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प्रमोद भार्गव के सभी पोस्ट

चिंताजनक हैं चीन के मंसूबे

चीन पहले से ही अस्सी अरब डॉलर की लगात से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के निर्माण में लगा है, जिसे भारत अपनी संप्रभुता पर...

कैसे थमे नक्सली कहर

वह सरकार और सुरक्षाबलों को लगातार चुनौती दे रहा है और इसके बरक्स राज्य तथा केंद्र सरकार के पास रणनीति की कमी है।

राजनीति: नस्ली हिंसा का दायरा

ट्रंप ने चुनाव के दौरान अमेरिकी युवाओं और अभिभावकों से राष्ट्रवाद के परिप्रेक्ष्य में जो वादे किए थे, उन पर पदग्रहण के साथ ही...

चुनावी चंदा कहां से आता है

निर्वाचन आयोग ने नकद चंदे की अधिकतम सीमा बीस हजार से घटा कर दो हजार रुपए करने की सिफारिश की है।

राजनीतिः बट्टेखाते का तहखाना

बैंकिंग क्षेत्र कमजोर तबकों का सहारा बनने में नाकाम हो रहे हैं। जबकि यही बैंक धनी वर्ग की सुख-सुविधाएं बढ़ाने, औद्योगिक क्षेत्र के वित्तीय...

राजनीति: कावेरी के पानी में लगी आग

तमिलनाडु ने कम बारिश के कारण राज्य में पैदा हुई दयनीय स्थिति को उजागर करते हुए कहा था कि प्रदेश की चालीस हजार एकड़...

प्रमोद भार्गव का लेख : क्यों है अदालतों पर इतना बोझ

न्यायमूर्ति ठाकुर ने तल्ख लहजे में कहा कि ‘जजों की कमी के कारण समय रहते न्याय संभव नहीं हो पा रहा है। अंग्रेजों के...

प्रमोद भार्गव का लेख : काला धन और कार्रवाई की कवायद

देश में काला धन उत्सर्जित न हो, इस उद्देश्य से दूसरा कानून बेनामी लेन-देन पर लगाम लगाने के लिए लाया गया था। यह विधेयक...

‘चिंता’ कॉलम में प्रमोद भार्गव का लेख : पानी की लूट की छूट

आर्थिक उदारवाद के तहत वैश्विक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के मकसद से भारत की नीतियां लचीली और भ्रामक बनाई गई हैं।

गरीब की दाल कैसे गलेगी

मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिले झाबुआ में 2009 में दाल की कमी के चलते पैदा हुए कुपोषण ने महामारी का रूप ले लिया था।...

संवैधानिक रूप लेता आधार

अब तक साठ हजार करोड़ रुपए खर्च करके करीब बानबे करोड़ कार्ड बन चुके हैं।

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