December 04, 2016

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इन पांच वजहों से मोदी जी को वित्‍त मंत्रालय में जरूरत है स्‍मार्ट मंत्री और अफसरों की

पीएम नरेंद्र मोदी ने जब 500 और 1000 के नोटों को बंद करने की घोषणा की तो उसका ज्यादातर लोगों ने स्वागत किया लेकिन उसके बाद सामने आई बदइंतजामी की वजह से सरकार को काफी आलोचना झेलनी पड़ रही है।

एक बैठक के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी व वित्‍तमंत्री अरुण जेटली। (Source: PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 के नोटों को बंद करने की घोषणा की। पीएम मोदी ने रात आठ बजे राष्ट्र के नाम संबोधन में सरकार के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि नौ नवंबर को देश के सभी बैंक और एटीएम बंद रहेंगे। 10 नवंबर से सभी बैंकों और डाकघरों में लोग अपने पुराने नोट बदल सकेंगे। पीएम मोदी ने बताया कि 11 नवंबर से देश के सभी एटीएम भी काम करने लगेंगे। घोषणा के अनुसार 24 नवंबर तक एटीएम से एक कार्ड से एक दिन में दो हजार रुपये निकाले जा सकेंगे। वहीं बैंक से चेक से 10 हजार रुपये एक बार में और एक हफ्ते में 20 हजार रुपये तक निकाले जा सकते हैं। सरकार ने कहा कि सभी बैंकों और डाकघरों में प्रति दिन हर आदमी पहचान पत्र दिखाकर चार हजार रुपये तक के पुराने नोट बदल सकता है। जिस दिन फैसले की घोषणा हुई तो ज्यादातर आम नागरिक इसका समर्थन करते दिखे। सभी को लगा कि पीएम मोदी ने कालाधन जमा कर रखने वालों के खिलाफ साहसिक कदम उठाया है। लेकिन 10 नवंबर से जनता को जिस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा उसके बाद बहुत सारे लोग पीएम मोदी के फैसले की आलोचना करने लगे। आइए देखते हैं किस तरह इस फैसले को लागू करने में वित्त मंत्रालय पांच मोर्चों पर विफल रहा।

1- बाजार में नकद लेन-देन के लिए पैसे की कमी– भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार  31 मार्च 2016 तक भारत में 16.42 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट बाजार में थे जिसमें से करीब 14.18 लाख करोड़ रुपये 500 और 1000 के नोटों के रूप में थे। यानी आरबीआई द्वारा जारी कुल नोटों में करीब 85 प्रतिशत 500 और 1000 के नोटों के रूप में था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार नोटबंदी की तैयारी छह महीने से कर रही थी।  ऐसे में वित्त मंत्रालय के अफसरों को यह बात समझनी चाहिए थी कि अगर बाजार से 85 प्रतिशत नकद राशि बाहर हो जाएगी तो रोजमर्रा के लेन-देन के लिए पैसे की भारी किल्लत हो जाएगी। इस भावी किल्लत को पूरा करने के लिए आरबीआई 100 और 50 रुपये के नोटों की अधिक मात्रा पहले से बाजार में उतार सकता था जिससे जनता पर तुरंत नकद की कमी का इतना ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार देश में 31 मार्च तक मौजूद कुल 9026 करोड़ नोटों में करीब 24 प्रतिशत नोट (करीब 2203 करोड़ रुपये) ही प्रचलन में थे। यानी आरबीआई ने 100 और 50 के नोटों की मात्रा बाजार में बढ़ाई होती तो नगद की कमी को एक हद तक पूरा किया जा सकता था।

2- बैंकों में पर्याप्त धनराशि का उपलब्ध न होना- सरकार ने घोषणा की कि 10 नवंबर से 24 नवंबर तक सभी बैंकों में हर रोज 4000 रुपये तक के पुराने नोट बदले जा सकते हैं। वहीं 10 हजार रुपये चेक के माध्यम से निकाले जा सकते हैं। नौ नवंबर की बंदी के बाद देश के ज्यादातर बैंकों के सामने लम्बी कतार देखी गई लेकिन लोगों को उस समय बहुत ज्यादा निराशा हुई जब अधिकतर बैंकों में कुछ ही घंटों में नगद पैसे खत्म हो गए। सरकार ने घोषणा की कि सभी बैंक शनिवार और रविवार को भी काम करेंगे। सभी बैंक रोजमर्रा से ज्यादा देर तक खुले रहेंगे। लेकिन सरकार बैंकों में जनता की जरूरत के हिसाब से पैसों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं करा सकी। ज्यादातर बैंक 10 नवंबर को ग्राहकों को 100-100 या उससे कम मूल्य के नोट देते रहे। बैंकों में नए दो हजार के नोट बहुत पहुंचे थे। जहां ये नोट पहुंचे थे वहां भी ये पलक झपकते ही खत्म हो गए।

3- एटीएम में नए नोटों की उपलब्धता सुनिश्चित न करना- वित्त मंत्रालय की योजना के अनुसार 10 नवंबर से सभी एटीएम से हर कार्ड से दो हजार रुपये निकाल जा सकेंगे। जब 10 नवंबर को सारे एटीएम खुले तो उनके सामने भी बैंकों ही की तरह लम्बी कतार लग गई। लेकिन उनका हाल भी बैंकों जैसा ही हुआ। देश के सारे एटीएम में केवल 100-100 के नोट उपलब्ध थे। नतीजा ये हुआ कि सभी एटीएम कुछ ही घंटों में खाली हो गए और लोगों की हताशा बढ़ गई। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मीडिया को बताया कि सभी एटीएम के सामान्य तरीके से काम करने में तीन हफ्ते का वक्त लगेगा। एटीएम में 2000 और पांच सौ के नए नोट उपलब्ध कराने के लिए उनका रीकैलिब्रेशन (बदलाव) करना होगा।  मंत्रालय समय रहते पर्याप्त एटीएम का रीकैलिब्रेशन करवाने में विफल रहा, वरना आम लोगों को इतनी मुसीबत नहीं झेलनी पड़ती।

4- 2000 का नोट पहले उतारा 500 का बाद में- बैंकों से 10 नवंबर को जनता को 2000 के नए नोट मिलने शुरू हो गए। गिने-चुने जगहों पर 500 नोटों की उपलब्धता की खबर आई। जिन लोगों को 2000 के नए नोट मिले भी उनकी मुसीबत कम नहीं हुई क्योंकि बाजार में बहुत कम ही दुकानदार 2000 के नोट के बदले 50-100-200 रुपये का सामान देने को तैयार हो रहे थे। जिन लोगों के पास 100 रुपये के नोट थे वो हालात को देखते हुए उसे खर्च करने में बहुत ज्यादा किफायत बरत रहे थे। बाजार में पहले से ही नगद पैसे कम थे ऊपर से इतना बड़े नोट के आने से लोगों के सामने छुट्टे पैसों का संकट बढ़ गया। देश के कई शहरों में लोगों ने शिकायत की कि उन्हें दो हजार रुपये का नोट तो मिल गया लेकिन उसे कोई ले नहीं रहा है। अगर सरकार ने दो हजार रुपये से पहले 500 के नए नोट बाजार में जारी किए होते तो लोगों को इस संकट से बचाया जा सकता था। सरकार की आँख थोड़ी देर से खुली और रविवार को बड़ी संख्या में 500 रुपये के नए नोट जारी किए गए। अगर वित्त मंत्रालय के अफसर आम आदमी की नजर से एक बार इस मसले को देखते तो इस मुश्किल से बचा जा सकता था।

5- पैसे बदलने-निकालने की अतिरिक्त व्यवस्था न करना- वित्त मंत्रालय को अच्छी तरह पता था कि नोटबंदी के बाद बाजार में नोटों की मांग कितनी तेजी से बढ़ेगी क्योंकि वो 85 प्रतिशत नोटों को बंद करने जा रहा था। इसके बावजूद वित्त मंत्रालय ने काम के घंटे और छुट्टी के दिन कामकाज की घोषणा करके अपनी तरफ कोरम पूरा कर लिया। मंत्रालय ये नहीं समझ सका कि बैंक, एटीएम और डाकघरों की मौजूदा संख्या सवा सौ करोड़ आबादी वाले देश में नोट बदलने या नगद देने के लिए काफी नहीं हैं। मंत्रालय ने पैसे बदलने या निकालने के लिए किसी तरह की अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की। इस मामले में भी मंत्रालय की नींद देर से खुली और उसने सोमवार (14 नवंबर) को मौजूदा एटीएम के अलावा माइक्रो-एटीएम खोलने की घोषणा की।

हमारे देश में कल्याणकारी योजनाओं की कभी कमी नहीं रही, कमी रही है तो उन्हें लागू करने में।  गोपाल सिंह नेपाली की प्रसिद्ध पंक्तियाँ हैं, “अर्थियाँ चली गईं, योजना गई नहीं।” बहुत सारे लोग मान रहे हैं कि पीएम मोदी का ये फैसला अच्छी नीयत से लिया गया है। अगर इसे उचित तैयारी के साथ लागू किया जाता तो जनता को उन दिक्कतों से नहीं गुजरना होता जिनसे वो पिछले छह दिनों से गुजर रही है। ऐसे में ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि पीएम मोदी को ज्यादा स्मार्ट वित्त मंत्री और अफसरों की जरूरत है।

वीडियोः पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो गंगा में पैसे बहा रहे हैं उनके पाप नहीं धुलने वाले-

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First Published on November 14, 2016 4:00 pm

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