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प्रेमपाल शर्मा के सभी पोस्ट

दुनिया मेरे आगे- निज भाषा

मेरठ की उस छात्रा को मैंने समझाया कि हिंदी की खड़ी बोली का जन्म तो तुम्हारे क्षेत्र से ही हुआ है और तुमने दसवीं...

राजनीतिः भोजपुरी की मांग और हिंदी का भविष्य

हिंदी समेत सारी भारतीय भाषाएं संकट के दौर से गुजर रही हैं। हताशा में लोग यह भविष्यवाणी तक कर देते हैं कि 2050 तक...

परीक्षा वापसी के अगर-मगर

देश में शिक्षा को लेकर तरह-तरह के प्रयोग होते ही रहते हैं। मौजूदा केंद्र सरकार भी कुछ नए बदलाव करने जा रही है। इस...

दुनिया मेरे आगेः हिंदी में क्यों लिखें

बाकी भाषाओं का तो वे जानें, हिंदी के लेखकों के साथ मुझे लगता है कि ऐसी स्थिति आ ही गई होगी, जो मेरे साथ...

दुनिया मेरे आगे : सुविधा के द्वीप

पुराने धंधों की बदौलत एक नया धंधा स्कूल का, जो अब पुराने सारे धंधों से ज्यादा चमकार लिए है।

पढ़ाई में खेती

दिल्ली विश्वविद्यालय में अस्सी कॉलेज भी हैं। क्या किसी में भी कृषि नहीं पढ़ाई जा सकती है?

किताबों का दायरा

स्तक, पुस्तक मेला, शिक्षा के संदर्भ में ज्यादातर शिक्षकों और अभिभावकों का यही गड्डमड्ड चेहरा है।

बस्ते का बोझ और बालमन

सरकारी नीतियों ने सरकारी स्कूल, उसके अध्यापकों की हालत ही ऐसा कर दी कि जनसंख्या के इतने दबाव के बावजूद वहां बच्चों ने आना...

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