May 01, 2017

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सूचना तकनीक : बहुभाषिक बनाम डिजिटल भारत

अरिमर्दन कुमार त्रिपाठी आज बाजार ने हमारी चेतना में इस बोध को लगभग स्थापित कर दिया है कि किसी उत्पाद की विकास प्रक्रिया से...

पुस्तकायन : स्त्री को रचते हुए

कौमुदिनी मकवाड़ा युवा कवयित्री रेनू शुक्ला का कविता संकलन चुरइल कथा अनेक स्त्री-प्रश्नों से टकराने का मौका देता है। कहा जाता है कि स्त्री...

पुस्तकायन : महाभारत के अनछुए पहलू

रमेश दवे प्रभाकर श्रोत्रिय अपनी हर रचना को उसके अंतिम रूप तक पहुंचाने के पहले इतना मांजते हैं कि रचना निखर उठती है, चाहे...

‘एक्शन जैक्सन’ फ़िल्म समीक्षा : वही ज़ायका बार बार

निर्देशक- प्रभु देवा, कलाकार- अजय देवगन, सोनाक्षी सिन्हा, यामी गौतम, मनस्वी ममगाईं, आनंद राज। क्या प्रभुदेवा को बताना पड़ेगा कि हमेशा किसी को लगातार...

‘सुलेमानी कीड़ा’ फ़िल्म समीक्षा: आकांक्षा और संघर्ष की दास्तां

निर्देशक- अमित मसुरकर, कलाकार-नवीन कस्तुरिया, मयंक तिवारी, अदिति वासुदेव, करण मीरचंदानी, रज्जाक। ये एक बहुत अच्छी फिल्म बन सकती थी लेकिन सिर्फ कुछ कुछ...

मायावती के जनाधार पर काबिज होने की कोशिश में भाजपा

अंशुमान शुक्ल डॉ. भीमराव आंबेडकर इस बार भारतीय जनता पार्टी को अवसर की तरह नजर आ रहे हैं। भाजपा के नेताओं को इस बात...

रुड़की में बम विस्फोट, स्कूली छात्र की मौत

सुनील दत्त पांडेय रुड़की में शनिवार दोपहर डेढ़ बजे हुए बम विस्फोट में एक 13 साल के स्कूली बच्चे की मौत हो गई। विस्फोट...

विलय के मायने

जब भी गैर-कांग्रेस और गैर-भाजपा दलों को एकजुट करने की कवायद चलती है तो सबसे पहला सवाल यही उठाया जाता है कि क्या यह...

त्रासदी के शिविर

पंजाब के गुरदासपुर में एक गैर-सरकारी संगठन की ओर से लगाए गए आंखों के मुफ्त आॅपरेशन शिविर में कई लोगों की आंखों की रोशनी...

अपना अपना इम्तहान

अरविंद मोहन यह अलग बात है कि विपक्ष ने साध्वी निरंजन ज्योति की घटिया बयानबाजी और इराक में उनतालीस भारतीयों के जीवित होने को...

घरौंदे का तिनका

असीमा भट्ट एक सुखद संयोग है कि मैं मुंबई में जहां रहती हूं, वहां की बालकनी से बाहर देखने पर बंगाल में होने का...

अकेले नहीं

ज्योति सिडाना एक निजी यात्रा की वापसी के समय ट्रेन में बैठे एक बुर्जुग यात्री ने अपने सामने की बर्थ पर बैठी युवती से...

भोपाल के सबक

विश्व की सबसे भयानक औद्योगिक त्रासदी के नाम से चर्चित भोपाल गैस रिसाव कांड को तीस साल पूरे हो गए। दो-तीन दिसंबर 1984 की...

हंगामा है क्यों बरपा

केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति के अभद्र बयान पर बवाल खड़ा हो गया है। सालों-साल बीत जाते हैं सकारात्मक काम करते तो भी मीडिया इतना...

विश्लेषण: जो लोकशाही के निगहबान थे, वे बन गए चारण

पुण्य प्रसून वाजपेयी साल भर पहले राष्ट्रपति की मौजूदगी में राष्ट्रपति भवन में ही एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल ने अपना पच्चीसवां जन्मदिन मना लिया।...

डॉक्टर और एनजीओ की लापरवाही ने छीनी आंखों की रोशनी

गुरुदासपुर के पास एक एनजीओ की ओर से लगवाए गए नेत्र शिविर में तकरीबन 33 लोगों की आंखों की रोशनी जाने की बात प्रशासन...

यह कैसी दबंगई: सिगरेट नहीं लाने पर स्कूली छात्र की कर दी पिटाई

खजूरीखास इलाके में सिगरेट लाने से मना करने पर एक स्कूली छात्र की पिटाई कर दी गई। उसे गुरुतेग बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया...

उच्च शिक्षा की तस्वीर

हमारे देश के उच्च शिक्षा संस्थानों को दुनिया के दो सौ स्तरीय संस्थानों में जगह नहीं मिल पाती, तो उसकी वजहें जाहिर हैं। विडंबना...

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