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क्‍या कश्‍मीर के बंद दरवाजों पर लगा है किसी और का ताला, नरेंद्र मोदी को नहीं मिल रही चाबी?

रविवार को जब कुछ भारतीय नेता कश्मीरी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी से मिलने पहुंचे तो उन्होंने दरवाजा तक नहीं खोला।
Author September 5, 2016 17:27 pm
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

शुक्रवार (2 सितंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में “विकास” और “विश्वास” को कश्मीर मुद्दे के हल का अहम सूत्र बताया। रविवार (4 सितंबर) को जब सीताराम येचुरी(सीपीएम), डी राजा (सीपीआई), शरद यादव (जदयू) और जयप्रकाश नारायण (राजद) कश्मीरी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी से मुलाकात करने गए तो हुर्रियत कांफ्रेंस नेता ने उनके लिए घर के दरवाज़े तक नहीं खोले। गिलानी ने भारतीय नेताओं के सामने आना भी जरूरी नहीं समझा, “विश्वास” करना तो दूर की बात है। खबरों के अनुसार गिलानी के घर के बाहर भारतीय नेताओं के खिलाफ नारे भी लगाए जा रहे थे।

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में 20 दलों के 26 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल दो दिवसीय दौरे पर रविवार को कश्मीर पहुंचा था। जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा ने अलगाववादी गुटों हुर्रियत कांफ्रेंस (गिलानी), हुर्रियत कांफ्रेंस (मीर वाइज) और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (यासिन मलिक) से प्रतिनिधिमंडल से मिलने की अपील की तो अलगावादियों ने उनका अनुरोध ठुकरा दिया। गिलानी, मीर वाइज उमर फारूक़ और यासिन मलिक ने एक साझा बयान जारी करके इस प्रयास को ‘छलावा’ करार दिया। कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी भारतीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से मिलने से मना कर दिया।

नवंबर-दिसंबर 2014 में कश्मीर में हुए विधान सभा चुनाव में पिछले 25 सालों का सबसे अधिक मतदान हुआ। कश्मीर घाटी में पीडीपी और जम्मू में बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल की। चुनाव से पहले दोनों दलों का कट्टर विरोधी माना जाता था लेकिन चुनाव के बाद जिस तरह दोनों दलों ने राज्य में गठबंधन सरकार बनायी उससे एक उम्मीद जगी कि कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए प्रमुख दल अपने वैचारिक आग्रहों को किनारे रखने के लिए तैयार हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीर को लेकर विशेष रुचि दिखाते रहे हैं। वो अब तक आधा दर्जन से ज्यादा बार कश्मीर जा चुके हैं। वो कश्मीर में दिवाली भी मना चुके हैं। लेकिन उनकी तमाम कोशिशों के बावजूद कश्मीर पर मसले पर कोई नई रोशनी पड़ती नहीं दिख रही है।

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8 जुलाई को हिज्बुल मुजाहिद्दीन के 24 उग्रवादी बुरहान वानी की एक मुठभेड़ में मौत के बाद घाटी में शुरू हुई हिंसा में दो पुलिसकर्मियों समेत अब तक 70 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। दो हजार से अधिक लोग पैलेट गन इत्यादि से घायल हुए हैं। कश्मीर कुछ इलाकों में अभी भी कर्फ्यू हुआ है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि जितने शायद पिछले एक दशकों में कभी नहीं बिगड़े थे। पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सुझाए “इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत” के रास्ते से कश्मीर समस्या का हल निकालने की बात दोहराई लेकिन जब गिलानी ने भारतीय नेताओं के लिए अपने घर के दरवाजे नहीं खोले तो सोमवार (5 सितंबर) को गृह मंत्री राजनाथ ने कहा, “अलगाववादियों के व्यवहार ने दिखा दिया कि वे कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हूरियत में विश्वास नहीं करते हैं।” जाहिर है राजनाथ के बयान में सरकार की हताशा झलक रही थी।

जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने हाल ही में बयान दिया कि उनके पिता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा था कि कश्मीर समस्या का हल दो-तिहाई बहुमत वाली सरकार ही कर सकती है। अपने सवा दो साल के अधिक के कार्यकाल में नरेंद्र मोदी सरकार लगातार कश्मीर समस्या के समाधान की कोशिश कर रही है लेकिन अभी तक कोई राह निकलती नहीं दिख रही है। सोमवार को राजनाथ थोड़े हताश भले लग रहे हों लेकिन शायद नाउम्मीद नहीं थे। उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारे बातचीत के दरवाज़े ही नहीं रोशनदान भी खुले हुए हैं।” कश्मीर को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार के “दरवाजे खुले” हैं और अलगाववादियों के “दरवाजे बंद” हैं तो एक सवाल  उठना लाजिमी है कि क्या बंद दरवाजे पर “किसी और का ताला” लगा हुआ है। सोमवार को ही पीएम मोदी ने चीन में जी-20 सम्मेलन में सदस्य देशों से कहा, “वास्‍तव में, दक्षिण एशिया में एक ही देश है जो हमारे क्षेत्र के देशों में आतंक फैला रहा है।”

PM मोदी का G20 में पाकिस्‍तान पर हमला- दक्षिण एशिया का एक देश हमारे क्षेत्र में आतंक फैला रहा है

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