January 25, 2017

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बाखबर अट्टाहस रावण खल खल

विजयादशमी स्पेशल! लखनऊ से पीएम का संबोधन सीधा प्रसारित: आतंकवाद मानवता का दुश्मन है। आतंक के रावण को सबको मिलके हराना है... आतंकवाद के खिलाफ पहला योद्धा था जटायू। एकदम मर्यादित भाषण। फिर भी चर्चा जारी!

एक नहीं छह छह सर्जिकल
एक सर्जिकल! नहीं, दो दो सर्जिकल! नहीं दो और सर्जिकल! और फिर एक और सर्जिकल! एक के बदले पांच पांच सर्जिकल, कुल मिला कर छह छह सर्जिकल!
असली सवाल: किसकी सर्जिकल सबसे धांसू?
अपनी सर्जिकल: टाप ते टाप! हुइहै कोउ न होनेउ नाहीं!
नहीं जी, हम दो हमारी दो दो सर्जिकल! सबसे पहले हमने कीं, लेकिन हमारी विनम्रता कि गाल थे, फिर भी नहीं बजाए!
तीसरे ने बताया: हमहूं मारीं दो दो सर्जिकलें। ये मारा वो मारा, यहां मारा वहां मारा कहां कहां नहीं मारा। घुस के मारा पलट के मारा, गिरा के मारा उठा के पटका और पटक पटक के मारा, लेकिन विनम्रता देखो कि गाल थे कि नहीं बजाए।
चौथी सर्जिकल वाले ने कहा: असली तो हमने की थी, लेकिन हमाारी विनम्रता देखो कि हम तब नहीं बताए। भक्तजन पोस्टर लगा दिए, तो हम क्या करें? भक्त के वश में है भगवान। लाख मना किया, लेकिन हमारे चेले मानें तब न!
शर्म उनको मगर नहीं आती
एक एंकर: हाय हाय! श्रेय के लिए ऐसी फाइट! मुझे शर्म आ रही है। शेम शेम, श्रेय के लिए लड़ रहे हैं: शेम शेम शेम शेम! दो एंकर नाराज, दो एंकर मस्त, एक न्यूट्रल गियर में। पंद्रह दिन से सर्जिकल राग बजा रहे हैं!
एक दल, दो दल, तीन दल, चार दल, पांचवां दल कोरस में: कहां मेरी सर्जिकल, कहां तेरी सर्जिकल? चोप्प! कहां हमारी वाली सर्जिकल और कहां तुम्हारी वाली फर्जिकल!
बकवास बंद। सर्जिकल हमारी! क्या बोला? अरे फर्जिकल होगी तुम्हारी। असली सर्जिकल हमारी! बहुत हो चुकीं सर सर्जिकल! बंद करो सर जी! सर्जिकल!
देशद्रोही कहीं के
एक दो तीन चार पांच रिटायर्ड जनरल, कर्नल, मेजर आदि बड़े-बड़े सेनाधिकारी एक के बाद एक हर चैनल पर हर दिन कहते दिखते: मे आइ… मे आइ… मे आइ… अब मैं बोलूं अब मैं बोलंू, मुझे पांच सेकेंड दे दो बाबा!
एंकर: शर्म करो, जिनने सीमा पर जान लड़ाई उनको रुला रहे हो। तुमको माफ नहीं किया जा सकता। एंटीनेशनल कहीं के! जी जनरल, आप बोलिए। आप ही बोलेंगे और सब सुनेंगे। खामोश! एक रिटायर्ड जनरल: जानते भी हो क्या होती है सर्जिकल? मैंने की है इकहत्तर वाली सर्जिकल। नब्बे हजार पकड़े, सालों से नाक रगड़वाई और तुम सेना पर शक करते हो? दूसरे तीसरे चौथे पांचवें ने बताया कहां-कहां लड़े!
सबने कहा: जानते हैं हम आपकी कुर्बानी, सेना की कुर्बानी, नमन करते हैं उसे।
एंकर: सेना सत्य, बाकी सब झूठ!
सबने माना: यही सच है, यही सच है, सेना ने महान काम किया है, लेकिन…
एंकर: क्या बोला? कौन बोला? अब भी ‘लेकिन’? आप एंटीमिलिटरी एंटीनेशनल गद्दार देशभक्त नहीं, देशद्रोही हैं! अभी माफी मांगिए वरना…
सभा में सन्नाटा! बीच चर्चा में कर्फ्यू की कैफियत!
तुम ठोकत तो हमहूं ठोकत
पीएम ने कहा है कि कोई छाती न ठोके! और रक्षामंत्री ठोके जा रहे हैं!
रक्षामंत्री: मैं कहां ठोक रहा हूं। एक सौ सत्ताईस करोड़ जनता को श्रेय दे रहा हूं, सेना को दे रहा हूं।
विपक्ष: आप ठोक रहे हैं। यह सहन नहीं किया जा सकता। आप तो पीएम की भी नहीं मान रहे। रक्षामंत्री को बर्खास्त करो!
गुस्से की टीआरपी
एक एंकर, दो एंकर क्रोध का कंपटीशन दे रहे हैं: ऐसी बातें सुन कर दुश्मन देश खुश हो रहा है। ये फुटेज देखो, बत्तीसी दिख रही है। कुछ तो शर्म करो देशद्रोहियो! आपस में प्रेम करो देशद्रोहियो!
फिर एक एंकर, दो एंकर, तीन एंकर। रात के नौ बजे वाले प्रसिद्ध एंकर का एंगर यानी दो घंटे वाला गुस्सा शो:
एंकर: हे देश तू देख रहा है न! हे जनता तू समझ रही है न! तेरे लिए आज मैं इस कदर गुस्से में हूं कि मेरी टीआरपी सबसे ज्यादा हो गई है! मैंने लाइनें खोल दी हैं और बहस को खूंटा तोड़, डंडा मार कर दौड़ा दिया है। हां एमएआर, हां रतन, हां अनजान, हां सबा, हां सबा सबा सबा सबा सबा सबा सबा, हां जेंटलमेन, खामोश, नहीं तो माइक बंद कर दूंगा। अब मेरी रेटिंग देखो। थैंक्यू थैंक्यू थैंक्यू!
बदले बदले मेरे सरकार नजर आते हैं
एनडीटीवी में मोटे-मोटे अंगरेजी अक्षरों में एक एलान लिखा आता है: ‘एनडीटीवी ऐसी टिप्पणियां प्रसारित नहीं करेगा, जिनसे देश को खतरा हो सकता है।’
हाय! ‘ये क्या हुआ, कैसे हुआ, कब हुआ, क्यों हुआ… छोड़ो ये न सोचो’!
हाय मेरी डायरी, कश्मीर वाली डायरी कहां गई मेरी डायरी? किसी ने देखी तो नहीं मेरी डायरी?
एक शो का मंगलाचरण
सीपीआइ के अतुल कुमार अनजान: ‘आप एंकरिंग कर रहे हैं कि भाजपा के आदमी की तरह बोल रहे हैं?’ संघ पक्षधर रतन शारदा: आप ये क्या बोल रहे हैं? अनजान: आप क्या उनके पेरोकार हैं?
विजयादशमी स्पेशल
विजयादशमी स्पेशल! लखनऊ से पीएम का संबोधन सीधा प्रसारित: आतंकवाद मानवता का दुश्मन है। आतंक के रावण को सबको मिलके हराना है… आतंकवाद के खिलाफ पहला योद्धा था जटायू। एकदम मर्यादित भाषण। फिर भी चर्चा जारी!
रामजी का तीर चला, मूंछों वाला रावण जला, लेकिन ‘पंपोर’ में, ‘फिर सुना, हंस रहा अट््टहास रावण खल खल’!

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First Published on October 16, 2016 1:42 am

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