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अपराध एक, इंसाफ दो: तार-तार हुआ अरव‍िंद केजरीवाल का स‍िद्धांत, कुमार व‍िश्‍वास ने घुटनों के बल झुकाया

कुमार विश्वास ने कहा था कि केजरीवाल चापलूसों से घिरे रहते हैं, वहीं अमानतुल्लाह खान ने कहा था कि कुमार पार्टी को हड़पना चाहते हैं।
Author May 3, 2017 16:37 pm
इससे पहले भी कई मौकों पर विश्वास पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ और केजरीवाल की नीतियों पर कटाक्ष कर चुके हैं।

दिल्ली एमसीडी चुनावों में बीजेपी के हाथों मिली करारी हार के बाद आम आदमी पार्टी में खुलकर कलह सामने आई थी। दिल्ली में जीत का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी को इज्जत बचाना भी भारी पड़ रहा था। इस बीच आप नेता कुमार विश्वास ने एक टीवी इंटरव्यू में यह बयान देकर सबको चौंका दिया था कि अरविंद केजरीवाल के आसपास जी हुजूरी करने वाले लोग हैं और वह चापलूसों से घिरे रहते हैं। इसके बाद पार्टी में विधायकों का विश्वास के प्रति समर्थन और बढ़ गया था। कई विधायकों ने यह मांग भी उठाई थी कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सरकार चलाएं और पार्टी के नेतृत्व की जिम्मेदारी कुमार विश्वास को सौंप दें। हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं कि न सिर्फ पार्टी बल्कि उसके बाहर भी कुमार विश्वास की लोकप्रियता अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से कहीं ज्यादा है। इसलिए शायद हमेशा पार्टी के सिद्धांतों की दुहाई देने वाले अरविंद केजरीवाल विश्वास की लोकप्रियता के आगे झुक गए।

भले ही पार्टी का अंदरुनी झगड़ सुलझ गया हो, लेकिन इसने पार्टी के ‘अंदरूनी संविधान’ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अरविंद केजरीवाल अकसर कहते हैं कि उनकी पार्टी में सबके लिए नियम एक समान हैं और सभी उसी का पालन करते हैं। लेकिन अगर वाकई एेसा है तो पार्टी ने जो बर्ताव विधायक अमानतुल्लाह खान के साथ किया, वही कुमार विश्वास के साथ भी करना चाहिए था। खान को पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया है और अब 3 सदस्ययी समिति उनकी बयानबाजी की जांच करेगी। अमानतुल्लाह खान ने कुमार विश्वास पर आरोप लगाया था कि वह पार्टी को हड़पना चाहते हैं और संयोजक बनना चाहते हैं।

लेकिन सोचने वाली बात है कि बयानबाजी तो कुमार विश्वास ने भी की थी, वो भी सीधे केजरीवाल पर। लेकिन पार्टी आलाकमान ने न तो उनकी जांच कराई और न ही पार्टी से सस्पेंड किया। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भी कहा था कि विश्वास इसे निजी लड़ाई न बनाएं, उन्हें जो कहना है वे पीएसी में आकर कह सकते हैं। लेकिन टीवी पर बयानबाजी सही नहीं है। लेकिन फिर भी अरविंद केजरीवाल रात में उनके घर गए और फिर पीएसी की बैठक मुख्यमंत्री के आवास पर हुई, जिसमें विश्वास को राजस्थान का प्रभारी नियुक्त किया गया, ताकि उनकी पार्टी में सक्रियता बढ़ सके। हालांकि विश्वास ने कहा भी है कि वे मुख्यमंत्री या कोई मंत्री नहीं बनना चाहते, लेकिन जिस तरह पार्टी में इस बार उन्होंने आवाज बुलंद की है, वैसे ही वह आगे भी कर सकते हैं।

इससे पहले भी कई मौकों पर विश्वास पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ और केजरीवाल की नीतियों पर कटाक्ष कर चुके हैं। उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा भी था कि पंजाब विधानसभा चुनावों से उन्हें दूर रखा गया था। साथ ही उनसे चुनाव प्रचार के लिए भी नहीं पूछा गया। कई बार पार्टी में साइडलाइन हो चुके विश्वास शायद अब खुद को पार्टी में एक बड़े रोल में देखना चाहते हैं।

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