March 23, 2017

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तवलीन सिंह के सभी पोस्ट

‘वक्त की नब्ज’ कॉलम: ट्रंप की जीत का मतलब

डोनल्ड ट्रंप जबसे चुनाव मैदान में उतरे तभी से अमेरिकी बुद्धिजीवी और राजनीतिक पंडित उनको गंभीरता से न लेकर उनका मजाक उड़ाते रहे।

‘वक्त की नब्ज’ कॉलम: जो जख्म अब उभरे हैं

लड़कियों को शिक्षा देना महापाप माना जाता है, क्योंकि इस किस्म के इस्लाम का बुनियादी उसूल है कि सेक्युलर शिक्षा इस्लाम के रसूल ने...

‘वक्त की नब्ज’ कॉलम में तवलीन सिंह का लेख: बढ़ाएं आर्थिक सुधारों की रफ्तार

मोदी से उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री बन जाने के बाद निवेशक वापस आ जाएंगे उनकी नीतियों में परिवर्तन देख कर।

‘वक्त की नब्ज’ कॉलम में तवलीन सिंह का लेख : संकीर्ण देशभक्ति

भारतीय सभ्यता को अगर पाकिस्तानी दिलों में किसी ने जिंदा रखा है तो हिंदी फिल्मों ने।

व़क्त की नब्ज़ः क्यों चाहिए सबूत

उड़ी के बाद जो ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कराई गई, उसे पूरा समर्थन है इस देश के आम आदमी का, लेकिन जो खास आदमी बैठे हैं...

‘वक्त की नब्ज’ कॉलम में तवलीन सिंह का लेख: बेतुके हंगामे का चलन

राहुलजी की समस्या यह है कि उन्होंने शुरू से स्पष्ट किया है कि उनकी नजरों में भारत को असली खतरा हिंदुत्व से है, आरएसएस...

‘वक्त की नब्ज’ कॉलम में तवलीन सिंह का लेख : एक सार्थक कदम

इस उपमहाद्वीप में अमन-शांति तभी बहाल होगी, जब हम पाकिस्तान की नजरों में साबित कर सकेंगे कि भारत जब चाहे आक्रमण का जवाब...

‘वक्त की नब्ज’ कॉलम में तवलीन सिंह का लेख : नए युद्ध का चेहरा

युद्ध के समय दुश्मन देश के साथ कोई दोस्ती का रिश्ता नहीं हो सकता, सो दूतावास तक बंद किए जाते हैं दुश्मन के।

तवलीन सिंह का कॉलम, वक्त की नब्ज: परिवारवाद की अमरबेल

इस दीमक की पहली झलक तब दिखी जब आपातकाल की आड़ लेकर इंदिरा गांधी ने अपने बेटे संजय गांधी को अपना वारिस बनाया था।...

तवलीन सिंह का कॉलम: जिहाद की फैलती जड़ें

कश्मीर घाटी के राजनेता अच्छी तरह जानते हैं कि कट्टरपंथी इस्लाम की शुरुआत हुई थी कोई तीस वर्ष पहले, जब जमात-ए-इस्लामी के हाथों...

तवलीन सिंह का कॉलम: गरीबी और खोखली योजनाएं

मैं जब भी देहातों में घूमती हूं, अक्सर पूछती हूं इस योजना के बारे में और मालूम होता है कि इसका असली लाभ उन्हीं...

तवलीन सिंह का कॉलम: यह अमन का रास्ता नहीं

कश्मीर घाटी उस समय दशक लंबे हिंसक दौर से गुजर कर निकल रही थी, जिसमें न इंसानियत थी, न जम्हूरियत। रही बात कश्मीरियत की,...

तवलीन सिंह का कॉलम: दो मोर्चों पर सबसे ज्यादा नाकाम रहे नरेंद्र मोदी

रियो में फिर वही हुआ, जो अक्सर होता है भारतवर्ष के साथ ओलंपिक खेलों में। यानी छोटे-छोटे देश हमारे विशाल देश से ज्यादा पदक...

वक्त की नब्जः नई कश्मीर नीति की जरूरत

प्रधानमंत्री ने जब पिछले सप्ताह कहा कि उनकी कश्मीर नीति वही रहेगी, जो पूर्व कांग्रेस सरकारों की रही है दशकों से, तो मुझे यकीन...

तवलीन सिंह का कॉलम: मोदीजी, जाग जाइए! आपने आरएसएस के हवाले कर दिया है अपना जनादेश

प्रधानमंत्री ने सोनिया गांधी की सेहत को लेकर ट्वीट करके चिंता तो व्यक्त की, लेकिन क्या उनको इस बात की चिंता नहीं हुई कि...

वक्त की नब्जः विकास की धुंधलाती उम्मीद, विकास व परिवर्तन अभी भी सपना

इस बार जब प्रधानमंत्री लाल किले से हिसाब देंगे देशवासियों को अपने कार्यकाल का, उपलब्धियां कम ही गिना पाएंगे। विकास और तरक्की हुई है...

वक्त की नब्ज : आजादी की आड़ में

मैं श्रीनगर काफी जाया करती थी उन दिनों, इस वास्ते कि कश्मीर पर किताब लिख रही थी और याद है मुझे कि किस तरह...

वक्त की नब्जः इस हवा का रुख समझना होगा

आइएसआइएस अपनी खिलाफत अब तकरीबन खो बैठा है। जिन इराकी शहरों पर उन्होंने कब्जा करके अपना देश बनाया था, वहां से उनको भगाया जा...

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