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Blog: प्रोफेसर अपूर्वानंद, आपने उमर खालिद की जगह अफजल गुरू को गोद क्यों नहीं लिया?

क्या आप इस देश के सभी माता-पिताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं? प्रोफेसर साहब, अगर इस देश के सभी माता-पिता आपकी तरह सोचने लगे...

वेंकैया नायडू का Blog: दो मिनट की शोहरत के लिए पार्टी और देश का बड़ा नुकसान करा गए राहुल गांधी

740 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में से केवल तीन-चार कैम्पस में ही अल्ट्रा लेफ्ट और नक्सल विचारधारा वाले छात्र आंदोलन पर उतरे हुए हैं।...

बाखबरः फेयर एंड लवली

राहुल ने अपनी व्यंग्यात्मक शैली के जरिए सत्तापक्ष पर कई बार चुटकियां कसीं। काले धन को गोरा करने की सरकार की ब्यूटी एंड लवली...

तवलीन सिंह का कॉलम वक्त की नब्जः परिवर्तन का सपना

प्रधानमंत्री को पिछले सप्ताह लोकसभा में बोलते हुए सुन कर अच्छा लगा। इसलिए कि पिछले दिनों वे कुछ ज्यादा ही मौन रहे हैं और...

पी चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजरः क्या किसानों के अच्छे दिन आएंगे!

किसान खुशी मना सकते हैं। सरकार ने आखिरकार माना कि किसान भारत के अंग हैं, कि कृषिक्षेत्र गहरे संकट में है, और किसानों को...

बेबाक बोलः शोर की स्मृति

इतालवी बुद्धिजीवी अंबर्तो इको ने कहा था कि आजादी का मतलब तो झूठे और नकली शब्दों से मुक्त होना भी है। विश्वविद्यालय परिसरों और...

Blog: एक साधारण भाषण से क्‍यों हीरो बना कन्‍हैया

देश को ऐसे हीरोइज्‍म या हीरो की जरूरत नहीं है, क्‍योंकि यह क्षणिक है। यह नायकत्‍व व्‍यक्ति की शख्‍सीयत या उसके काम से उपजा...

BLOG: 210 में से 24 नस्लों की बकरियां हमारे यहां हैं, हम सबसे ज्यादा बकरी का दूध उत्पादक हैं, फिर भी नहीं उठा पा रहे बकरियों से आर्थिक लाभ

अच्छी नस्ल से संभोग कराने पर औसतन नर बच्चों का वजन 1.65 किलोग्राम बढ़ जाएगा। अगर आप रोगनिरोधी उपाय अपनाते हैं तो बच्चों की...

आरक्षण के रण पर बेबाक बोल: हक-बंदी

आरक्षण की मांग पर हरियाणा का यह पहला बड़ा आंदोलन रहा जिसमें व्यापक स्तर पर जान-माल का नुकसान हुआ। सरकारी तौर पर आरक्षण की...

तवलीन सिंह का कॉलम वक्त की नब्जः इस विरोध के पीछे

पटियाला हाउस में जो हुआ शर्मनाक जरूर है, लेकिन उन हादसों से इस देश को मेरी नजर में कोई खतरा नहीं है। खतरा है,...

रम्य रचनाः बीमारी और दुनियादारी

आदमी तीमारदारी से तब तौबा करता है जब तीमारदारी खुद एक बीमारी बन जाती है। आदमी दुनियादार है तो आनंद और ज्यादा। तीन चीजें...

पी चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजरः शायद हम सब राष्ट्र-विरोधी हैं

बाल गंगाधर तिलक ने कहा था ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’। उन पर देशद्रोह का मुकदमा चला। वह उस समय के शासकों के मुताबिक...

जेएनयू विवाद पर बेबाक बोल: द्रोह-काल

अब तक जेएनयू में वामपंथियों का बोलबाला रहा है, और दक्षिणपंथी विचारधारा वहां अघोषित रूप से प्रतिबंधित ही रही है।

फली एस नरीमन का Blog: भारत विरोधी होना अपराध नहीं और यह देशद्रोह तो बिलकुल नहीं

सेक्‍शन 124ए की पहली परिभाषा के अनुसार असंतोष में विश्‍वासघात और शत्रुता के सारे भाव शामिल होते हैं।

Blog: JNU विवाद को राष्‍ट्रवाद से जोड़कर मोदी सरकार ने किया सबसे बड़ा राष्‍ट्र विरोधी काम

कन्‍हैया कुमार की गिरफ्तारी और जेएनयू में राजनीतिक विरोध पर कार्रवाई से पता चलता है कि देश में ऐसी सरकार है जो नुकसानदायक होने...

बेबाक बोलः आह ताज!

सत्रहवीं शताब्दी में निर्मित वास्तुशिल्प के इस हैरतअंगेज शाहकार को लेकर कवियों-शायरों की कलम ने खुल कर अपना इजहारे-खयाल किया।

प्रगतिशीलता पर भारी परंपरा

26 जनवरी को जब सारा देश गणतंत्र दिवस की परेड देखने में मशगूल था तो देश की राजधानी से दूर महाराष्ट्र के अहमदनगर में...

बेबाक बोलः दखल-बेदखल

महाराष्ट्र के शिंगणापुर मंदिर में प्रवेश का सवाल महिला अधिकारों के साथ मध्ययुगीन सामंती व्यवस्था बनाम आधुनिकता की लड़ाई बन गया है। यह भी...

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