April 28, 2017

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तवलीन सिंह के सभी पोस्ट

वक्त की नब्ज- घाटी में नई नीति की जरूरत

क्या उनसे भी बातचीत हो सकती है, जो अल्लाह के नाम पर लड़ रहे हैं हमारे ‘काफिर’ मुल्क के खिलाफ? किस तरह? किस आधार...

वक्त की नब्जः पाबंदियों के दौर में

समझ में नहीं आता है कि प्रधानमंत्री मोदी, जो दिन में कई बार ट्वीट करके अपने विचार व्यक्त करते हैं, इन चीजों पर चुप...

वक्त की नब्ज- गोरक्षा के नाम पर

राज्यसभा में मुख्तार अब्बास नकवी ने पहले तो कहा कि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं है जैसा कि मीडिया में प्रचार किया जा...

वक्त की नब्ज़ः जनता के सेवक या महाराजा

जिस देश में जिंदगी भर कमाने के बाद भी आम आदमी एक छोटा-सा घर नहीं बना सकता, उस देश में हमारे राजनेताओं को क्यों...

वक्त की नब्ज- नाहक पहरेदारी

इस्लाम इतने बुरे दिनों से गुजर रहा है जिहादी आतंकवाद के कारण कि मुसलमानों के लिए किसी गैर-इस्लामी देश का वीजा लेना भी तकरीबन...

वक्त की नब्ज: प्रधानमंत्री की नई चुनौती

क्या अब उत्तर प्रदेश को गुजरात बना सकेंगे प्रधानमंत्री? जिम्मेदारी उनकी होगी, राज्य सरकार की नहीं, क्योंकि उत्तर प्रदेश के मतदाताओं ने वोट उनको...

वक्त की नब्ज़- कारवां गुजर गया

अब परिणाम हमारे सामने हैं, जो साबित करते हैं कि देश बदल गया है, देश के मतदाता बदल गए हैं, लेकिन हम राजनीतिक पंडित...

वक़्त की नब्ज़ : देशभक्ति थोपी नहीं जाती

2016 में हमारे गृहमंत्री ने कन्हैया कुमार और उमर खालिद को हीरो बना दिया था, उन पर देशद्रोह का आरोप लगा कर और अब...

वक्त की नब्ज: उत्तर प्रदेश का मुस्तकबिल

उत्तर प्रदेश के चुनाव अभियान में इतनी सारी बेकार बातें हुई हैं कि उसमें वह बात सुनाई नहीं दी, जो सबसे महत्त्वपूर्ण थी।

वक्त की नब्ज़: शशिकला वाया सियासी कला

सुप्रीम कोर्ट ने उनको पिछले सप्ताह जेल न भेज दिया होता आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी पाने के बाद, तो मुमकिन...

वक्त की नब्ज: साहसिक कदम की जरूरत

मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने विदेशी दौरों में कई बार कहा कि वे भारत को ऐसा देश बनाना चाहते हैं, जिसे नौजवानों...

वक्त की नब्ज कॉलम में तवलीन सिंह का लेख: बदहाली के गांव

नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में मनरेगा जैसी योजनाओं को बेकार बताया, लेकिन उसके बाद इन्हीं योजनाओं पर फिर से निवेश...

वक़्त की नब्ज़ : सियासत में विरासत

परिवारवाद की बीमारी अब भारतीय जनता पार्टी में भी फैलने लगी है। क्या प्रधानमंत्री कम से कम इतना नहीं कर सकते कि अपने साथियों...

वक्त की नब्ज़ः विकास के बुलबुले और हकीकत

हमारे राजनेताओं की पुरानी आदत है, दुनिया की रफ्तार को अनदेखा करके अपनी रफ्तार पर चलना।

गुरबत, गरीबनवाज और खैरात

गरीबी तब समाप्त होती है किसी देश में जब उससे लड़ने के औजार गरीबों के हाथों में दिए जाते हैं। औजारों की फेहरिस्त लंबी...

वक़्त की नब्ज़ : उम्मीद की सूरत

पर्यटन ने कई देशों को गुरबत से निकाल कर अमीर बना दिया है। सो, अगर हमारे शासकों ने बहुत पहले से विदेशी पर्यटकों को...

वक्त की नब्ज: नया साल, पुरानी चुनौतियां

नए साल के पहले दिन एक ही भविष्यवाणी की जा सकती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लंबे राजनीतिक जीवन का यह सबसे महत्त्वपूर्ण...

वक्त की नब्ज: वही पुरानी लीक

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचारक अब भी अटके हुए हैं ऐसे विचारों की दुनिया में, जो बहुत पहले बदल कर कुछ और बन...

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