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बाखबरः दाने-दाने पर मुहर

कुछ ही दिनों में यूपी बहुत आगे निकल गया है। इन दिनों जो यूपी करता है बाकी राज्य उसकी नकल करते हैं! ‘बंदी’ का दौर चला तो दनादन मांसबंदी, रोमियोबंदी, ये बंदी, वो बंदी होता रहा! खबरों में पिछड़ रहा हरियाणा गर्व से बोला कि हमारे पास तो ‘आपरेशन दुर्गा’ है, जो एंटी रोमियो स्क्वॉड से पुराना है!
Author April 16, 2017 02:40 am
हरियाणा का दुर्गा ऑपरेशन

साढ़े नौ का वक्त। एनडीटीवी में विक्रम चंद्रा ‘दाई राज्य का उभार’ (राइज आफ नैनी स्टेट) पर चर्चा कराने वाले हैं। भूमिका के बतौर वे दाई राज्य की चिंताओं की फेहरिश्त अपनी चिंता के साथ एक-एक वाक्य में इस तरह बताते चलते हैं: क्या पहनना है?… किससे प्यार करना है?… आप क्या खाते हैं?… आप क्या पीते हैं?… आप कितना खर्च करते हैं?
विक्रम जी! आभारी रहें आप कि कोई है जो आपकी फिक्र करता है, आपको डूज ऐंड डोंट्स सिखाता है, वरना कलजुग में चरित्र के बिगड़ने में कितनी देर लगती है?
अगर सप्ताह में तीन-चार प्रतिबंधन संबंधी और दो-तीन चरित्र रक्षा संबंधी खबरें नहीं आतीं तो मन उदास हो जाता है। वह तो भला हो यूपी का और बकिया जगहों का भी कि वीडियो समेत ऐसी खबर बनाते हैं कि तबियत तर हो जाती है।

एक युवा खड़ा है। उसके बाजू में कोई युवती भी खड़ी दिखती है। कोई कड़क आवाज में पूछ रहा है: तेरा नाम क्या है? जवाब: असीम। बाप का नाम: राजेश। लड़की का नाम: विनोद! तेरा नाम वसीम तो बाप का नाम राजेश कैसे हो सकता है?
यह मल्टीवीडियो का जमाना है। दूसरे चैनल पर दूसरा वीडियो जनता का है, जिसमें एक चरित्र रक्षक भी है। रिपोर्टर जब-जब पूछती है, तब-तब उसे मुहल्ले की महिलाओं से एकदम दो-टूक जवाब मिलता है: मुहल्ले में गंदगी है तो हमारे बच्चे भी तो बिगड़ेंगे… लड़के-लड़की बदल-बदल के आते थे। इस गंदगी को कैसे रखें। वाहिनी नायक बोले कि सूचना मिली कि विभिन्न धर्म के हंै, पड़ोसियों ने सूचना दी। लड़के ने कहा: धर्म परिवर्तन कराने वाला हूं।…
युवा वाहिनी वाले ने सत्य कहा: रोड पर गंदगी करना बिल्कुल गलत है। संस्कृति खराब होती है। जो अंदरूनी काम होता है अंदर करें, बाहर नहीं।… संस्कृति की रक्षा की ये मामूली-सी बातें जो न समझे, बताइए उसका क्या करें? एंकरों को इतनी-सी बात समझ में नहीं आती! ये लटयन वाले एक दिन देश नहीं, तो अपनी लुटिया डुबो के रहेंगे।
न्यूज एक्स पर खबर चली कि महाराष्ट्र के स्कूल की कथित सीबीएसई की किताब से वहां की क्लास में मिस यूनीवर्स बनने का फार्मूला लिखा पढ़ाया जाता है!
गजब सामने था: एक तिहाई टीवी स्क्रीन में स्कूल की छात्राएं गंभीरता से पढ़ती नजर आती थीं, एक तिहाई में एंकर/ रिपोर्टर बोलते रहते थे, एक तिहाई में मिस यूनीवर्स के शो की झलकियां आती रहती थीं, जिनमें छत्तीस-चौबीस-छत्तीस वाली सुंदरियां बिकिनी सज्जित अकड़ के मारे खुश, बिल्ली चाल से चलती नजर आती थीं!
एंकर-रिपोर्टर आलोचना करते रहे कि हाय हाय छात्राओं को क्लास में ये छत्तीस-चौबीस-छत्तीस क्यों पढ़ाया जा रहा है, चरित्र का नाश कर रहे हैं। इधर बिकिनी सज्जित सुदरियां छत्तीस-चौबीस-छत्तीस का जलवा दिखाती दिखती थीं! चर्चा कुछ इसी करवट बैठी कि आलोचना की जगह मिस यूनीवर्स बाजी मारती लगीं!
एक दिन रामविलासजी ने लाइन प्रस्तावित की: होटलों, रेस्तराओं में बहुत मात्रा में भोजन बिगड़ता है, मोदीजी ने भी चेताया था कि बिगड़ता है, सो उसे रोकना है! आइडिया पिटनशील था सो पिटा! जिन चैनलों का एक बड़ा टाइम पांच सितारा होटलों, रेस्त्राओं के व्यंजनों को कवर करने में जाता हो, उन्हीं के पेट पर ऐसी लात? बताइए आप क्या नाप-तोल के रोटी-दाल-सब्जी देंगे कि दाल के एक दाने की कीमत इतनी तो इतने की कितनी?
क्या पेट पर भी दरोगाई करेंगे महाराज जी! पहले ‘जितना जरूरी उतना लें’ की आदत डलवाइए, फिर बिगड़ते भोजन को बचाने का इंतजाम कीजिए! पेट को तराजू से न तोलिए! दाने दाने पर मोहर न लगाइए सरजी!
इतने में असम से खबर दहाड़ी: जो लोग ‘हम दो हमारे दो’ की लाइन पर चलेंगे उन्हीं को सरकारी नौकरी मिलेगी आदि!
कुछ ही दिनों में यूपी बहुत आगे निकल गया है। इन दिनों जो यूपी करता है बाकी राज्य उसकी नकल करते हैं! ‘बंदी’ का दौर चला तो दनादन मांसबंदी, रोमियोबंदी, ये बंदी, वो बंदी होता रहा! खबरों में पिछड़ रहा हरियाणा गर्व से बोला कि हमारे पास तो ‘आपरेशन दुर्गा’ है, जो एंटी रोमियो स्क्वॉड से पुराना है!
लीजिए, खबर आजकल पेट्रोल पंप भी बना सकते हैं। कह दिए हैं कि पांच बड़े शहरों में पेट्रोल के दाम हर दिन तय हुआ करेंगे? अरे महराज! हर दिन क्यों, हर घंटे और हर पल क्यों नहीं? आपका पेट्रोल तो डॉलर का भी बाप निकला! उस पर पूरे दिन सट्टा बाजार में दाम लगता रहता है, लेकिन शाम को वह भी बंद हो जाता है, लेकिन आपका तो शाम को भी बंद नहीं होने का! और चलायलेव बेटाजी कारें!
मारे गए गुलफाम दिल्ली के दंगल में, यानी बेचारे तरुण विजय! अंग्रेजी में जवाब देने की जगह ‘हम काले हैं तो क्या हुआ दिल वाले हैं’ वाला गाना गा देते तो इस कदर माफी न मांगनी पड़ती!
एक खबर आई और हर चैनल पर नीचे छा गई कि एक मंत्रीजी ने कहा है कि फिल्में छेड़ना सिखाती हैं। ये कोई नई बात तो नहीं थी, लेकिन किसी फरमाबरदार की तरह एक अंग्रेजी चैनल इस विषय पर भी चर्चा छेड़ बैठा कि क्या मंत्री का ऐसा कहना ठीक है। जवाब में एक फिल्म वाला बोला कि मंत्रीजी का कहना ठीक नहीं हैं, हम तो एंटरटेन करते हैं।… लेकिन चर्चा जमी नहीं।
एक दिन संभल के बीजेपी विधायक ने जोश में आकर कह दिया: रिश्वत लेने वाले अफसर को मुर्गा बनाया जाएगा। जो पूरा राशन नहीं दे, उसे सौ पचास लोग पकड़ो और पिटाई कर दो! इसके बाद क्या हुआ, खबर नहीं।
कश्मीर के अलगाववादी युवाओं को सीआरपीएफ के जवान पर लात-घूंसा बरसाते देख गौतम गंभीर को गुस्सा आया और कह दिए: जवान को मारे एक-एक थप्पड के लिए सौ जिहादियों को मार डालो! और यह भी सच है कि इतने उकसावे पर भी सीआरपीएफ के उस जवान ने बहुत जब्त से काम लिया!

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