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चीनी सामान का बायकॉट करना है तो 50 लाख से अधिक भारतीयों को फेंकना होगा अपना 6 महीने पुराना स्मार्टफोन

इस साल की दूसरी तिमाही में बिके कुल स्मार्टफोन में 7.7 प्रतिशत चीनी कंपनी लेनोवो के थे।
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बाएं) और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की फाइल फोटो।

उरी हमले के बाद पैदा भारत और पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव के बाद कुछ लोग सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुप में चीनी सामान के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं। ऐसे लोग इस बात से नाराज नजर आते हैं कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन पाकिस्तान को अपना दोस्त बताते हुए उसका पक्ष लेता नजर आता है। पिछले हफ्ते ही चीन ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवादी मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र में आतंकवादी घोषित करवाने की भारत की कोशिशों में अड़ंगा लगा दिया। उससे पहले चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी की तिब्बत से भारत होकर आने वाली एक सहायक नदी की धारा को रुकवा दिया। लोगों की भावनाएं चाहे जो हों  पर रहकर सोचें तो क्या ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में चीन या किसी भी एक देश के सामान का पूरी तरह बहिष्कार संभव है? और क्या आम भारतीय के लिए ऐसा कर पाना आसान होगा? इस सवालों पर सोचने से पहले केवल स्मार्टफ़ोन बाजार से जुड़े ताजा आंकड़ों पर नजर डालें और सोचें कि चीनी सामान का बहिष्कार कितना संभव है।

इंटरनेशनल डाटा कॉर्पोरेशन (आईडीसी) की साल  2016 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-मई-जून) की रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान भारत में कुल  2.75 करोड़ स्मार्टफोनों की बिक्री हुई। बिक्री के आधार पर दूसरी तिमाही में चीनी कंपनी लेनोवो बाजार में सैमसंग (दक्षिण कोरियाई कंपनी) और माइक्रोमैक्स (भारतीय कंपनी) के बाद तीसरे नंबर पर रही। इस दौरान कुल बिके स्मार्टफोनों में 7.7 प्रतिशत लेनोवो-मोटोरोला के थे। मोटोरोला को लेनोवो ने 2014 में खरीद लिया था। इस साल की दूसरी तिमाही में लेनोवो के अलावा तीन अन्य चीनी वेंडरों ने 10 लाख से अधिक स्मार्टफोन भारत में बेचे। इस तरह केवल चार चीनी कंपनियों ने मिलकर साल की दूसरी तिमाही में 50 लाख से अधिक स्मार्टफोन बेचे। ये आंकड़ा तो चीनी कंपनियों का है। अगर इसमें उन कंपनियों के स्मार्टफोनों की संख्या जोड़ दी जाए जो चीन में अपने उत्पाद बनवाती हैं तो ये संख्या और बढ़ जाएगी। यानी चीनी सामान का बहिष्कार करना है तो 50 लाख से अधिक भारतीयों को अपना महज छह महीना पुराना स्मार्टफोन फेंकना होगा। तो क्या आप हैं इसके लिए तैयार?

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भारत स्मार्टफ़ोन का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है। अंतरराष्ट्रीय संस्था मॉर्गन स्टैनली की जून में प्रकाशित रिपोर्ट अनुसार भारत में 22 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन यूज़र हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत का स्मार्टफ़ोन बाजार दुनिया में सबस तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो 2018 तक भारत स्मार्टफोन की संख्या के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया में दूसरे नंबर पर आ जाएगा। अभी स्मार्टफोन की खपत के मामले में दुनिया में सबसे आगे चीन है लेकिन वहां का बाजार अब सुस्त पड़ता जा रहा है। भारत का स्मार्टफोन बाजार चीन से कई गुना तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन मुश्किल ये है कि भारत स्मार्टफ़ोन का उपभोक्ता बनने में जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है उतनी तेजी से उसका उत्पादक बनने की तरफ नहीं बढ़ रहा है। ऐसे में बेहतर होगा कि भारतीय कंपनियां विश्व स्तरीय उत्पाद बनाने पर जोर दें ताकि देश के लोगों को किफायदी दाम में बेहतरीन सामान खरीदने के लिए विदेशी कंपनियों की तरफ न देखना पड़े।

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  1. I
    Indian
    Oct 4, 2016 at 1:53 pm
    Don't buy light hangings this year on Diwali....that alone will cost a loss of more than Rs 600crore to China...why to destroy ur own smartphones😂
    (2)(0)
    Reply
    1. J
      John
      Oct 4, 2016 at 5:04 pm
      Don't buy new Chinese products anymore
      (1)(0)
      Reply
      1. J
        John
        Oct 4, 2016 at 5:07 pm
        From Now onwards decide not to buy Chinese products & if you already own it just be with it..... But don't buy new Chinese products for now...... Thanks
        (3)(0)
        Reply
        1. J
          John
          Oct 4, 2016 at 5:04 pm
          No need to destroy old Chinese product..... But
          (0)(0)
          Reply
          1. K
            Kapil Tyagi
            Oct 4, 2016 at 6:50 pm
            3 महीने पहले कम से कम सामान import हो जाता है । नुक्सान होगा तो सिर्फ भारतीय व्यापारियों को और उन दुकानदारों को जिन्होंने 2-3महीने पहले माल उठा लिया है । चीन तो सामान भेज चुका होता है । wo munafa kama chuka hai ...aur hamein dekhkar hans raha hoga |
            (0)(0)
            Reply
            1. N
              Narendra Kumar
              Oct 5, 2016 at 2:00 pm
              जो वस्तु भारतीयों ने खरीद लिए है उसका पैसा तो चीन चला गया है। चीनी समान बहिष्कार करने का आग्रह नए चीन निर्मित वस्तुओं के नहीं खरीदने से है। तभी चीन को आर्थिक चोट पहुँचेगा। उल्टा-पुल्टा लिख कर बुड़बक बनाने की कोशिश नहीं करें।
              (1)(0)
              Reply
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              सबरंग