May 27, 2017

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नरेंद्र मोदी के तीन साल के कार्यकाल में इन पांच फैसलों से बढ़ी जनता की मुश्किलें

नरेंद्र मोदी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में महंगाई की मार सबसे ज्यादा रेल यात्रियों पर पड़ी।

नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। (REUTERS/Dinuka Liyanawatte)

भारतीय जनता पार्टी ने आज (16 मई) के ही दिन तीन साल पहले 2014 में लोक सभा में पूर्ण बहुमत हासिल किया था। तीन दशकों बाद देश में किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला था।  इस प्रचंड जीत के बाद नरेंद्र मोदी 26 मई को शपथ ग्रहण कर देश के प्रधानमंत्री बने। चुनाव से पहले भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी ने जनता से जो वादे किए थे उनकी वजह से उनसे लोगों की उम्मीदें बहुत बढ़ गयी थीं। चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में जनता से 60 महीने मांगे थे। अब इन 60 में से 36 महीने पूरे होने वाले हैं। आइए देखते हैं इस दौरान मोदी सरकार ने ऐसे कौन से फैसले लिए जिनसे सीधे-सीधे जनता की जेब पर असर पड़ा।

1- रेल का किराया- भारतीय रेलवे को भारत की जीवनरेखा कहा जाता है। नरेंद्र मोदी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में महंगाई की मार सबसे ज्यादा इसी पर पड़ी। चाहे वो फ्लेक्सी फेयर सिस्टिम हो (जिसे बाद में वापस लिया गया) या प्रीमियत तत्काल रेल या साधारण यात्रा  मोदी सरकार के दौरान महंगी हुई है।

2- कच्चे तेल की कीमतें कम होने का कोई फायदा नहीं- केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 135 डॉलर प्रति बैरल से 35 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए खुद को “भाग्यवान” भी बताया था। पेट्रोल और डीजल की कीमतें केंद्र सरकार डीरेगुलेट कर चुकी है। यानी पेट्रोल-डीजल की कीमत बाजार भाव के अनुसार घटनी-बढ़नी चाहिए लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 गुना कम होने के बावजूद आम भारतीयों के भाग्य में कम कीमत देना नहीं लिखा था। केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़ा दिया जिसकी वजह से उनकी कीमत कच्चे तेल की कीमत गिरने से पहले वाली दर के आसपास ही बनी रहीं। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस कदम के लिए सफाई देते हुए कहा था कि इससे इकट्ठे पैसे को इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में खर्च किया जाएगा। लेकिन बहुत से लोग सरकार के इस फैसले से ठगा हुआ महसूस कर रहे थे।

3- छोटी बचत, पीएफ पर ब्याज दर में कटौती- संगठित क्षेत्र में नौकरी करने वाले ज्यादातर भारतीयों के लिए बचत खाता, पीपीएफ, किसान विकास पत्र पैसे बचाने के सबसे लोकप्रिय साधन हैं। मोदी सरकार ने इन सभी खातों में मिलने वाले ब्याज की तिमाही समीक्षा करने का फैसला लिया है। अप्रैल से जून 2017 तक की तिमाही के लिए केंद्र सरकार ने बचत खाता, पीपीएफ और किसान विकास पत्र पर मिलने वाले ब्याज पर पिछली तिमाही के मुकाबले 0.10 प्रतिशत की कटौती कर दी।

4- एसबीआई का न्यूनतम जमा, पैसे जमा करने और एटीएम से पैसे निकालने का नया नियम- भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) सार्वजनिक क्षेत्र का भारत का सबसे बड़ा बैंक है। अभी भी देश की सबसे बड़ी आबादी इस पर निर्भर है। एसबीआई ने अप्रैल 2017 में मेट्रो शहरों की शाखाओं में न्यूनतम मासिक औसत पांच हजार रुपये, शहरी क्षेत्रों में तीन हजार रुपये, अर्ध-शहरी में दो हजार रुपये और ग्रामीण में एक हजार रुपये रखना अनिवार्य होगा। मेट्रो शहरों में एसबीआई द्वारा निर्धारित न्यूनतम बैलेंस न होने पर 100 रुपये जुर्माना लगेगा। अन्य क्षेत्रों के लिए भी अलग-अलग जुर्माना तय किया गया है। जुर्माने पर ग्राहकों को सर्विस टैक्स भी देना होगा। इतना ही नहीं एसबीआई ने बैंक में पैसे जमा करने और एटीएम से पैसे निकालने के नियम भी पहले से कड़े कर दिए हैं। अगर आप महीने में तीन बार से ज्यादा बार अपने एसबीआई खाते में पैसा जमा करते हैं तो आपको प्रति जमा 50 रुपये अतिरिक्त का शुल्क देना पड़ेगा। वहीं एसबीआई के एटीएम से महीने में तीन बार से ज्यादा पैसा निकालने पर प्रति निकासी 10 रुपये और दूसरे बैंकों के एटीएम से प्रति माह तीन बार से ज्यादा पैसे निकालने पर प्रति निकासी 20 रुपये का शुल्क देना पड़ेगा।

5- जेएनयू में सीटें घटाना – दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एमफिल-पीएचडी की सीटें कम करने को भी हम मोदी सरकार के बड़े जनविरोधी फैसलों में शामिल कर सकते हैं। खुद मोदी सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की सालाना रैंकिंग के अनुसार जेएनयू देश का दूसरा सबसे अच्छा विश्वविद्यालय है इसके बावजूद यहां की एमफिल-पीएचडी सीटों में 10 गुना से ज्यादा कटौती कर दी गयी।जेएनयू अकादमिक काउंसिल द्वारा शैक्षणिक सत्र 2017-18 के लिए अनुशंसित 1408 सीटें अनुशंसित की थीं लेकिन प्रशासन केवल 242 सीटों पर ही प्रवेश के लेगा।

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First Published on May 16, 2017 1:00 pm

  1. I
    indrajeet
    May 16, 2017 at 2:56 pm
    jansatta valo tum logo ko up aur UK ne jwab de diya hai. Congress se 100 guni achhi hai bjp. apni ghatiya patrkarita apne p rakhe.2019ke bare me mat 2024 ke bare me socho. Janta congress ke ghotalo aur chara chor ko nhi bhuli hai
    Reply
    1. T
      TRUE INDIAN
      May 16, 2017 at 11:34 pm
      Khali pet kab tak bhajan karoge....???
      Reply
      1. V
        vikash
        May 23, 2017 at 4:55 pm
        gadha bhakt yese hi chipo chipo karta hai
        Reply

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