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तवलीन सिंह के सभी पोस्ट

वक्त की नब्ज- सियासत का बदलता मिजाज

मैंने जब उनसे पूछा कि उनकी नजर में इस परिवर्तन की वजह क्या है, तो उन्होंने फौरन कहा कि नोटबंदी और जीएसटी से चोट...

वक्त की नब्ज- कुछ हकीकत कुछ फसाने

याद कीजिए किस तरह पहली कोशिश उनकी थी ईसाई समाज में डर पैदा करने की। इस कोशिश में इतने सफल रहे कि बड़े-बड़े ईसाई...

वक्त की नब्ज- जो करना था, नहीं हुआ

मेरा वास्ता इन गरीब बच्चों से इसलिए है, क्योंकि इनको एक वक्त का सही पोषण देने के मकसद से मैंने कई साल पहले ‘नाश्ता’...

वक्त की नब्ज- तनाव के माहौल में विकास की बातें

मेरठ, मलियाना, हाशीमपुरा, भागलपुर, मुंबई, मुरादाबाद जैसे नाम आज भी अटके हैं मेरे दिमाग में।

वक्त की नब्जः वे वादे वे ईरादे!

अधिकतर भारतवासी मोदी को एक काबिल, ईमानदार और अच्छा राजनेता मानते हैं। उनकी कुछ नीतियों पर जिनको शक है वे भी मानते हैं कि...

वक्त की नब्ज- समस्या कुछ और है

सच यह है कि समस्या ही कुछ और है। असली समस्या यह है कि वामपंथियों का बोलबाला काफी हद तक कम हो गया है...

वक्त की नब्ज: नए भारत का सपना

हाइवे के दोनों तरफ दिख रही थीं बदसूरत नई इमारतें और पुरानी, बेहाल बस्तियां, जिनकी तंग गलियों में दिख रही थीं गंदी नालियां और...

वक्त की नब्ज: समाजवाद बनाम विकास का रास्ता

देश की आर्थिक दिशा अब भी समाजवादी है और आज मोदी उन्हीं शब्दों में गरीबी हटाने की बातें करते हैं, जैसे इंदिरा गांधी...

वक्त की नब्ज- किससे गले मिलें

क्या अमन-शांति लाने के लिए पाकिस्तान से भी मोदी बात करने को तैयार हैं? ऐसा है अगर तो क्या हम अपनी पाकिस्तान नीति...

वक्त की नब्ज- शिक्षा की खोखली बुनियाद पर

आज हाल यह है कि हमारे बच्चे जब कुछ वर्ष पहले अंतरराष्ट्रीय पीसा स्पर्धा में भाग लेने गए तो इतना बुरा हाल रहा उनका...

वक्त की नब्ज- भुलाने की कोशिश में दर्द बढ़ता गया

इस प्रयास में मैंने खुद जाकर मेरठ-मलियना के दंगे देखे। मुरादाबाद, भागलपुर और मुंबई के दंगों को भी मैंने अपनी आंखों से देखा है...

वक्त की नब्जः भ्रष्टाचार की दीमक

ऐसा होने से न सिर्फ भ्रष्टाचार बढ़ा है, राजनीतिक दल भी कमजोर हो गए हैं, क्योंकि असली राजनेताओं के बदले इनके सदस्य बन...

वक्त की नब्ज- चुनौती भरे दिन

फर्क सिर्फ यह है कि उस साल सब कहते थे कि अटल बिहारी वाजपेयी किसी हाल में नहीं चुनाव हार सकते और इस बार...

वक्त की नब्ज: लोकप्रियता के बावजूद

समाजवादी देशों में- अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं- वे भी इस देश के आम आदमी को नसीब नहीं हुई हैं। थोड़ी बहुत समृद्धि आई...

वक्त की नब्ज: जिहादी आतंक और दोहरी मानसिकता

आज भी केरल और तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में जिहादी इस्लाम के आसार दिखते हैं। आज भी राजस्थान के नागौर जिले में कुछ ऐसे...

वक्त की नब्ज- सिर्फ नसीहत से कुछ नहीं होगा

गोरक्षा के नाम पर हिंसा रोकना मुश्किल होगा अब, क्योंकि आज के ‘नए भारत’ में इस तरह की हिंसा को देशभक्ति माना जाता है।

वक्त की नब्ज- बेकाबू होता कश्मीर

अयूब पंडित की हत्या साबित करती है कि अभी तक जो मोदी सरकार की कश्मीर में रणनीति रही है वह विफल हो गई है।...

वक्त की नब्ज: नए देशभक्त

मैं उन लोगों से माफी मांगती हूं, जिनकी धार्मिक भावनाओं को मैंने गलती से आहत किया उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की नकली तस्वीर ट्वीट...

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