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लालू यादव को नीतीश कुमार ने दिया तीसरा झटका, दोनों में बातचीत तक बंद, राजद प्रमुख पांच बार भेज चुके हैं दूत

सहारा डायरी में नाम आने के आरोप में प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगने की मांग का नीतीश कुमार ने समर्थन नहीं किया है।
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद (बाएं) और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (दाएं)। (फाइल फोटो)

ऋचा रितेश

बीते कल नीतीश कुमार ने महागठबधंन नेताओं को एक और जोर का झटका दिया। बिहार के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर संकेत दिया कि वो किसी भी हालत में उस मुहिम के साथ नहीें रहेंगे जिसके तहत सहारा डायरी को मुददा बनाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जवाब व इस्तीफे की मांग की जा रही है। सनद रहे कि महागठबंधन के प्रमुख घटक दल के नेता लालू प्रसाद यादव ने सहारा डायरी विवाद पर प्रधानमंत्री से इस्तीफे मांगा है। लालू ने सुप्रीम कार्ट की निगरानी में इस मामले के जांच की मांग की है।

इससे पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस सवाल पर प्रधानमंत्री को कटघरे में खड़ा करने का असफल प्रयास किया है। हाल के दिनों में नीतीश कुमार ने कांग्रेस तथा राजद के स्टैंड की मुखालफत करते हुए नोटबंदी तथा थल सेना प्रमुख की नियुक्ति के सवाल पर केन्द्र सरकार का समर्थन किया।

कुमार के निर्देश पर जनता दल (यू) के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने पत्रकारों को बताया कि ‘‘हम चाहते हैं कि सबसे पहले सहारा की कथित डायरी लोगों के सामने आये, उसको सार्वजनिक किया जाए तथा जितने लोगों का नाम उसमें दर्ज है उन सबसे सघन पुछताछ की जाए।’’ उन्होंने आगे बताया कि ‘‘खबरों के अनुसार उस तथाकथित डायरी में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री तथा कांग्रेस की उत्तर प्रदेश की सीएम उम्मीदवार शीला दीक्षित, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान तथा छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह के अलावा देश के कई नामी गिरामी नेताओं का नाम हैं।’’

नीतीश कुमार का यह ताजा स्टैंड और उनके निर्देश पर केसी त्यागी द्वारा दिया गया बयान महागठबंधन में शामिल घटक दल के नेताओं को सकते में डाले हुए है। एक बुजुर्ग कांग्रसी नेता ने दिल्ली से फोन करके लालू प्रसाद यादव से जानना चाहा है कि आखिर मुख्यमंत्री की मंशा क्या है? वो क्यों चाहते हैं कि नरेन्द्र मोदी मजबूत हों? खबर है कि राजद बाॅस ने उस मध्य प्रदेशी कांग्रेसी नेता को सलाह दी है वो खुद नीतीश कुमार से इस मुददे पर चर्चा करें तो बेहतर होगा।

दरअसल, नोटबंदी पर लिए गए विपरीत स्टैंड के बाद लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार में खटास होने की खबर है। दोनों के बीच बातचीत बंद है। राजद अध्यक्ष ने अपने तरफ से बहुत प्रयास किया कि नीतीश कुमार जितना जल्दी हो सके नोटबंदी पर लिए गए अपने स्टैंड से पलटकर विपक्ष के साथ जुड़ें। पिछले दो दिनों में कम से कम 5 दूतों को भेजकर उन्होंने सीएम को मनाने की असफल कोशिश की है। लालू के खासम खास विधायक बताते हैं, ‘‘ साहब को 200 परसेंट विस्वास था कि नीतीश कुमार राजद के द्वारा आहूत नोटबंदी विरोधी 28 दिसंबर के राज्यव्यापी आन्दोलन में स्वयं शामिल हों या ना हो इसका समर्थन वो जरूर करेंगे।’’ राजद के इन विधायको का आरोप है कि सीएम ने ऐसा न करके उनके नेता के साथ विश्वासघात किया है।

उधर जनता दल (यू) के नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार के पास अगले एक महीने तक राजनीति करने का समय नहीं है। ‘‘ राज्य की जनता ने उनको काम करने के लिए चुना है जिसे वो कर रहे हैं। जबकि कुछ लोग चाहते हैं कि सब काम छोड़छाड़ कर वो चैबीसो घंटा राजनीति का ढोलक बजाएॅं’’। समाप्त

वीडियोः प्रधानमंत्री मोदी पर लालू प्रसाद यादव बोले- “पीएम को अपनी बेगुनाही साबित करनी चाहिए”

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