April 28, 2017

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पी. चिदंबरम के सभी पोस्ट

दूसरी नजर: जॉर्ज आरवेल को फिर पढ़ें

विशिष्ट पहचान नंबर जरूरी है, लेकिन इसे लोगों की जिंदगी के बारे में संभावित जासूसी या निजी सूचनाएं इकट्ठा करने का जरिया नहीं...

दूसरी नजरः घोर विपदा की तरफ बढ़ता कश्मीर

जम्मू एवं कश्मीर की स्थिति पर मैंने कई बार लिखा है, खासकर कश्मीर घाटी की स्थिति के संदर्भ के साथ।

दूसरी नजर: क्या हमारी प्राथमिकताएं सही हैं

मैं तो यह भी कहूंगा कि केंद्र सरकार और सबसे बड़े राज्य की प्राथमिकताएं भिन्न नहीं हो सकतीं, खासकर तब, जब दोनों जगह एक...

दूसरी नजरः निरंकुश सत्ता का उन्माद

वित्तमंत्री के साल भर के विधायी एजेंडे में वित्त विधेयक अमूमन सबसे महत्त्वपूर्ण विधेयक होता है।

दूसरी नज़र: जहां बच्चे उपेक्षित हैं

मानव संसाधन विकास की हमारी परिकल्पना में बच्चों का विकास, बच्चों का स्वास्थ्य और बच्चों का पोषण शामिल नहीं है।

दूसरी नज़र: यहां जीत वहां सेंध

त्रिशुंक विधानसभा की सूरत में सरकार के गठन को लेकर एक अलिखित नियम रहा है, जो बिल्कुल साफ है। जिस पार्टी को सबसे ज्यादा...

दूसरी नज़र: जनादेश के बाद की उम्मीद

इस स्तंभ को एक दिन देर से भेजने की इजाजत मैंने संपादकों से ले ली थी, ताकि पांच राज्यों के चुनाव नतीजों का जायजा...

दूसरी नज़र : सांख्यिकीय विकास से पेट नहीं भरता

वृद्धि दर चाहे 6.5 फीसद रहे या सात फीसद, यह देश के लिए संतोष का विषय है- अपनी पीठ थपथपाने और उल्लास का नहीं।

दूसरी नजर: उच्च शिक्षा का निम्न स्तर

इसका मकसद केवल उन युवा स्त्री-पुरुषों को डिग्री बांटना नहीं होता, जो यहां दाखिला लेते हैं, विभिन्न विषयों की पढ़ाई करते हैं और इम्तहान...

दूसरी नज़र: अन्नाद्रमुक का उत्थान और पतन

सुप्रीम कोर्ट के सामने आए मामले में, जयललिता और अन्य पर, 1991-96 के कार्यकाल के दौरान आय से अधिक संपत्ति जमा करने के आरोप...

दूसरी नज़र: सिकुड़न का बजट

यूपीए-1 के दौरान हमने विकास के लिए आर्थिक वृद्धि दर को बढ़ाया, जो कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार (1999-2004) के समय औसतन 5.9 फीसद...

दूसरी नजर: किसी तरह पार लगी बजट की नैया

बजट का दिन आया और गया। अधिकतर लोगों को न तो आंकड़े याद रहेंगे न वाकचातुर्य भरे पद और शेरो-शायरी।

दूसरी नज़र : मौजूदा मुश्किलों में बजट की राह

बजट ऐसी राजनीतिक परिस्थितियों में पेश होगा जब पांच राज्यों में चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, जिनमें उत्तर प्रदेश जैसा राजनीतिक लिहाज से...

दूसरी नजरः बेसिक आय का गुब्बारा

यह बजट सीजन है। अच्छे, खराब और भोंडे (विचार), सब हाजिर होंगे। एक परिकल्पना, जो अभी कयासबाजी के दायरे में है, ‘यूनिवर्सल बेसिक इनकम’...

‘स्लो डाउन इंडिया’ के लिए तैयार रहें

आर्थिक वृद्धि के चार इंजन हैं: सरकारी खर्च, निजी खपत, निजी निवेश और निर्यात।

दूसरी नज़र : रिजर्व बैंक की स्वायत्तता किधर

वर्ष 1929 में दुनिया ने महामंदी के रूप में एक अप्रत्याशित आर्थिक संकट झेला था।

दूसरी नज़र कॉलम: क्या 2017 खुशनुमा साल होगा?

हमें खुश होना चाहिए कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर, सरकार के मुताबिक, 2014 और 2015 में 7.4 फीसद रही।

दूसरी नज़र: कैशलेस अर्थव्यवस्था की मरीचिका

जब-तब कोई नया शब्द या पद बातचीत में चल पड़ता है। आठ नवंबर 2016 को विमुद्रीकरण शब्द का चलन शुरू हुआ।

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