June 28, 2017

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मृणाल वल्लरी के सभी पोस्ट

चंद्रकांता: एक सदाबहार शाहकार

हर भाषा में कुछ न कुछ ऐसी रचनाएं होती हैं, जिनकी प्रासंगिकता बनी रहती है। जमाना बदलता रहता है किसी रंगमंच की तरह, लेकिन...

आत्महत्या की खेती: पंजाब के समाज और सत्ता पर सवाल

‘दब के बाह ते रज्ज के खा’। इस पंजाबी कहावत का मतलब है कि खेत में दबाकर जोत और जमकर खा। यह हरित क्रांति...

तल्ख हकीकत से उठता पर्दा

अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने जब कहा था कि नोटबंदी का कदम न समझदारी भरा है और न मानवीय, तब नोटबंदी से कालाधान और भ्रष्टाचार...

अमेरिका ने कमजोर की लड़ाई: सुनीता

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जकों के अगुआ अमेरिका ने पेरिस समझौते से हाथ खींच लिए हैं।

साफ हवा और पानी की तरह सर्वसुलभ हो स्कूली शिक्षा

क्या देश भर में परीक्षाओं के लिए एक बोर्ड होना चाहिए? शिक्षा के अधिकार के तहत कमजोर तबके के बच्चों को महंगे निजी...

भारतीय साहित्य का वैश्वीकरण कर रहे प्रवासी लेखक: पद्मेश गुप्त

‘भारत के साहित्य का वैश्वीकरण करने में प्रवासी साहित्यकारों की अहम भूमिका है। भारत और भारतीयों के द्वारा जो रचा जा रहा है आज...

भगवा का भागवत काल

मोहन मधुकर भागवत। अगर आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गणवेश से लेकर लैंगिक और समलैंगिक मुद्दों पर आधुनिक ताना-बाना अख्तियार कर रहा है तो उसके...

तीन साल में उलटा लटका दिया लोकतंत्र को: सुरजेवाला

नरेंद्र मोदी का विजय अभियान कांग्रेस-मुक्त भारत के नारे के साथ शुरू हुआ था।

ट्विटर को नागवार लगा संघ विचारक का ‘इस्लामिक पाकिस्तान’

भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर सोशल मीडिया के प्रबंधक भी नजर रखे हुए हैं।

सबरंगः अब जाकर सही राह पर चली है शिक्षा व्यवस्था

डीएवी कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर पूनम सूरी का नाम आर्य समाज की विरासत के साथ जुड़ा हुआ है।

सरकारी भ्रष्टाचार से जूझ रहा कलमकार

‘उद्भ्रांत’ का कहना है कि जिस सतर्कता शाखा की स्थापना भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए की गई थी वही विभाग एक ईमानदार...

सरोकार, बाजार और हिंदी ‘किताबवाला’

आॅक्सफोर्ड बिजनेस कॉलेज के अध्यक्ष प्रोफेसर स्टीव ब्रिस्टो कहते हैं, ‘भाषाओं में काम करने वाले सांस्कृतिक कर्मी हो जाते हैं।

वर्ग-भेद के मंच पर एक प्रेमकथा

सामाजिक, राजनीतिक द्वंद्व के साथ जब दो दिलों के जज्जबात मंच पर टकराते हैं तो प्रोफेसर सुरेश भारजद्वाज की प्रकाश परिकल्पना उन भावों का...

सत्ता का इश्तहार बनाम सरोकार की आवाज

आॅनलाइन मीडिया पर जब आप किसी खास वेबसाइट की खबर को पढ़ रहे होते हैं तो रिपोर्ट या लेख के अंत में पाठकों की...

गुंडागर्दी के बरक्स कश्मीर का सवाल बना दिया

जेएनयू के बाद रामजस मामले के बहाने डीयू में भी राष्ट्रवाद के नाम पर हंगामा छेड़ दिया गया है। पिछले हफ्ते हुई हिंसा के...

सोशल मीडिया: राष्ट्रवादी बसंत का पतझड़ काल

पिछला बसंत ‘द्रोहकाल’ के नाम कर दिया गया था। जो जेएनयू आजादी, प्रगतिशीलता और उदारता की जमीन का एक पर्याय बन गया था, उसी...

ओवैसी के पूर्वज को ब्राह्मण बता संघ विचारक ने छेड़ा विवाद

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े विचारक राकेश सिन्हा ने गुरुवार को आॅल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआइएमआइएम) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी के पूर्वजों...

भारत का सच’ प्रचारित कर रही पोलैंड की महिला भक्त, वीडियो में बताती है-गाय, योग और आयुर्वेद की महिमा

सरकारी पक्ष को मुखर आवाज दे रहा है कैरोलिना गोस्वामी का हिंदूवादी वीडियो और लेख।

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