May 26, 2017

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सीमा श्रोत्रिय के सभी पोस्ट

दुनिया मेरे आगे- दिखावे के दिवस

ज्यादा उम्र के लोग भी मात्र पैसा कमाने या उसे जोड़ने के नुस्खों में जुटे हैं। एक-दूसरे की होड़ में न जाने कितना...

दुनिया मेरे आगे- बिखरते रिश्ते

एक सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य से सामाजिकता की उम्मीद न केवल मनुष्य, बल्कि अन्य प्राणी भी करते हैं। आज समाज परिवर्तन के...

दुनिया मेरे आगे: रिश्तों की छांव

कोई भी महिला कभी यह नहीं चाहती कि उसका घर बसने से पहले ही टूट जाए।

सीमा श्रोत्रिय की कहानी : दीपू

दीपू को नही। पता था मां का सुख क्या होता है? वह नही। जानता था रूठना-क्यो।कि उसे मनाने वाला कोई नही। था।

दुनिया मेरे आगे : ढलती सांझ का दुख

मेरी नजरें लगातार उन्हें ढूंढ़ रही थीं। अपनी बात रखते हुए अंत में मैंने सभी वृद्धों का अभिवादन किया। मेरी बातें शायद कुछ ज्यादा...

जीवन का पंछी

क्यों हमारे बच्चे आज उन पक्षियों को नहीं पहचानते? क्यों आज सैकड़ों पक्षियों के बीच एक ‘गौरैया दिवस’ मनाने की नौबत आई?

सबरंग