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इन कारणों से गलत है एचडीएफसी, आईसीआईसीआई का हमारे पैसे निकालने पर हमसे ही चार्ज वसूलना, देख रही है नरेंद्र मोदी सरकार?

एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक ग्राहकों द्वारा होम ब्रांच से पहले चार बार नकद देन-देन के बाद हर जमा या निकासी पर शुल्क ले रहे हैं।
एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक ने एक मार्च से सभी बचत और वेतन खाता धारकों से पहले चार नकद लेन-देन के बाद शुल्क लेना शुरू कर दिया है।

बुधवार (एक मार्च) को देश के तीन सबसे बड़े प्राइवेट बैंकों (एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक) ने सभी बचत और वेतन खाता धारकों के होम ब्रांच (जहां मूलतः खाता खोला गया है) से तय सीमा से अधिक नकद लेन-देन करने पर न्यूनतम 150 रुपये शुल्क लेना शुरू कर दिया है। यानी आप अपने होम ब्रांच से एक महीने में एक तय राशि से अधिक या चार बार से ज्यादा नकद लेन-देन करते हैं तो आप से हर लेन-देन पर न्यूनतम 150 रुपये या हर एक हजार रुपये के लेन-देन पर पांच रुपये की दर से शुल्क लिया जाएगा। आईसीसीआई बैंक में अगर आप बैंक की किसी और शाखा से नकद लेन-देन करते हैं तो आप महीने में केवल एक बार बिना किसी शुल्क के नकद लेन-देन कर सकेंगे। उसके बाद आपको तय शुल्क देना पड़ेगा। माना जा रहा है कि बाक़ी प्राइवेट बैंक भी अपने “बड़े भाइयों” की राह पर पर चलेंगे और आम जनता की जेब ढीली करने के “अनैतिक” मुहिम का हिस्सा बनेंगे। आइए देखते हैं क्यों इन बैंकों का ये तुगलकी फरमान पूरी तरह गलत और अदूरदर्शी है।

1- बैंकों का मुनाफा- किसी भी कारोबार की सफलता का पहला मापदंड है मुनाफा। मुनाफा के बिना कोई भी कारोबार नहीं चल सकता। इसलिए इन प्राइवेट बैंकों की फैसले पर विचार से पहले इनके मुनाफे पर विचार करना होगा। अगर पिछली चार तिमाहियों के आंकड़े देखें तो एचडीएफसी बैंक को कुल 13,933.79 करोड़ रुपये का मुनाफा हो चुका है। बात आईसीआईसीआई की करें तो पिछली चार तिमाहियों में बैंक को 8,478.33 करोड़ के मुनाफे में चल रहा है। वहीं एक्सिस बैंक ने पिछली साल की आखिरी तीन तिमाहियों में कुल 579.57 करोड़ रुपये मुनाफा कमाया। जाहिर ये बैंक जनता द्वारा जमा किए गए पैसों से ही मुनाफा कमाते हैं। ऐसे में जब जनता के पैसे से मोटा मुनाफा कमाने के बावजूद ये बैंक जनता से और वसूली करना चाहते हैं। वो भी उसके अपने पैसे के लेन-देन करने पर।

2- छोटी बचत पर बड़ी मार- बैंकों ने चार बार और दो लाख की जो सीमा तय की है उससे भी  निम्न और निम्न मध्यम वर्गीय ग्राहकों को ज्यादा तकलीफ होगी। छोटे-मोटे कारोबार या काम करके छोटी-छोटी जमा पूंजी बैंक में जमा करते रहने वाले भारतीयों को अब अपनी मेहनत की कमायी से एक हिस्सा बैंकों को बैठे-बिठाए देना होगा। गौर तलब है कि इंटरनेट और बिजली की दिक्कतों का मारा यही वर्ग डिजिटल बैंकिंग से भी सबसे ज्यादा दूर है।ऐसे में ये ग्राहक वर्ग बैंकिंग सिस्टम के बजाय असंगठित क्षेत्र के महाजनों और सूदखोरों के चंगुल में फंस सकता है।

3- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुहिम?- नरेंद्र मोदी सरकार देश की अधिकतम आबादी को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना है। पीएम मोदी ने गरीब तबके को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने के लिए जन-धन खाते खुलवाए। अभी भी भारत की बहुत बड़ी आबादी बैंकों के बजाय छोटे-मोटे महाजनों, बनियों या ऐसी ही किसी जुगाड़ सिस्टम से छोटे-मोटे नकद लेन-देन करके अपना काम चलाते हैं। तीन बड़े प्राइवेट बैंकों के इस फैसले से बहुत सारे लोग हतोत्साहित हो सकते हैं। छोटी जमा-पूंजी वालों को बैंक अकाउंट खुलवाना बेकार और शोषणकारी लगने लगेगा। सरकार ने जन धन योजना के तहत जो करोड़ों नए बैंक खाते खुलवाए उनमें अभी लेन-देन उम्मीद से बहुत कम है। खबर आयी थी कि कई बैंकों ने कई जन धन खातों को शून्य जमा खाते की सूची से निकालने के लिए उनमें एक-एक रुपये डाले थे।

4- कम्प्यूटरिकृत कोर बैंकिंग को ठेंगा- देश में कम्प्यूटर और इंटरनेट क्रांति के बाद बैंकिंग में “होम ब्रांच” के विचार लुप्त प्राय होने की तरफ बढ़ रहा था। तेजी से विकसित होती भारतीय अर्थव्यवस्था में आंतरिक प्रवासन बढ़ा है। नौकरी के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाना अब आम बात है। ऐसे में अपने ही बैंक से खातों का ट्रांसफर कराते रहना खाता धारक और बैंक दोनों के संसाधनों और समय की बर्बादी है। ज्यादातर बैंकों का अब सारा आंकड़ा कम्प्यूटरिकृत हो चुका है। बैंकों का कम्प्यूटरीकरण कागज-मुक्त अर्थव्यवस्था की दिशा में जरूरी कदम है। जाहिर है कि आप बैंक की किसी भी शाखा में नकद लेन-देन करें बैंक के उतने ही संसाधन खर्च होंगे जितना कि आपकी होम ब्रांच में होते। चाहे आप बैंक की किसी भी शाखा में लेन-देन करें बैंक क्लर्क को सारे आंकड़े कम्प्यूटर कीबोर्ड तो कुछ ही की दबाने पर मिल जाते हैं। ऐसे में बैंकों से उम्मीद की जा रही थी कि वो होम ब्रांच के अलावा अपने ही बैंक की बाकी ब्रांच से लेन-देन पर शुल्क लेना पूरी तरह बंद करेंगे लेकिन बैंकों ने बिल्कुल उलटी चाल चलते हुए बैंकिंग सिस्टम को दशकों पहले के “होम ब्रांच” की रूढ़िवादी सोच की तरफ धकेल दिया है।

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  1. K
    Kartik chaudhary
    Mar 9, 2017 at 2:05 am
    यह सरकार कुछ नहीं बोलेगी
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग