May 24, 2017

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जानिए क्यों अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल की हार से गदगद हैं नीतीश कुमार?

नीतीश ने 1970 के दशक में पटना के कॉफी हाऊस में एक कलमकार से गंभीरता से कहा था, "एक दिन मैं बिहार का सीएम जरूर बनूंगा।"

जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मुंह मीठा कराते पार्टी महासचिव केसी त्यागी। (एक्सप्रेस फोटो)

कन्हैया भेलारी

राजनीतिक गलियारों में इन दिनों चर्चा जोरों पर है कि बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने मन में ठान लिया है कि उन्हें एक दिन देश का प्रधानमंत्री जरूर बनना है। ठीक उसी तरह जैसे उन्होंने 1970 के दशक में पटना के कॉफी हाऊस में एक कलमकार से गंभीरता से कहा था, “एक दिन मैं बिहार का सीएम बनूंगा।” बन भी गए। उस कलमजीवी से नीतीश कुमार ने ये भी कहा था,‘‘सीएम बनूंगा, बाइ हुक या बाइ क्रुक।’’ नीतीश कुमार की यह सोच राजनीतिक तिकड़म का एक हिस्सा है क्योंकि साधक को ऐसे जटिल लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कई प्रकार की युक्तियों का सहारा लेना पड़ता है। दिल्ली नगर निगम चुनावों में नीतीश का ताल ठोकना, मैदान में उतरना और कई इलाकों में चुनाव प्रचार करना इन्हीं युक्तियों में शामिल है। जो राजनीतिक विश्लेषक ये समझते हैं कि दिल्ली एमसीडी चुनाव में नीतीश को करारी हार का सामना करना पड़ा है वो गलतफहमी के शिकार हो रहे हैं क्योंकि बिहार के घाघ राजनीतिज्ञों की मानें तो ‘‘दिल्ली की तात्कालिक डिफीट जेडीयू की चुनावी हार है लेकिन नीतीश कुमार का परसनल गेन।’’ नीतीश कुमार इस कला में काफी निपुण हैं कि कैसे सांप भी मर जाय और लाठी भी न टूटे।

नीतीश सरकार में तीसरी बार लाल बत्ती लेने से चूक गए जेडीयू के एक विधायक कहते हैं, ‘‘हमारे नेता के चक्रव्यूह को जो समझ गया सो समझ गया, जो न समझा वो अनाड़ी है’’ दरअसल, 2015 के विधान सभा चुनाव में पोस्टर-बैनर खर्च के लिए जब ऊपर से कहा गया तो इस नेता ने चुप्पी साध ली थी। उस वक्त कह रहे थे कि उनका छठा सेन्स सिगनल दे रहा है कि एनडीए की सरकार बनने वाली है। लिहाजा, पोस्टर-बैनर के आदेश को तामिल करने का कोई राजनीतिक लाभ नहीं होगा लेकिन उनका आंकलन उल्टा हो गया। अब अपना सीआर ठीक करने के लिए नीतीश कुमार के पक्ष में मौका-बेमौका दहाड़ते रहते हैं।

नीतीश कुमार की जन्मस्थली बख्तियारपुर के बगल में चर्चित बाजार खुसरूपुर के निवासी और नीतीश से 40 सालों से दोस्ताना रखने वाले एक पत्रकार संजय वर्मा ने भी पिछले दिनों अपने फेसबुक वाल पर दिल्ली नगर निगम चुनाव परिणाम से जुड़े दो पोस्ट किए। पहला-‘‘दिल्ली एमसीडी चुनाव में बीजेपी की जीत जेडीयू के कारण प्रशस्त हुआ।’’ और दूसरा-‘‘झाड़ू को ठूंठ बनाने में जेडीयू की भूमिका महत्वपूर्ण।’’ संजय वर्मा कभी मेनस्ट्रीम अखबारों से जुड़े थे पर अभी छोटी-छोटी पत्र-पत्रिकाओं में लिखते हैं। मन, वचन और कर्म से वो नीतीश कुमार के प्रशंसक हैं। जब उनसे पूछा गया कि आपने ऐसा क्यों लिखा? तो उन्होंने फट से जवाब दिया, ‘‘कभी-कभी अंतरात्मा की आवाज शेयर करने में परमानन्द की अनुभूति होती है।’’

बहरहाल, बारीक एनालिसिस करने पर पता चलेगा कि नीतीश कुमार ने दिल्ली नगर निगम चुनाव में व्यक्तिगत जीत दर्ज कर अपने निर्धारित लक्ष्य की दूरी को कुछ कम कर लिया है। साफ दिखता है कि इस चुनाव में भाग लेकर उन्होने पीएम पद के अपने एक और प्रतिद्वंदी अरविंद केजरीवाल को रास्ते से हटा दिया है। जेडीयू कोटे से नीतीश सरकार में एक मंत्री ने जनसत्ता.कॉम से दिल खोलकर कहा ‘‘मेरे को अब समझ में आ गया है कि दिल्ली में चुनाव लड़ने के पीछे का राज क्या है।’’ ये माननीय 11 मंत्रियो में से एक हैं जिन्होंने बिहार निवास मे 15 दिन कैंप करके चुनाव में खड़े 111 प्रत्याशियों का प्रचार किया था। पूरी दिल्ली में जेडीयू को कुल 46497 मतदाताओं ने अपना मत दिया। आम आदमी पार्टी बिहार के फाउंडर मेम्बर चन्द्रभूषण शर्मा का मानना है कि अगर जेडीयू को 1.83 प्रतिशत मिला वोट आप को मिला होता तो एमसीडी के लड़ाई में हम 30 सीट और जीत गए होते। शर्मा ने कहा, “पता नहीं नीतीश कुमार ने किस जनम का बदला अरविंद केजरीवाल से लिया है।” हालांकि, चन्द्रभूषण शर्मा तपे-तपाए नेता किंग महेन्द्रा के गृह जिला जहानाबाद के होने के बावजूद राजनीति के घात-प्रतिघात, काट-छांट जैसे राजनीतिक औजार से वाकिफ नहीं हैं।

Nitish Kumar, R.K. Chowdhary, Akhilesh Yadav बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बसपा के पूर्व नेता आरके चौधरी के साथ लखनऊ की रैली में। (Source: Express photo by Vishal Srivastav)

यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने की सारी तैयारी के बाद भी नीतीश कुमार ने अचानक जनता दल यू के राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से साथियों से बिना सलाह-मशविरा किए घोषणा कर दी थी कि पार्टी चुनाव में भाग नहीं लेगी। कुमार का ये निर्णय जोर-शोर से चुनाव लड़ने की तैयारी में लगे सैकड़ों कार्यकर्ताओं को बिजली की करंट की तरह लगी थी। जानकार कहते हैं कि नीतीश कुमार ने फील कर लिया था कि अगर उनकी पार्टी चुनाव में हिस्सा लेगी तो बीजपी का मत विभाजन होगा इससे अखिलेश यादव को जीतने की संभावना बढ़ेगी क्योंकि जेडीयू बीजेपी के कोर वोट में ही सेंध लगाती। मीडिया में कयास भी लगने लगा था कि अगर अखिलेश यादव दोबारा चुनाव जीतते हैं तो नरेन्द्र मोदी के समानान्तर विपक्ष की तरफ से एक मजबूत चेहरा के रूप में स्थापित हो सकते हैं। ये संभावित हैपनिंग नीतीश कुमार के लक्ष्य में बाधक था। जनता दल यू राष्ट्रीय परिषद के सदस्य के के त्रिपाठी ने बताया, ‘‘नीतीश कुमार ने यूपी विधानसभा चुनाव नहीं लड़कर बीजेपी को मदद पहुंचाया है लेकिन उनको लॉन्ग रन में राजनीतिक फायदा होगा क्योंकि पीएम पद का उभरता समाजवादी नौजवान और उनका मजबूत चैलेंजर घायल होकर रणक्षेत्र से कम से कम 5 सालों के लिए बाहर हो गया।’’

जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री श्याम रजक का विश्लेषण है कि ‘‘दिल्ली के एमसीडी चुनाव ने यह साबित कर दिया है कि नीतीश कुमार ही नरेन्द्र मोदी के बढ़ते रथ को रोक सकते हैं। अब बिना देर किए देश के सारी विपक्षी दलों को नीतीश कुमार को पीएम फेस घोषित कर देना चाहिए।’’ श्याम रजक कारण गिनाते हुए बताते हैं कि ‘‘पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को केन्द्र की बीजेपी सरकार ने नारदा केस में गलत तरीके से फंसाकर लम्बे समय तक के लिए उलझा दिया है, ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक स्वास्थ्य कारणों से ज्यादा समय अपने इलाज के लिए अमेरिका में बिता रहे हैं। इस सूरत-ए-हाल में नीतीश कुमार ही ऐसी शख्सियत हैं जो मोदी को रोकने का माद्दा रखते हैं।’’

इसी बीच राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी नरेन्द्र मोदी से टक्कर लेने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी पार्टियों की एक रेनबो कोलिशन बनाने की पहल तेज कर दी हैं। सूत्रों की मानें तो सीएम नीतीश कुमार उस कोलिशन के संयोजक हो सकते हैं।

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First Published on May 1, 2017 6:38 pm

  1. N
    Naval
    May 2, 2017 at 2:51 pm
    न रुई , न कपास जुलाहों में लट्ठम लट्ठ
    Reply
    1. U
      umesh
      May 2, 2017 at 1:26 pm
      What is the sense of this - In MCD / Delhi Election out 0f 101 JDU Candidate no one win the race that is 95 Jamanat t . In MLA Election of UP JDU was going to loose 100 with Jamanat at. So what is the streatgey to Mr Nitish & Co. He is up to Bihar & who knows him in another state . So these are all fake news for publicity .
      Reply
      1. F
        ff
        May 1, 2017 at 8:28 pm
        Vvfdgvfff
        Reply

        सबरंग