June 26, 2017

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ब्लॉग: शिगमो योद्धा की तरह लौटे हैं मनोहर पर्रिकर, फिर से मनोहरमय होकर खुश है गोवा

ब्लॉग: मनोहर पर्रिकर ने रक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। वो मंगलवार (14 मार्च) शाम पांच बजे गोवा के सीएम पद की शपथ लेंगे।

मनोहर पर्रीकर ने रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। वो 14 मार्च शाम पांच बजे गोवा के सीएम पद की शपथ लेंगे। (PTI File Photo)

डॉ. शुभ्रता मिश्रा

गोवा में मनोहर पर्रिकर के एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने की घोषणा हुई है, तब से गोवावासी बेहद खुश हैं। गोवा में होली शिगमोत्सव के रुप में मनाई जाती है और ऐसा माना जाता है कि शिगमोत्सव दशहरा के समय युद्ध लड़ने गए योद्धाओं के विजयी होकर फाल्गुन में लौटने की खुशी में मनाया जाता है। मनोहर पर्रिकर की गोवा में होली के दिन वापसी उनको किसी शिगमो योद्धा से कम साबित नहीं कर रही है। वे वास्तव में एक योद्धा की तरह भारत के रक्षा मंत्री बनकर गोवा से गए थे और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे अदम्य साहस वाले निर्णय ने उनको एक विजयी योद्धा बना दिया। सेना के मनोबल से लेकर भारत की सुरक्षा से संबंधित पहलुओं पर जिस बेबाकी के साथ पर्रिकर साहब ने काम किया है, उसको भारत की जनता ने देखा और सराहा भी है।

गोवावासी पर्रिकर के मुख्यमंत्री बनने के पीछे की राजनीति और कूटनीति को समझने में गोवा की जनता बहुत अधिक रुचि नहीं रखती है। हां यह अवश्य है कि केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी और स्वयं मनोहर पर्रिकर जी के निर्णय के राजनीतिक समीकरणों के विश्लेषण के लिए राजनीतिक विश्लेषकों, विचारकों, बुद्धिजीवियों और आलोचकों को एक गहरा विषय मिल गया है।

यूँ भी पर्रिकर साहब सादगी के प्रतिबिम्ब माने जाते हैं और वे हैं भी क्योंकि रक्षा मंत्री रहते हुए गोवा आने पर वे गोवावासियों से उतनी ही शालीनता और सहजता से मिलते रहे हैं। निःसंदेह गोवा ने भारत को एक सशक्त रक्षा मंत्री दिया था, इसलिए उनकी वापसी पर गोवावासियों का घोड़ेमोड़नी नृत्य करना तो बनता ही है। यहां की जनता वो कर भी रही है।

पर्रिकर के जाने से गोवा कुछ अधूरा सा लगता था। हांलाकि इस सबके बावजूद भी उन्होंने गोवा को हर सम्भव समय दिया था। लेकिन गोवावासी पर्रिकर को लेकर बहुत पजेसिव किस्म के हैं। ऐसे सादगी से भरे करिश्माई व्यक्तित्व इस समय के राजनैतिक माहौल में बिरले ही देखने को मिलते हैं। अपने प्रदेश और अपनी पार्टी के लिए निःस्वार्थ और सहज ही देश के इतने गरिमामय पद को त्याग देना पर्रिकर जैसा व्यक्तित्व ही कर सकता है।

गोवा में बन रहे फ्लाइओवर और हाइवे व नए हवाईअड्डे के काम इस समय किसी भी नई परिवर्तित सरकार को लेकर कुछ आशंकित से थे। लेकिन पर्रिकर के नाम की घोषणा से मानो ये सभी काम और योजनाएं अनवरत चलते रहने की प्रसन्नता से भर गए हैं। गोवा बहुत ही प्रसन्न है क्योंकि वो फिर मनोहरमय होने जा रहा है।

(लेखिका कवि और टिप्पणीकार हैं। वास्को-द-गामा, गोवा में रहती हैं।)

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First Published on March 14, 2017 3:38 pm

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