुरोहितों ने उनसे ब्रिटिश सरकार के गंगा की अविरल धारा को बांधने के विरोध में आंदोलन की अगुआई करने का अनुरोध किया। मालवीय जी ने तीर्थ पुरोहितों के अनुरोध पर इस आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया। 1914 से 1916 तक ब्रिटिश सरकार के खिलाफ गंगा रक्षा आंदोलन चला। आखिरकार ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा और हरकी पैड़ी के उत्तरी भाग में भीमगोड़ा बैराज से एक किलोमीटर पहले गंगा की एक अविरल धारा निकाली गई, जिसका नाम भागीरथी बिंदु है। आंदोलन की समाप्ति के बाद दिसंबर 1916 में महामना मदन मोहन मालवीय जी ने हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों की अगुआई में श्री गंगा सभा की स्थापना की। गंगा की धारा को अविरल और निर्मल बनाए जाने के लिए श्री गंगा सभा और ब्रिटिश सरकार के बीच एक समझौतानामा हुआ।
सवाल : श्री गंगा सभा की स्थापना के वक्त मालवीय जी ने जिन उद्देश्यों को प्रमुखता दी थी, श्री गंगा सभा सौ सालों में उन उद्देश्यों को कितना साकार कर पाई?


जवाब : मालवीय जी का उद्देश्य यह था कि भविष्य में गंगा की अविरलता और निर्मलता के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ होती है तो श्री गंगा सभा उसके खिलाफ जनजागरण कर गंगा की रक्षा करे। श्री गंगा सभा मालवीय जी के उद्देश्यों को पूरा करने में पूरी तरह सफल रही है। गंगा की धारा को अविरल और निर्मल बनाए रखने के लिए रोजाना हरकी पैड़ी पर होने वाली सांध्यकालीन आरती में श्री गंगा सभा द्वारा तीर्थयात्रियों को गंगा को प्रदूषित नहीं करने और गंगा में पॉलीथीन नहीं डालने का संकल्प दिलवाया जाता है। इसके अलावा सभा अन्य सामाजिक दायित्वों को बखूबी निभा रही है। मालवीय जी हमारे आदर्श हैं। श्री गंगा सभा ने गंगा के उद्गम गौमुख से लेकर हरिद्वार तक बनने वाले सभी बांधों का जबरदस्त विरोध किया था। टिहरी बांध के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन छेड़ा था।
सवाल : भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार द्वारा गंगा की सफाई के लिए ढाई साल में जो कार्य किए गए उन्हें आप किस नजरिए से देखते हैं?
जवाब : ढाई साल पहले लोकसभा चुनाव के वक्त नरेंद्र मोदी ने वाराणसी चुनाव लड़ते वक्त यह कहा था कि उन्हें गंगा ने बुुलाया है। और उन्होंने गंगा को स्वच्छ बनाने का संकल्प किया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने 20 हजार करोड़ रुपए की गंगा सफाई के लिए नमामि गंगे योजना का भी एलान किया। लेकिन धरातल पर गंगा की सफाई के नाम पर कुछ होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। पिछले दिनों हरिद्वार में भी एक बड़ा समारोह करके केंद्र सरकार के मंत्रियों उमा भारती और नितिन गडकरी ने गंगा की सफाई के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं की थीं। ये घोषणाएं फिलहाल हवाई साबित हो रही हैं।

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सवाल : राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते 1986 में गंगा की सफाई के लिए अभियान शुरू किया था, उस अभियान को आप किस नजर से देखते हैं?
जवाब : राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए सबसे पहले गंगा की स्वच्छता पर ध्यान दिया, और गंगा में प्रदूषण दूर करने के लिए 25 साल के लिए एक कार्ययोजना बनाई थी। गंगोत्री से लेकर गंगा सागर तक जो जल-मल-शोधन यंत्र (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाए गए थे, वे आज अपनी क्षमता खो चुके हैं। और अब सीवर का गंदा पानी बिना साफ किए सीधे गंगा में गिर रहा है। पिछले 25 सालों में गंगा की सफाई के लिए साढेÞ चार हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इस समय जरूरत है कि जल-मल-शोधन यंत्रों की क्षमता बढ़ाई जाए और जो शोधन संयंत्र हैं उनसे सीवर का पानी साफ करके गंगा में डालने के बजाए खेतों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाए।

सवाल : एनजीटी के द्वारा गंगा सफाई को लेकर उठाए गए कदमों से आप कितने संतुष्ट हैं?
जवाब : एनजीटी ने गंगा की सफाई के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। कई कारखानों और होटलों को नोटिस भी दिए गए हैं। यह देखने में आया है कि कई बडेÞ उद्योगों का कचरा सीधे गंगा में जा रहा है। और उन्होंने अपने कारखानों में सीवरेज शोधन संयंत्र नहीं लगा रखे हैं। गंगा भारत की जीवन रेखा है, और हमारी आस्था का प्रमुख केंद्र बिंदु है। भारतीय जनमानस की भावनाओं को देखते हुए सभी का कर्तव्य है कि वे गंगा की धारा को स्वच्छ बनाए रखे। गंगा कल भी निर्मल थी, आज भी निर्मल है और आगे भी निर्मल रहेगी। जो गंगा में कूड़ा-कचरा डालकर प्रदूषित कर रहे हैं, उन्हें सरकार, निगम, नगर पालिकाएं, नगर पंचायत और जिला पंचायतें सख्ती से रोकें। अभी गंगा की स्वच्छता के लिए केंद्र सरकार को काफी काम करने की जरूरत है। साथ ही सामाजिक संस्थाएं भी गंगा की स्वच्छता के लिए जनजागरण अभियान चलाएं।

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First Published on October 29, 2016 2:06 am

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