February 26, 2017

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तवलीन सिंह के सभी पोस्ट

वक्त की नब्ज: उत्तर प्रदेश का मुस्तकबिल

उत्तर प्रदेश के चुनाव अभियान में इतनी सारी बेकार बातें हुई हैं कि उसमें वह बात सुनाई नहीं दी, जो सबसे महत्त्वपूर्ण थी।

वक्त की नब्ज़: शशिकला वाया सियासी कला

सुप्रीम कोर्ट ने उनको पिछले सप्ताह जेल न भेज दिया होता आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी पाने के बाद, तो मुमकिन...

वक्त की नब्ज: साहसिक कदम की जरूरत

मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने विदेशी दौरों में कई बार कहा कि वे भारत को ऐसा देश बनाना चाहते हैं, जिसे नौजवानों...

वक्त की नब्ज कॉलम में तवलीन सिंह का लेख: बदहाली के गांव

नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में मनरेगा जैसी योजनाओं को बेकार बताया, लेकिन उसके बाद इन्हीं योजनाओं पर फिर से निवेश...

वक़्त की नब्ज़ : सियासत में विरासत

परिवारवाद की बीमारी अब भारतीय जनता पार्टी में भी फैलने लगी है। क्या प्रधानमंत्री कम से कम इतना नहीं कर सकते कि अपने साथियों...

वक्त की नब्ज़ः विकास के बुलबुले और हकीकत

हमारे राजनेताओं की पुरानी आदत है, दुनिया की रफ्तार को अनदेखा करके अपनी रफ्तार पर चलना।

गुरबत, गरीबनवाज और खैरात

गरीबी तब समाप्त होती है किसी देश में जब उससे लड़ने के औजार गरीबों के हाथों में दिए जाते हैं। औजारों की फेहरिस्त लंबी...

वक़्त की नब्ज़ : उम्मीद की सूरत

पर्यटन ने कई देशों को गुरबत से निकाल कर अमीर बना दिया है। सो, अगर हमारे शासकों ने बहुत पहले से विदेशी पर्यटकों को...

वक्त की नब्ज: नया साल, पुरानी चुनौतियां

नए साल के पहले दिन एक ही भविष्यवाणी की जा सकती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लंबे राजनीतिक जीवन का यह सबसे महत्त्वपूर्ण...

वक्त की नब्ज: वही पुरानी लीक

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचारक अब भी अटके हुए हैं ऐसे विचारों की दुनिया में, जो बहुत पहले बदल कर कुछ और बन...

वक्त की नब्ज: आरोप का बुलबुला

राहुल गांधी ने ऐसे वक्त पर प्रधानमंत्री की मदद की पिछले हफ्ते, जब उनको मदद की सख्त जरूरत थी।

वक्त की नब्ज: नोटबंदी का उत्तरपक्ष

नोटबंदी के बाद और जनता ने अभी तक धीरज और सब्र से बर्दाश्त किया है इस फैसले को, बावजूद इसके कि घंटों इंतजार करने...

ब्लॉगः देशभक्ति का अधूरा जज्बा

क्या देशप्रेम सिर्फ सिनेमाघरों में दिखाया जाना अनिवार्य है? फिर यह भी सवाल उठता है कि जो लोग उच्चतम न्यायालय के इस आदेश के...

‘वक्त की नब्ज’ कॉलम में तवलीन सिंह का लेख: नोटबंदी का जोखिम

आपको भी शायद विश्वास हो गया होगा कि अच्छे दिनों के बदले मोदी अपने ही आखिरी दिनों की उलटी गिनती शुरू कर चुके हैं।

‘वक्त की नब्ज’ कॉलम: अफसरशाही पर नकेल की जरूरत

नरेंद्र मोदी के इरादे बेशक नेक थे, लेकिन जिन लोगों का काम था इस योजना को सफल बनाने का, उन्होंने दिखा दिया कि उनकी...

‘वक्त की नब्ज’ कॉलम: ट्रंप की जीत का मतलब

डोनल्ड ट्रंप जबसे चुनाव मैदान में उतरे तभी से अमेरिकी बुद्धिजीवी और राजनीतिक पंडित उनको गंभीरता से न लेकर उनका मजाक उड़ाते रहे।

‘वक्त की नब्ज’ कॉलम: जो जख्म अब उभरे हैं

लड़कियों को शिक्षा देना महापाप माना जाता है, क्योंकि इस किस्म के इस्लाम का बुनियादी उसूल है कि सेक्युलर शिक्षा इस्लाम के रसूल ने...

‘वक्त की नब्ज’ कॉलम में तवलीन सिंह का लेख: बढ़ाएं आर्थिक सुधारों की रफ्तार

मोदी से उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री बन जाने के बाद निवेशक वापस आ जाएंगे उनकी नीतियों में परिवर्तन देख कर।

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