March 23, 2017

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तवलीन सिंह के सभी पोस्ट

वक़्त की नब्ज़ : आधुनिकता बनाम बर्बरता

दादरी के बिसारा गांव में मोहम्मद अखलाक की हत्या के लिए जो माहौल बनाया गया, उसमें इन सबका हाथ था। शुरुआत महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री...

वक़्त की नब्ज़ : विकास में रोड़ा अफसरशाही

पिछले साल जब मोदी पहली बार अमेरिका गए प्रधानमंत्री बनने के बाद तो मैं खुद न्यूयार्क में थी। मेडिसन स्क्वायर में जो जुनून और...

वक़्त की नब्ज़ : नाहक हाय-तौबा

नरेंद्र मोदी जब तक प्रधानमंत्री नहीं बने थे उनको वीजा नहीं मिला था अमेरिका जाने के लिए। इस तर्क पर कि गुजरात के 2002...

वक़्त की नब्ज़ : तानों की परवाह क्यों

ऐसा लगने लगा है कि गांधी परिवार के ताने कुछ ज्यादा ही सताने लग गए हैं प्रधानमंत्री को। ऐसा न होता तो कभी सोनिया...

वक़्त की नब्ज़ : प्रशासनिक बदलाव की ज़रूरत

क्या नरेंद्र मोदी भूल गए हैं कि उनको पूर्ण बहुमत क्यों दिया था इस देश के मतदाताओं ने? क्या भूल गए हैं कि वे...

वक़्त की नब्ज़ : आरक्षण और बदले इरादे

शुरू में ही स्पष्ट करना चाहूंगी कि न मुझे हार्दिक पटेल की राजनीति पसंद है, न उनके राजनीति करने का तरीका। लेकिन पिछले हफ्ते...

वक़्त की नब्ज़ : विकास की अहमियत

मुझे विश्वास है कि भारत की हर समस्या का समाधान है विकास। सो, जब प्रधानमंत्री ने इस बात को बिहार में बार-बार कहा पिछले...

वक़्त की नब्ज़ : यह विरोध का तरीका नहीं

पंद्रह अगस्त को नरेंद्र मोदी लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को दूसरी बार संबोधित करने वाले हैं, पर अब भी लगता है कि उनका...

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