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पी. चिदंबरम के सभी पोस्ट

दूसरी नजर- भुखमरी का कलंक

इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारत की आबादी के एक खासे हिस्से को साल में अनेक दिन भूखे रहना पड़ता...

दूसरी नजर- प्रधानमंत्री के लिए यथार्थ के संकेत

वहां केबिन की दीवाल पर एक नोटिस लगा था जिसमें बताया गया था कि आपातकालीन स्थिति में क्या करें। पहली हिदायत यह थी: ‘क्षण-भर...

दूसरी नजर- मकतूल और कातिल

जोन आॅफ आर्क को खंभे से बांध कर जला दिया गया था। सुकरात को जहर का प्याला पीना पड़ा। सर थॉमस मोर का सिर...

दूसरी नजर: 2014 का ग्रीष्म और अब

मैंने तो बस यही रेखांकित किया कि सिन्हा ने वही कहा है जो मैं और कई अन्य लोग पंद्रह महीनों से कहते आ रहे...

दूसरी नजर- उपभोक्ता, प्रतिस्पर्द्धा और अर्थशास्त्र

कुछ पेट्रोलियम उत्पादों खासकर केरोसिन और रसोई गैस पर सबसिडी देने से भी बचा नहीं जा सकता था, क्योंकि गरीबों पर उनकी कीमतों...

दूसरी नजरः कुछ नहीं मालूम दिल्ली

डीगें हांकने का वक्त गुजर चुका है। भारत अब दुनिया की सबसे तेज उभरती अर्थव्यवस्था नहीं रह गया है। पिछली सातों तिमाहियों में चीन...

दूसरी नजर- निजता है व्यक्तिगत आजादी का मूलाधार

राजग के राज में आधार अपने मूल उद््देश्य से बहुत दूर चला गया और इसे वैसी बहुत सारी गतिविधियों के लिए अनिवार्य कर दिया...

दूसरी नजर- विमुद्रीकरण: एक कड़वी खीर

इसका मतलब है कि काले धन के खात्मे के नाम पर लोगों को जो परेशान किया गया, वह उद्देश्य चिंताजनक रूप से विफल सिद्ध...

दूसरी नजर- सत्तर साल : जाति का अभिशाप

हिंदू धर्म के इसी वर्गीकरण के खिलाफ हुए विद्रोह से बौद्ध धर्म और जैन धर्म का आविर्भाव हुआ। अगर वर्ण बुरा था, तो जाति...

दूसरी नजर: सत्तर साल पर अर्थव्यवस्था की हालत-2

यह आर्थिक सर्वे, खंड 2 और 2 अगस्त को आए रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति वक्तव्य के रूप में है। अर्थव्यवस्था की सेहत जांचने...

दूसरी नजर- जरूर होगा प्रतिकार का उभार

मैं ऐसे लोगों की गिनती कर रहा हूं जिन्होंने हथियार डाल दिए हैं। बुधवार, 26 जुलाई 2017 को यह नीतीश कुमार थे जिन्होंने अपनी...

दूसरी नजरः वाकयुद्ध, या उससे आगे?

यह दुनिया पोप जॉन की इस जोशीली घोषणा के करीब पहुंचती नहीं दिखती कि ‘ युद्ध अब और नहीं, युद्ध अब कभी नहीं’।

दूसरी नजर: गरीब सपने न देखें

वर्ष 2005 में मैंने तथाकथित शिक्षा-ऋण नीति की पड़ताल शुरू की। मैंने पाया कि ये ऋण गरीबों को अमूमन नहीं मिल पाते थे। गरीबों...

दूसरी नजर: एक दूसरे को कगार की तरफ धकेलना

इससे पहले, लड़के सड़कों पर उतर आते थे और पत्थर फेंकते थे; अब लड़कियां भी सड़कों पर उतर रही हैं। पहले, माता-पिता अपने बच्चों...

दूसरी नजर: किसी को खाने नहीं दूंगा

भाजपा कठपुतली की तरह सबको नचा रही है और चारों धड़ों के धागे उसके हाथ में हैं।

दूसरी नजर- परेशानी के लिए तैयार रहें

एक बार जब सारे राज्यों ने जीएसटी में ये खूबियां मान लीं, तो जीएसटी के अहम पहलुओं पर सहमति बनाने की हर कोशिश की...

दूसरी नजर: नए कर विधान का मंगलाचरण

जीएसटी का रास्ता आसान या आराम का नहीं है, बल्कि हमें सतत प्रयास करने होंगे ताकि हम संसद में की गई प्रतिज्ञाओं को, और...

दूसरी नजर- क्यों नाराज हैं किसान

सरकार को सूखे के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता, पर सरकार सूखे से पैदा हुए हालात को न संभाल पाने की दोषी तो...

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