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सहारा-बिरला डायरी पर नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने से पहले राहुल गांधी शीला दीक्षित पर जवाब देते तो बेहतर होता?

कांग्रेस द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी पर घूस लेने के आरोप लगाने के लिए जारी की गई लिस्ट के मुताबिक दिल्ली की तत्कालीन सीएम शीला को 23 सितंबर 2013 को एक करोड़ रुपये दिए गए थे।
Author December 26, 2016 16:50 pm
(बाएं से दाएं) कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस के नेता शीला दीक्षित, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने यह कहकर हंगामा मचा दिया था कि उनके पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में ऐसी “निजी जानकारी” है जिससे “भूचाल” आ जाएगा लेकिन उनका यह बयान बस जुमला ही साबित हुआ और सोशल मीडिया पर कुछ लोग उनका मजाक उड़ाने लगे। अगर आप सोच रहे हैं कि राहुल ने जनता से वादा करके पीएम मोदी के बारे में “निजी जानकारी” ने देकर खुद उपहास का पात्र बना लिया तो आप गलत सोच रहे हैं। राहुल के संग ज्यादा बुरा तब हुआ जब कांग्रेस पार्टी ने पीएम मोदी के बारे में ये तथाकथित “निजी जानकारी” सार्वजनिक की। खोदा पहाड़ निकली चुहिया कि तर्ज पर कांग्रेस ने पीएम मोदी पर गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के दौरान सहारा और बिरला कंपनियों से रिश्वत लेने का आरोप लगाया। ये आरोप दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण काफी पहले लगा दिया था।

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते हुए अपने ट्विटर अकाउंट से 24 दिसंबर 2016 को एक लिस्ट शेयर की। लेकिन इस लिस्ट को शेयर करने के साथ कांग्रेस ने कल्हाड़ी पर पैर मारने के बजाय अपना पैर ही कुल्हाड़ी पर मार दिया। जिस लिस्ट के दम पर कांग्रेस ने पीएम मोदी पर गुजरात के सीएम रहने के दौरान घूस लेने के आरोप लगाया उस लिस्ट में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का भी नाम है। कांग्रेस ने जो लिस्ट शेयर की है उसमें शीला दीक्षित के नाम के आगे भी एक करोड़ रुपये लिखा हुआ था। इस लिस्ट के मुताबिक दिल्ली की तत्कालीन सीएम शीला को 23 सितंबर 2013 को एक करोड़ रुपये दिए गए थे।

राहुल और कांग्रेस की और भी किरकिरी हुई जब उम्मीद के अनुरूप शीला दीक्षित ने  कह दिया कि  “मैंने लिस्ट देखी नहीं है ऐसे में उसके बारे में कुछ नहीं कह सकती, लेकिन यह सब बातें अफवाहों पर आधारित हैं।” ऐसे में सवाल ये है कि अगर ये सब बातें अफवाहों पर आधारित हैं तो क्या कांग्रेस और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी “अफवाहों” के आधार पर “भूचाल” लाना चाहते थे? और अगर ये अफवाह नहीं है तो कांग्रेस और राहुल की मुश्किल और बढ़ जाती है कि क्या कांग्रेस खुद एक “रिश्वत लेने की आरोपी” नेता को तीन बार दिल्ली का सीएम बनाने के बाद यूपी का सीएम बनाना चाहती है?

अगर राहुल नहीं चाहते कि जनता ये सोचे कि उनके मुंह में राम, बगल में छुरी है तो उन्हें पहले सहारा-बिरला डायरी में आए शीला दीक्षित के नाम पर जनता को जवाब देना चाहिए। टाइम मैगजीन ने डोनाल्ड ट्रंप को साल 2016 का ‘पर्सन ऑफ दी ईयर’ चुनते समय इसकी एक वजह ये भी  बताई थी कि “उन्होंने दिखाया है कि कोई भी सच उतना ही शक्तिशाली होता जितना उसे बोलने वाली की विश्वसनीयता होती है।” तो राहुल गांधी को “सच” बोलने से पहले उसे बोलने की विश्वसनीयता हासिल करनी चाहिए। और ये विश्वसनीयता अपने प्रतिद्वंद्वी पार्टी पर आरोप लगाकर नहीं बल्कि अपने गिरेबान में झांककर ही हासिल हो सकती है।

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  1. A
    Abhishek
    Dec 26, 2016 at 4:05 pm
    you r right
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग