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नीतीश कुमार भाजपा से मिले तो लालू यादव ने तैयार रखा है यह प्‍लान बी?

243 सदस्यों वाली बिहार विधान सभा में राजद के 80, कांग्रेस के 27, जेडीयू के 71 और बीजेपी के 53 विधायक हैं।
पटना में आरजेडी विधायकों की बैठक में मौजूद आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, और उनके दोनों बेटे तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव फोटो-PTI

बिहार में राजद, जदयू और कांग्रेस का सत्ताधारी गठबंधन की दरार चरम पर पहुंच गई। गठबंधन एक तरह से टूट ही गया। बुधवार (26 जुलाई) को नीतीश कुमार ने मुख्‍यमंत्री पद से इस्‍तीफा दे द‍िया। उन्‍होंने कहा कि मैंने तेजस्‍वी यादव से इस्‍तीफा नहीं, केवल सफाई मांगी थी। उनकी ओर से वह भी नहीं दी गई। माना जा रहा है क‍ि वह बीजेपी के समर्थन से दोबारा मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस्‍तीफा से पहले तक लालू और नीतीश कह रहे थे क‍ि गठबंधन को खतरा नहीं हैैै। मंगलवार (25 जुलाई) को भी नीतीश ने कहा था कि महागठबंधन को कोई खतरा नहीं है लेकिन उसी के साथ ये खबरें भी आईं कि मुख्यमंत्री चाहते हैं कि सीबीआई द्वारा भ्रष्टाचार के मामले में अभियुक्त बनाए गए उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव आने वाले शुक्रवार ( 29 जुलाई) तक इस्तीफा दे दें। बिहार में नीतीश की जदयू, लालू यादव की राजद और कांग्रेस की गठबंधन सरकार में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों लालू यादव और राबड़ी देवी के दोनों बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताव यादव मंत्री हैैं। बेटों के भविष्य की चिंता और नीतीश कुमार के बीजेपी से हाथ मिलाने की अटकलें से घिरे लालू क्या चुपचाप हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे? मीडिया रिपोर्ट की मानें तो लालू प्रसाद यादव ने भी महागठबंधन टूटने पर अपनी भावी कार्ययोजना बना रखी है। आइए देखते हैं कि नीतीश से अलग होने पर लालू यादव के पास क्या विकल्प हैं।

मंगलवार को मीडिया से कुछ राजद नेताओं ने कहा कि लालू यादव उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन मांझी के संग चुनाव गठजोड़ कर सकते हैं। मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और मांझी की हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (एचएएम) का बिहार में बड़ा जनाधार नहीं है लेकिन दोनों ही दलित जाति के नेता हैं। मायावती की छवि देश के बड़े दलित नेता की है।हाल ही में जब मायावती ने राज्य सभा सदस्यता से इस्तीफा दिया तो लालू यादव ने उन्हें तुरंत ही राज्य सभा सीट का प्रस्ताव दे दिया। लालू के इस कदम से राजनीतिक जानकारों के इस कयास को बल मिला कि लालू मायावती को ध्यान में रखते हुए बीेजपी के खिलाफ महागठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।  वहीं मांझी बिहार में अच्छी आबादी वाली मूसहर जाति से आते हैं। 2015 में हुए बिहार विधान सभा चुनाव में मांझी बीजेपी के साझेदार थे लेकिन राजनीति में कोई दोस्ती या दुश्मनी स्थाई नहीं होती।

राजद प्रमुख की एक अन्य रणनीति जदयू के अंदर फूट डालो और राज करो की भी हो सकती है। 243 सदस्यों वाली बिहार विधान सभा में राजद के 80, कांग्रेस के 27, जेडीयू के 71 और बीजेपी के 53 विधायक हैं। बीजेपी के सहायक दलों के कुल पांच विधायक हैं। विधान सभा में बहुमत के लिए कुल 122 विधायकों का समर्थन चाहिए। अगर नीतीश बीजेपी के साथ जाते हैं तो कांग्रेस लालू के साथ हर हाल में रहेगी। ऐसे में लालू यादव को बहुमत के लिए केवल 15 अतिरिक्त विधायकों की जरूरत होगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जदयू के करीब 20 विधायक और 12 में से 6 सांसद मौजूदा निजाम से खफा हैं। ऐसे में लालू यादव की कोशिश होगी कि वो जदयू के इन असंतुष्टों के जख्मों को कुरेंदे और बगावत की आग भड़काकर अपनी रोटी उस पर सेंक लें।

राजनीतिक जानकार एक तीसरी संभावना की तरफ भी इशारा कर रहे हैं। सीबीआई द्वारा केस दर्ज करने के मामले में शरद यादव ने लालू पुत्र का खुलकर बचाव किया है जबकि नीतीश कुमार चुप्पी साधे  हुए हैं और उनके कुछ विधायक लालू और उनके परिवार के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। पिछले साल नीतीश कुमार ने शरद यादव को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर वो जगह खुद ले ली थी। मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख दोनों गद्दियों पर नीतीश के विराजमान होने का पार्टी के कई प्रदेश अध्यक्षों ने विरोध किया था जिन्हें बगावत के जुर्म में पार्टी से निकाल दिया गया। बिहार और राजद-जदयू की राजनीति के कुछ जानकारों की मानें तो अगर शरद यादव नीतीश के खिलाफ लालू से हाथ मिला लें तो ये कोई बड़ा अचरज नहीं होगा।

वीडियो- तो क्या जदयू में बगावत संभव है?

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