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निरंकार सिंह के सभी पोस्ट

रोजगार की कसौटी और विकास

आजादी के बाद देश में कुछ नए कल-कारखाने खुले तो कुछ लोगों को काम मिला, लेकिन हमारी आबादी जिस रफ्तार से बढ़ रही...

राजनीतिः अगर धरती को बचाना है

जंगल जिस रफ्तार से नदारद हो रहे हैं उसी रफ्तार से नदारद होते रहे तो आक्सीजन कहां से मिलेगी? यदि ये जंगल नहीं रहेंगे...

राजनीतिः अंतरिक्ष में जीवन की खोज

जीवन पृथ्वी के अलावा कहीं और भी संभव है? इस पर कई दशकों से वैज्ञानिकों के बीच गहमागहमी चल रही है। अब पता चला...

कहां ले जाएगी अमेरिका और चीन की होड़

चीन और अमेरिका के बीच दक्षिण चीन सागर और उत्तर कोरिया को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। दोनों देश एक दूसरे से जंग...

राजनीतिः कुदरत के दोहन से खतरे में जीवन

हम प्रकृति पर अपने अंतहीन अतिक्रमण और बगैर सोचे-समझे उसमें बड़े-बड़े फेरबदल करके इस अधिकार का अविवेकपूर्ण उपयोग नहीं कर सकते और हमें करना...

गरम होती धरती के खतरे

मौसम का पारा जिस तरह ऊपर चढ़ रहा है उससे ऐसा लगता है कि इस बार झुलसाने वाली गर्मी पड़ेगी।

राजनीतिः पिछड़ा क्यों है उत्तर प्रदेश

अनेक छोटे-बड़े उद्योग-धंधों के केंद्र उत्तर प्रदेश में थे। हस्तकला और करघे रोजगार के अच्छे साधन थे। खेती-बाड़ी में भी यह प्रदेश पिछड़ा हुआ...

राजनीतिः लोकतंत्र के नाजुक पहलु

वर्तमान निर्वाचन प्रणाली का सारा आधार वैयक्तिक मतदाताओं की मतगणना है, जिसकी विधि प्रचलित पद्धति के अनुसार कहीं कम, कहीं अधिक जटिल होती है।...

वैज्ञानिक प्रगति की कसौटियां

हर साल जनवरी के पहले हफ्ते में भारतीय विज्ञान कांग्रेस अपना वार्षिकोत्सव मनाती है।

निरंकार सिंह का लेख : स्वाधीनता का उत्सव बनाम दायित्व

देश में कुछ भी नहीं हुआ है, ऐसा नहीं है। पर जो कुछ हुआ है उसका आर्थिक लाभ धनवानों को, उच्च वर्ग को, बड़े...

राजनीतिः आमदनी, अठन्नी खर्चा रुपैया

उत्तर प्रदेश प्राकृतिक और खनिज संसाधनों की दृष्टि से कोई पिछड़ा राज्य नहीं है, लेकिन इसकी गिनती आज देश के पिछड़े राज्यों में होती...

राजनीतिः सेहत की कीमत पर विकते खाद्य

मिलावट से निपटने में सरकार और उपभोक्ता मंचों की जिम्मेदारी तो है ही, कंपनियां भी इस मामले में अपनी भूमिका से मुकर नहीं सकती...

जीवन-मरण का वैश्विक प्रश्न

अगले दो सौ सालों में ग्लोबल वार्मिंग के कारण भारत को सर्वाधिक प्रभावित करने वाली मानसून प्रणाली बहुत कमजोर पड़ जाएगी। इससे बारिश और...

पानी से घिरा प्यासा देश

हमारे देश में सालाना चार हजार अरब घन मीटर पानी उपलब्ध है। इस पानी का बहुत बड़ा भाग समुद्र में बेकार चला जाता है।

राजनीतिः घातक रोगों का फैलता दायरा

गरीबी व गंदगी से होने वाली बीमारियों पर कुछ हद तक काबू पाया गया है। जबकि कैंसर एक नई चुनौती बनकर उभरा है। इसका...

विश्व बाजार में हम कहां

आर्थिक सुधारों के लिए अधिकांश जनता का समर्थन कायम रखने की खातिरउन लोगों की क्षति की पूर्ति करने का हमें ध्यान रखना होगा जिन्हें...

राजनीतिः आइंस्टीन की अवधारणा का सच

बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में आइंस्टीन की कृतियों और विचारों ने न केवल भौतिकी की धारणा में आमूल क्रांति ला दी, बल्कि उनसे रीति-विधान...

सबकी सेहत का सपना

विश्व स्वास्थ्य संगठन की अनेक रपटों से लेकर देश में हुए तमाम सर्वेक्षण बताते हैं कि हमारी सार्वजनिक चिकित्सा व्यवस्था सुधरने के बजाय और...

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