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अनीता मिश्रा के सभी पोस्ट

दुनिया मेरे आगे- अधिकार का भ्रम

परंपरा और समाज की न जाने कितनी जंजीरों को तोड़ने और कितनी बाधाओं को पार करने के बाद दमित या वंचना के शिकार वर्ग...

दुनिया मेरे आगेः सभ्य होने की चेतना

मैं उस विवाह समारोह में लोगों से मिल-जुल रही थी कि इसी बीच बहुत अच्छा कपड़ा पहने एक लड़का आया, मुझे ‘नमस्ते दीदी’ बोला,...

‘दुनिया मेरे आगे’ अनीता मिश्रा : चीखना मना है

कुछ दिन पहले मैं अपनी एक दोस्त के यहां गई थी। काफी देर बाद ध्यान आया तो मैंने उसकी छोटी बहन पीहू के बारे...

‘दुनिया मेरे आगे में’ में अनीता मिश्रा का लेख : वर्चस्व की हीनता

कुछ समय पहले पेप्सिको की अध्यक्ष इंदिरा नूयी ने कहा था- ‘हमारे साथ भी पुरुषों के समांतर बर्ताव किया जाए...! हमें हंसी में भी...

छवि के पैमाने

किसी व्यक्ति को देखने के हमारे पैमाने क्या होते हैं? उसके बारे में हमारी धारणा कैसे तय होती है और इस राय पर उसका...

सबरंग