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सर्जिकल स्‍ट्राइक पर इन चार सवालों का जवाब देना तो बनता है

विपक्षी दलों का आरोप है कि नरेंद्र मोदी सरकार सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

भारतीय सेना द्वारा 29 सितंबर को नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार जाकर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में की गई सर्जिकल स्ट्राइक में कई आतंकी मारे गए। डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन लेफ्टिनेंट जनरल रणजीत सिंह के अनुसार सेना के स्पेशल फोर्सेज के कमांडो पीओके स्थित कई आतंकवादी लॉन्चिंग पैड को नष्ट कर दिया। जम्मू-कश्मीर के उरी स्थित आर्मी कैंप पर 18 सितंबर को हुए हमले में 19 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। माना गया भारत ने उरी हमले का बदला लेने के लिए ही सर्जिकल स्ट्राइक की। लेकिन अभी भी कुछ ऐसे सवाल हैं जिनको लेकर मीडिया में अलग-अलग खबरें आ रही हैं। अगर नरेंद्र मोदी सरकार इन सवालों को जवाब देती है तो सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर स्थिति और साफ होगी।

1- कितने आतंकी मारे गए? कितने ठिकाने नष्ट किए गए? भारत की सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम उसके परिणाम को लेकर है। डीजीएमओ रणबीर सिंह ने अपने बयान में कहा था कि सर्जिकल स्ट्राइक में कई आतंकी और उनके मददगार मारे गए हैं। डीजीएमओ के अनुसार सेना ने कई आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। डीजीएमओ की प्रेस वार्ता के कुछ देर बाद ही अलग-अलग मीडिया समूह मारे गए आतंकियों और नष्ट किए गए ठिकानों के बारे में अलग-अलग आकंड़े पेश करने लगे। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में मारे गए आतंकियों की संख्या 10 से 50 के बीच बताई जा रही है। ऐसे सरकार को इस बारे में कुछ ठोस सूचना देनी चाहिए ताकि जनता के बीच भ्रम की स्थित न पैदा हो।

वीडियो: सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगने पर बोले रक्षा मंत्री-

2- क्या ये सचमुच पहली सर्जिकल स्ट्राइक है? डीजीएमओ द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक की घोषणा करने के कुछ देर बाद ही इस तरह के दावे किए जाने लगे कि भारत पहले भी ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक करता रहा है। आम लोगों के अलावा भारत के पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि भारत ने 2013 में एक बहुत बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की थी। कांग्रेसी नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित ने तो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को खुला खत लिखकर कांग्रेस के 10 साल के कार्यकाल में कई सर्जिकल स्ट्राइक किए जाने की तरफ इशारा किया।

एक सैन्य अधिकारी ने तो एक निजी वेबसाइट पर 1980 के दशक में की गई कथित सर्जिकल स्ट्राइक का विस्तृत ब्योरा पेश किया। सेना के एक अन्य अधिकारी ने एक अखबार से कहा है कि ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक पहली बार हुई है। ऐसे में सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर इस बाबत गफलत की स्थिति है। रक्षा मंत्रालय को इस बारे में आधिकारिक रूप से सूचित करना चाहिए कि क्या भारत पहले भी ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक करता रहा है?

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3- सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिक इस्तेमाल?– विपक्षी दलों का आरोप है कि भारतीय सेना पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक करती रही है लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि केंद्र सरकार इसका राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। अगले साल देश के पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव होने हैं जिनमें उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात जैसे बड़े राज्य भी शामिल हैं। विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी ने इन राज्यों में सियासी लाभ लेने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की बात सार्वजनिक की है। जिस तरह उत्तर प्रदेश में पीएम नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को सर्जिकल स्ट्राइक की बधाई देते पोस्टर देखे गए उससे विपक्ष के आरोपों को बल मिलता है। हालांकि मीडिया में आई खबरों में कहा गया कि पीएम मोदी ने अपने मंत्रियों और बीजेपी नेताओं को सर्जिकल स्ट्राइक पर बयानबाजी से बचने और अपनी छाती ठोकने से बाज़ आने के लिए कहा है। लेकिन लाख टके का सवाल ये है कि क्या पीएम मोदी सार्वजनिक रूप से ऐसा कहेंगे? और क्या बीजेपी आगामी विधान सभा चुनावों में सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करने से बचेगी?

4- पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खात्मे के लिए ठोस रणनीति?– भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी कश्मीर में तीन आतंकी हमले हो चुके हैं। वहीं नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान आधे दर्जन से अधिक बार संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन कर चुका है। सर्जिकल स्ट्राइक के पहले और बाद की स्थिति में ज्यादा अंतर नहीं है। ऐसा लगता है कि मुंबई, पठानकोट और उरी जैसे बड़े आतंकी हमलों को रोकने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक काफी नहीं है। ऐसे में सरकार को जनता का भरोसा जीतने के लिए साफ करना चाहिए कि उसके पास पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को रोकने के लिए ठोस रणनीति है?

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