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यूं ही फायरब्रांड नेता नहीं कही जातीं उमा भारती: भरी सभा में आडवाणी को दी थी चुनौती, मोदी को कह द‍िया था ”व‍िनाश पुरुष”

तीन मई 1959 को मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में जन्मी उमा भारती महज 25 साल की उम्र में लोक सभा चुनाव लड़कर राजनीतिक जीवन की तरफ कदम बढ़ाया था।
उमा भारती नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में मंत्री हैं। (PTI Photo by Manvender Vashist)

तीन मई भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री उमा भारती का जन्मदिन है। मई को क्रांतिकारी महीना कहा जाता है। शायद इस महीने में जन्म लेने का ही असर है कि उमा भारती के “क्रांतिकारी” तेवर आज तक बरकरार हैं। हाल ही में जब बाबरी मस्जिद गिराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 13 भाजपा नेताओं पर आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने का आदेश दिया तो मीडिया से सबसे पहले वही मुखातिब हुईं और साफ कहा कि उन्होंने जो किया खुलेआम किया और वो हर मुकदमे और सजा के लिए तैयार हैं।

03 मई 1959 को मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में जन्मीं उमा भारती ने महज 25 साल की उम्र में लोक सभा चुनाव लड़कर राजनीतिक जीवन की तरफ कदम बढ़ाया था। अपने पहले चुनाव में उन्हें 1984 में इंदिरा गांधी के मृत्यु के बाद चली सहानुभूति की लहर की वजह से कांग्रेसी उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा था। करीब दो दशक बाद 2003 में वो मध्य प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। ये अलग बात है कि एक दंगे से जुड़ा मामले में आरोपी बनाए जाने पर उन्होंने करीब एक साल बाद ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। नवंबर 2004 में उन्होंने टीवी कैमरों के सामने ही कुछ भाजपा नेताओं पर उनके खिलाफ मीडिया में खबरें प्लांट करने का आरोप लगाते हुए लाल कृष्ण आडवाणी को खुली चुनौती दी थी। इसके बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था। हालांकि, कुछ महीनों बाद ही उनकी पार्टी में वापसी हो गई लेकिन उनके “क्रांतिकारी” तेवर के चलते कुछ ही समय बाद पार्टी ने फिर से बाहर निकाल दिया। उसके कई सालों बाद 2011 में उनकी भाजपा में दोबारा वापसी हुई।

2014 के लोक सभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने कथित तौर पर उमा भारती का एक पुराना वीडियो जारी किया जिसमें वो नरेंद्र मोदी की कड़े शब्दों में आलोचना करती प्रतीत हो रही हैं। उमा भारती ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि विपक्षी दलों ने वीडियो में उनके बयान को निहित स्वार्थों की वजह से तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। कथित वीडियो के सामने आने के बाद उमा ने नरेंद्र मोदी को अतुलनीय व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि वो उनका काफी सम्मान करती हैं। माना जाता है कि ये वीडियो उस समय का है जब उमा भाजपा में नहीं थीं। हालांकि, जनसत्ता ने इस वीडियो की वास्तविकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। उस कथित “तोड़-मरोड़ कर पेश किए गए” वीडियो में उमा भारती कथित तौर पर ये कहती नजर आ रही हैं-

“गुजरात में आने के बाद मैंने महसूस किया कि यहां हिंदू कभी भी इतना डरा हुआ नहीं देखा। दो दिन में मेरा नजरिया और मजबूत हुआ कि गुजरात एक भय से भरा हुआ राज्य हो गया है और ये नरेंद्र मोदी की देन है। हिंदू समाज की रक्षा की जो व्यक्ति बात करता है, आज कितने हिंदू हैं जो वास्तव में कहीं से किसी भी मामले में शामिल नहीं थे लेकिन उनके ऊपर केस चल रहे हैं। उनकी कोई पूछ-परख नहीं हुई।”

“मैं भारतीय जनता पार्टी के अरुण जेटली जैसे वकील से पूछूंगी कि क्या तुम कभी इन निर्दोष लोगों के लिए खड़े होने के लिए तैयार हुए सुप्रीम कोर्ट में। जो लोग दोषी हैं उन्हें तो फांसी होनी चाहिए लेकिन जो बेकसूर लोग फंसे हैं इन मामलों में क्या उनके बारे में नरेंद्र मोदी ने फिक्र की, क्या उनके बारे में अपने दोस्त अरुण जेटली से बात की।”

हिंदुत्व का एजेंडा और विकास का एजेंडा, नरेंद्र मोदी जी ने पूरे देश में अपने बारे में ये इमेज प्रोजेक्ट करने की कोशिश की। मैं ऐसा मानती हूं कि नरेंद्र मोदी जी विकास पुरुष नहीं विनाश पुरुष हैं।

“उन्होंने (नरेंद्र मोदी) गुजरात का विनाश किया है। वो जीडीपी का जो दावा कर रहे हैं, फर्जी है। वो जो बीपीएल के नीचे के लोगों की संख्या घटने का दावा कर रहे हैं वो फर्जी हैं।” उमा भारती ने उन्हें एक गांव में चलकर देखने की चुनौती दी है।

“न हिंदुत्व, न रोटी, न राम न रोटी, गुजरात को दोनों नहीं मिले। गुजारत को विनाश पुरुष से मुक्ति दिलाई जाए।”

“मोदी को जो बहुत बड़ा बना दिया है, ये मीडिया ने गुब्बारे में हवा भर दी है, इसीलिए हवा भी आपको ही निकालनी होगी क्योंकि आपने ही भरी है।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 2003 के विधान सभा चुनाव के दौरान बांटे गये पर्चों में ‘चे ग्वेरा,  (ईएफ) शुमाकर और हनुमानजी’ को उमा भारती के तीन वैचारिक प्रेरणा स्रोत बताया गया था। उस चुनाव में उमा ने दस साल पुरानी दिग्विजय सिंह सरकार को करारी मात दी थी। पिछले ही साल नोटबंदी के बाद उमा भारती ने कह दिया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालेधन पर कार्ल मार्क्स के विचारों को अमली जामा पहनाया है। फरवरी 2017 में उमा ने एक इंटरव्यू में साफ कहा था कि वो नरेंद्र मोदी की प्रशंसक हैं लेकिन अगर उन्हें कोई बात पसंद नहीं आती तो वो पार्टी को ना कह देती हैं। जाहिर है उमा भारती को यूं ही फायरब्रांड नेता नहीं कहा जाता।

देखिए उमा भारती का विवादित वीडियो-

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