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तवलीन सिंह के सभी पोस्ट

वक्त की नब्ज- शिक्षा की खोखली बुनियाद पर

आज हाल यह है कि हमारे बच्चे जब कुछ वर्ष पहले अंतरराष्ट्रीय पीसा स्पर्धा में भाग लेने गए तो इतना बुरा हाल रहा उनका...

वक्त की नब्ज- भुलाने की कोशिश में दर्द बढ़ता गया

इस प्रयास में मैंने खुद जाकर मेरठ-मलियना के दंगे देखे। मुरादाबाद, भागलपुर और मुंबई के दंगों को भी मैंने अपनी आंखों से देखा है...

वक्त की नब्जः भ्रष्टाचार की दीमक

ऐसा होने से न सिर्फ भ्रष्टाचार बढ़ा है, राजनीतिक दल भी कमजोर हो गए हैं, क्योंकि असली राजनेताओं के बदले इनके सदस्य बन...

वक्त की नब्ज- चुनौती भरे दिन

फर्क सिर्फ यह है कि उस साल सब कहते थे कि अटल बिहारी वाजपेयी किसी हाल में नहीं चुनाव हार सकते और इस बार...

वक्त की नब्ज: लोकप्रियता के बावजूद

समाजवादी देशों में- अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं- वे भी इस देश के आम आदमी को नसीब नहीं हुई हैं। थोड़ी बहुत समृद्धि आई...

वक्त की नब्ज: जिहादी आतंक और दोहरी मानसिकता

आज भी केरल और तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में जिहादी इस्लाम के आसार दिखते हैं। आज भी राजस्थान के नागौर जिले में कुछ ऐसे...

वक्त की नब्ज- सिर्फ नसीहत से कुछ नहीं होगा

गोरक्षा के नाम पर हिंसा रोकना मुश्किल होगा अब, क्योंकि आज के ‘नए भारत’ में इस तरह की हिंसा को देशभक्ति माना जाता है।

वक्त की नब्ज- बेकाबू होता कश्मीर

अयूब पंडित की हत्या साबित करती है कि अभी तक जो मोदी सरकार की कश्मीर में रणनीति रही है वह विफल हो गई है।...

वक्त की नब्ज: नए देशभक्त

मैं उन लोगों से माफी मांगती हूं, जिनकी धार्मिक भावनाओं को मैंने गलती से आहत किया उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की नकली तस्वीर ट्वीट...

वक्त की नब्ज-नए भी पुरानी लीक पर

किसानों का आक्रोश अगर बढ़ता दिख रहा है दिन-ब-दिन तो इसलिए कि कृषि नीति हमारी दशकों से गलत रही है। निवेश होना चाहिए था...

वक्त की नब्ज: मंदी के दौर में गोरक्षा

हर हफ्ते सोचती हूं किसी दूसरे विषय पर लिखने का, लेकिन कुछ न कुछ ऐसा हो जाता है कि मजबूर होकर हिंदुत्व पर ही...

वक्त की नब्ज- हकीकत के बजाय हंगामा

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत में हिंदू-मुसलिम दंगे फैल जाएंगे और धीरे-धीरे भाईचारा इस हद तक खत्म हो जाएगा कि भारत...

वक्त की नब्ज- अभी बहुत कुछ करना बाकी है

शहरीकरण और अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा जरूरत है परिवर्तन की, क्योंकि इन क्षेत्रों में परिवर्तन आएगा तो पूरे देश का माहौल बदल जाएगा। इन...

वक्त की नब्ज- समांतर अदालत तो न बिठाइए

पत्रकारों को कोई अधिकार नहीं है किसी को दोषी ठहराने का। अगर रिपब्लिक चैनल के पास सबूत हैं कि पुलिस को सुनंदा पुष्कर की...

वक्त की नब्ज: हिंसा से सिर्फ हिंसा पैदा होगी

एक बार फिर हिंदुत्व के वीर जवानों ने एक बुजुर्ग मुसलमान की हत्या कर डाली पिछले सप्ताह।

वक्त की नब्ज: नरेंद्र मोदी का जादू!

मेरा मानना है कि दोष हमारे तमाम विपक्ष के ‘सेक्युलर’ राजनेताओं का है।

वक्त की नब्ज- घाटी में नई नीति की जरूरत

क्या उनसे भी बातचीत हो सकती है, जो अल्लाह के नाम पर लड़ रहे हैं हमारे ‘काफिर’ मुल्क के खिलाफ? किस तरह? किस आधार...

वक्त की नब्जः पाबंदियों के दौर में

समझ में नहीं आता है कि प्रधानमंत्री मोदी, जो दिन में कई बार ट्वीट करके अपने विचार व्यक्त करते हैं, इन चीजों पर चुप...

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