June 26, 2017

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तवलीन सिंह के सभी पोस्ट

तवलीन सिंह का कॉलम वक्त की नब्ज़ः नौकरशाही पर नकेल की जरूरत

प्रधानमंत्री को भूलना नहीं चाहिए एक क्षण के लिए भी कि उनको जनादेश पूरी बहुमत के साथ मिला था परिवर्तन लाने के नाम पर।...

तवलीन सिंह का कॉलम वक़्त की नब्ज़ : ध्यान बंटाने का मौका

रोहित वेमुला के मामले में संवेदनशीलता मानव संसाधन विकास मंत्री ने भी नहीं दिखाई, जब दो विद्यार्थी गुटों के झगड़ों के बीच आने का...

तवलीन सिंह का कॉलम वक्त़ की नब्जः अभी बहुत कुछ करना है

यह साल नरेंद्र मोदी की अग्निपरीक्षा का होगा। इसलिए कि अब वह वक्त निकल चुका है, जब गांधी परिवार के पांच दशक लंबे राज...

तवलीन सिंह का कॉलम वक्‍त की नब्‍ज: यह अघोषित युद्ध है

पठानकोट जैसे हमले होते रहेंगे भारत में कहीं न कहीं, जब तक हम स्वीकार नहीं करते कि ऐसे हमले एक अघोषित युद्ध का हिस्सा...

तवलीन सिंह का कॉलम वक्‍त की नब्‍ज: नए साल में जरूरी है नई चाल

एक नए साल की शुरुआत कैसे की जा सकती है, बिना गुजरे साल के गिरेबान में झांके। झांकने की कोशिश जब की मैंने तो...

तवलीन सिंह का कॉलम वक़्त की नब्ज़ : अब खामोशी टूटनी चाहिए

अखलाक की बेटी शाइस्ता ने पंद्रह लोगों की शिनाख्त भी की है, जिनमें से एक-दो लड़के भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं के रिश्तेदार...

तवलीन सिंह का कॉलम वक़्त की नब्ज़ : पहले विकास का पहिया चलाइए

पिछले कुछ महीनों से ऐसा लगने लगा है जैसे हर हफ्ते किसी न किसी बहाने किसी न किसी मंत्री या मुख्यमंत्री के इस्तीफा देने...

नेशनल हेराल्‍ड केस पर तवलीन सिंह का कॉलम: हकीकत पर हंगामे का परदा

हम जानते हैं कि सोनिया गांधी इंदिरा गांधी की बहू हैं। हम यह भी जानते हैं कि न होतीं अगर इंदिरा गांधी की बहू,...

तवलीन सिंह का कॉलम: कहानी किसी की, सूत्रधार कोई और

पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री जब राज्यसभा में असहनशीलता पर बहस का जवाब दे रहे थे, तब राहुल गांधी ने लोकसभा में उनको खूब फटकार लगाई।

तवलीन सिंह का कॉलम वक्‍त की नब्‍ज: असहिष्णुता के इलाके

सारी दुनिया में सहमति बन चुकी है इन दिनों कि विश्व और इस विश्व की संस्कृति को सबसे बड़ा खतरा है वहाबी इस्लाम से।...

तवलीन सिंह का कॉलम वक़्त की नब्ज़ : जिहाद बनाम जकड़बंदी

जब से पेरिस में जिहादी हमले हुए हैं, दो झूठ अपने भारत देश में इतनी बार बोले गए हैं कि सुनते-सुनते मेरे कान पक...

तवलीन सिंह का कॉलम वक़्त की नब्ज़ : यह कैसा सेक्युलरवाद?

भारतीय सेक्युलरिज्म के उसूलों के तहत कुछ बातें ऐसी हैं, जिनको हम कह नहीं सकते, क्योंकि कहते ही सेक्युलर न होने का दाग लग...

बिहार चुनाव पर तवलीन सिंह का कॉलम ‘वक़्त की नब्ज़’ : चुनावी झंझावात में

जिस चुनाव के परिणाम आज आने वाले हैं उसको लेकर इतना हंगामा हुआ है बेमतलब बयानों की वजह से, बेतुकी बातों की वजह से...

वक़्त की नब्ज़ : इस विरोध का गणित

प्रधानमंत्री को खुल कर हमारे बुद्धिजीवी फासीवादी कहते हैं रोज टीवी पर, मोहम्मद अखलाक की हत्या का दोष तक उनके सिर लगाते हैं, और...

वक़्त की नब्ज़ : आधुनिकता बनाम बर्बरता

दादरी के बिसारा गांव में मोहम्मद अखलाक की हत्या के लिए जो माहौल बनाया गया, उसमें इन सबका हाथ था। शुरुआत महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री...

वक़्त की नब्ज़ : विकास में रोड़ा अफसरशाही

पिछले साल जब मोदी पहली बार अमेरिका गए प्रधानमंत्री बनने के बाद तो मैं खुद न्यूयार्क में थी। मेडिसन स्क्वायर में जो जुनून और...

वक़्त की नब्ज़ : नाहक हाय-तौबा

नरेंद्र मोदी जब तक प्रधानमंत्री नहीं बने थे उनको वीजा नहीं मिला था अमेरिका जाने के लिए। इस तर्क पर कि गुजरात के 2002...

वक़्त की नब्ज़ : तानों की परवाह क्यों

ऐसा लगने लगा है कि गांधी परिवार के ताने कुछ ज्यादा ही सताने लग गए हैं प्रधानमंत्री को। ऐसा न होता तो कभी सोनिया...

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