June 29, 2017

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भाजपा का पहला आम चुनाव, हार गए थे पार्टी अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी, तब हारने वाले कई आज हैं नरेंद्र मोदी कैबिनेट में मंत्री

1984 के लोक सभा चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी मध्य प्रदेश के ग्वालियर से चुनाव लड़े लेकिन कांग्रेस के माधवराव सिंधिया से हार गए।

लालकृष्ण आडवाणी (बाएं) और अटल बिहारी वाजपेयी (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

भारतीय जनता पार्टी की स्थापना छह अप्रैल 1980 को हुई थी। पार्टी ने पहला लोक सभा चुनाव 1984 में कमल के फूल चुनाव चिह्न के साथ लड़ा था। अपने पहले आम चुनाव में पार्टी ने महज दो सीटें जीती थीं। एक आंध्र प्रदेश में और दूसरी गुजरात में। इस समय केंद्र के अलावा 17 राज्यों में भाजपा या उसके गठबंधन की सरकार है। भाजपा के पहले चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गज चुनाव हार गए थे। उस चुनाव में हारने वाले कई नेता आज नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री हैं। वहीं जीतने वाले दोनों सांसद कमोबेश गुमनाम हो चुके हैं।

भाजपा की जन्म की कहानी 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना के साथ शुरू होती है। जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे। 1975 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा इमरजेंसी लगाए जाने के बाद कई विपक्षी दल जनता पार्टी के झंडे तले एकजुट हुए। जनसंघ का भी जनता पार्टी में विलय हो गया। 1977 के आम चुनाव में इंदिरा गांधी को जनता पार्टी ने सत्ता से बाहर कर दिया। लेकिन जनता पार्टी की एका ज्यादा दिन नहीं चली। 1980 में जनसंघ का धड़ा जनता पार्टी से अलग हो गया। छह अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी की नींव पड़ी। अटल बिहारी वाजपेयी इसके पहले अध्यक्ष बने। 1984 में भाजपा अटल के नेतृत्व में अपना पहला आम चुनाव लड़ी।

भाजपा ने देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 224 प्रत्याशी खड़े किए थे। इनमें से केवल दो प्रत्याशियों को जीत मिली थी। देश भर की 50 से ज्यादा सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार दूसरे या तीसरे स्थान पर रहे थे। 108 सीटों पर पार्टी की जमानत जब्त हो गयी थी। भाजपा को कुल मतदान के 7.74 प्रतिशत मत मिले थे। हालांकि अगर बात केवल उन सीटों की करें जहां भाजपा ने उम्मीदवार उतारे थे तो उसे कुल मतदान के 19.16 प्रतिशत वोट मिले थे।

आंध्र प्रदेश के हनमकोंडा सीट से भाजपा के सीजे रेड्डी ने 263762 वोट पाकर जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के पीवी नरिसिम्हा राव को हराया था जिन्हें 209564 वोट मिले थे। नरसिम्हा राव आगे चलकर देश के प्रधानमंत्री बने। गुजरात की मेहसाणा सीट से भाजपा के एके पटेल ने कांग्रेस के रायंका सागरभाई कल्याणभाई को हराया था। पटेल को 287555 वोट मिले थे जबकि कल्याणभाई को 243659 वोट मिले थे। आज भाजपा में इन दोनों नेताओं का नामलेवा कोई नहीं।

भाजपा ने आंध्र प्रदेश में दो प्रत्याशी उतारे थे जिनमें से एक रेड्डी को जीत मिली थी। वहीं गुजरात में पार्टी ने 11 प्रत्याशी उतारे थे जिनमें से केवल कल्याणभाई को जीत मिली थी। पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 50, मध्य प्रदेश में 40, बिहार में 32, राजस्थान में 24, महाराष्ट्र में 20 उम्मीदवार उतारे थे लेकिन इन सभी राज्यों में उसका एक भी प्रत्याशी नहीं जीत सका। आज इन सभी बड़े राज्यों में भाजपा की सरकार है।

अटल बिहारी वाजपेयी मध्य प्रदेश के ग्वालियर से चुनाव लड़े लेकिन कांग्रेस के माधवराव सिंधिया से हार गए। सिंधिया को 30,7735 वोट मिले थे जबकि अटल को 132141 वोट। मध्य प्रदेश की खजुराहो सीट से उमा भारती दूसरे स्थान पर रही थीं। उन्हें कांग्रेस की चतुर्वेदी विद्यावती ने हराया था। विद्यावती को कुल 195820 वोट मिले थे जबकि भारती को 144994 वोट। उमा भारती इस समय नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री हैं।

भाजपा के संतोष गंगवार बरेली से दूसरे स्थान पर रहे थे। उन्हें कांग्रेस की आबिदा अहमद ने हराया था। आबिदा को 156904 वोट मिले थे जबकि गंगवार को 100996 वोट। गंगवार इस समय नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री हैं। राजनाथ सिंह यूपी के मिर्जापुर सीट से उम्मीदवार थे और तीसरे स्थान पर रहे थे। राजनाथ सिंह अभी देश के गृह मंत्री हैं। भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी अल्मोड़ा से चुनाव लड़े थे लेकिन कांग्रेस के हरिश चंद्र सिंह से हार गये थे। सिंह को 185006 वोट मिले थे जबकि जोशी को 44674 वोट। जोशी फिलहाल भाजपा के मार्गदर्शक मंडल में हैं।

बॉम्बे उत्तर पश्चिम से भाजपा के टिकट पर मशहूर वकील राम जेठमलानी उम्मीदवार थे लेकिन उन्हें कांग्रेस के उम्मीदवार सुनील दत्त से हार मिली। दत्त को 308989 वोट मिले थे जबकि जेठमलानी को 154349 वोट। बॉम्बे उत्तर पूर्व से पार्टी के प्रमोद महाजन दूसरे स्थान पर रहे थे। उन्हें कांग्रेस के गुरुदास कामत ने हराया था जिन्हें 273847 वोट मिले थे। महाजन को 177573 वोट मिले थे।

दक्षिणी दिल्ली से विजय कुमार मल्होत्रा दूसरे स्थान पर रहे थे। मदन लाल खुराना दिल्ली सदर से दूसरे स्थान पर रहे थे। उन्हें जगदीश टाइटलर ने हराया था। आंध्र प्रदेश की सिकंदराबाद सीट से बंडारू दत्तात्रेय बहुत मामूली अंतर से हारे थे। इस सीट से कांग्रेस के टी अंजैया 2,46,309 वोट पाकर जीते थे। वहीं दत्तात्रेय को 237835 वोट मिले थे। भाजपा नेता लालजी टंडन लखनऊ सीट से तीसरे स्थान पर रहे थे।

एमपी की विदिशा सीट से राघवजी दूसरे स्थान पर था। इस सीट पर कांग्रेस के प्रतापभानु कृष्ण गोपाल 205437 वोटों के साथ विजयी रहे थे। राघवजी को 195884 वोट मिले थे। मध्य प्रदेश की उज्जैन सीट से भाजपा सत्य नारायण जाटिया दूसरे स्थान पर रहे थे। बाद में वो प्रदेश के बड़े नेता बने। अपने पहले ही चुनाव में भाजपा ने मुस्लिम उम्मीदवार भी उतारे थे।  खंडवा सीट से भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार आरिफ बेग करामत बेग दूसरे स्थान पर रहे थे। उन्हें 152093 वोट मिले थे। खंडवा सीट से कांग्रेस के कालीचरण रामरतन विजयी रहे थे जिन्हें 239563 वोट मिले थे।

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First Published on April 6, 2017 6:02 pm

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