April 28, 2017

ताज़ा खबर

 

कौशलेंद्र प्रपन्न के सभी पोस्ट

राजनीतिः अवसाद की कड़ियां और शिक्षा

हमने अपनी निजता और संवेदनाओं को बाजार के हवाले कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2017 को अवसाद व उदासी से निजात...

दुनिया मेरे आगे- भीड़ में सन्नाटा

जब दो या तीन दिन की छुट्टियां एक साथ आती हैं, तब हम बाहर भागने का प्रयास करते हैं।

शिक्षा: कहां गए पुस्तकालय

किसी भी समाज के बौद्धिक विकास में शैक्षिक संस्थानों और पुस्तकालयों के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लेकिन अफसोसनाक बात यही है...

दुनिया मेरे आगेः सफर के अनुभव

यात्राएं हमेशा से हमें न केवल आकर्षित करती रही हैं, बल्कि जीवन के व्यापक दर्शन से भी रूबरू कराती हैं। यही कारण है कि...

दुनिया मेरे आगे: पूर्वग्रह के स्कूल

जातिसूचक गाली नत्थी करते हुए लगातार ऐसे बच्चों को शिक्षा की पगडंडी से खदेड़ा जाता रहा है।

दुनिया मेरे आगेः भाषा विस्थापन

किसी जगह से केवल व्यक्ति नहीं, उसके साथ भाषा भी विस्थापित होती है। व्यक्ति जीवन यापन के लिए या फिर बेहतर जिंदगी के लिए...

दुनिया मेरे आगेः गांव की हत्या

पिछले दिनों बिहार के कुछ गांवों में जाने का मौका मिला। एक गांव में तकरीबन बीस साल के बाद गया था। मेरे मन-मस्तिष्क में...

अंकों में बदलता आदमी

हमारा समाज और भाषायी परिवेश बहुत तेजी से बदल रहा है। ज्ञान और सूचना को भोजपत्र, पेपाइरस, ताम्रपत्र, क्ले टेब्लेट्स आदि पर दर्ज करने...

अभिव्यक्ति के आभाषी मंच

अभिव्यक्ति और उसकी हड़बड़ी पर किसी और का नियंत्रण नहीं होता।

सबरंग