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अलविदा विनोद खन्ना, एक अमर अदाकार के बारे में पढ़े कुछ अनसुने फैक्ट्स

हिंदी फिल्मों के सुपर स्टार विनोद खन्ना ने मेरे अपने, मेरा गांव मेरा देश, गद्दार (1973 फिल्म), जेल यात्रा, इम्तिहान, मुकद्दर का सिकंदर, इंकार, कच्चे धागे, अमर अकबर एंथनी, राजपूत, कुर्बानी, दयावान, कारनामा, सूर्या और जुर्म जैसी यादगार फिल्में कीं।
Author April 28, 2017 10:39 am
आज बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना ने कैंसर से लड़ते हुए दुनिया को अलविदा कह दिया। विनोद खन्ना के देहांत के बाद आज मुंबई के वर्ली में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिसमें बॉलीवुड की कई फिल्मी हस्तियों समेत कई लोग शामिल हुई।

हिंदी फिल्मों के सुपर स्टार विनोद खन्ना ने मेरे अपने, मेरा गांव मेरा देश, गद्दार (1973 फिल्म), जेल यात्रा, इम्तिहान, मुकद्दर का सिकंदर, इंकार, कच्चे धागे, अमर अकबर एंथनी, राजपूत, कुर्बानी, दयावान, कारनामा, सूर्या और जुर्म जैसी यादगार फिल्में कीं। उन्होंने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत 1968 मे आई फिल्म मन का मीत’ से की जिसमें उन्होंने एक खलनायक की भूमिका निभाई थी।
कई फिल्मों में उल्लेखनीय सहायक और खलनायक के किरदार निभाने के बाद 1971 में उनकी पहली एकल हीरो वाली फिल्म हम तुम और वो आई। उन्होंने पूरब और पश्चिम, मेरा गांव मेरा देश जैसी कई फिल्मों में नकारात्मक किरदार निभाए थे। 70 और 80 के दशक के सुपरस्टार रहे विनोद और अमिताभ बच्चन, दोनों ही अपने बॉलीवुड करियर के उफान पर लगभग एक ही समय में थे। दोनों सितारों ने मुकद्दर का सिकंदर परवरिश, अमर अकबर एंथनी जैसी फिल्मों में साथ में काम किया था।

पढ़ाई-लिखाई नासिक में
साधारण परिवार से होने के बावजूद बॉलीवुड अभिनेता बनने और फिर ओशो से प्रभावित होकर अपनी शादीशुदा जिंदगी खत्म करने के कारण वह हमेशा चर्चा में रहे। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद विनोद खन्ना का परिवार मुंबई आ गया था। उनके पिता कपड़ा व्यवसायी थे। उनके माता-पिता का नाम कमला और किशनचंद खन्ना था।
मुंबई, नासिक और दिल्ली में उनकी शिक्षा हुई। पहले वह इंजीनियर बनना चाहते थे लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वे घर के व्यवसाय से जुड़ें। 1960 के बाद की उनकी स्कूली शिक्षा नासिक के एक बोर्डिग स्कूल में हुई। वहीं उन्होंने सिद्धेहम कॉलेज से वाणिज्य में स्नातक किया था। पिता ने उनका दाखिला वाणिज्य कॉलेज में करा दिया था। इस दौरान उन्होंने रंगमंच को अपनाया।

गीताजंलि से शादी और तलाक
कॉलेज में ही उनकी मुलाकात गीतांजलि से हुई। गीतांजलि उनकी पहली पत्नी थीं। हालांकि ओशो से प्रभावित होकर विनोद ने अपने पारिवारिक जीवन को संकट में डाल दिया। 1975 में फिल्मों से संन्यास के बाद विनोद अमेरिका गए और वहां पांच साल तक ओशो के अनुयायी रहे। अमेरिका जाने से पहले वह अक्सर पुणे में ओशो के आश्रम जाते थे और इस हद तक ओशो से प्रभावित थे कि अपनी कई शूटिंग उन्होंने पुणे में ही करवाई। इस दौरान विनोद का परिवार पूरी तरह बिखर गया। जब वह देश लौटे तो पत्नी गीतांजलि उन्हें तलाक देने का फैसला कर चुकी थीं। 1987 से 1994 में विनोद खन्ना बॉलीवुड के सबसे मंहगे सितारों में से एक थे। विनोद ने अपने चार दशक लंबे सिने करियर में लगभग 150 फिल्मों में अभिनय किया।

पुरस्कार

’1975- हाथ की सफाई के लिए फिल्मफेयर का श्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार ’1999-फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड ’2005- स्टारडस्ट अवार्ड – साल के रोलमॉडल के लिए ’2007-जी सिने अवार्ड लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए
सियासी सफर

’विनोद खन्ना पंजाब के गुरदासपुर से भाजपा
के सांसद थे। गुरदासपुर से वह 4 बार
लोकसभा चुनाव जीते। 1997 में विनोद ने
राजनीति में कदम रखा। उन्होंने भारतीय
जनता पार्टी की सदस्यता ली।
’अगले साल लोकसभा चुनाव में गुरदासपुर
से सांसद चुने गए।1999 में वह फिर यहीं
से सांसद चुने गए। साल 2002 में उन्हें
ं संस्कृति और पर्यटन मंत्री बनाया गया। सिर्फ
छह माह बाद ही उन्हें विदेश मामलों के
मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया।
’2004 में वह पुन: गुरदासपुर से सांसद
बने। हालांकि, 2009 में खन्ना चुनाव हार
गए। 2014 में खन्ना ने कांग्रेस के प्रदेश
अध्यक्ष और गुरदासपुर सीट से उस वक्त के
सांसद वाजवा को आठ हजार वोट से हराया।

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