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संगीत : कलाकार के सम्मान में संगीत संध्या

वेंकटेश के खयाल गायन में ग्वालियर और किराना दोनों ही गायकी के श्रेष्ठ तत्वों का अनूठा समन्वय दिखाई देता है।
Author नई दिल्ली | April 18, 2016 00:52 am
नई दिल्ली में पद्मश्री पं. वेंकटेश कुमार कार्यक्रम पेश करते हुए।

पद्मश्री से सम्मानित पं वेंकटेश कुमार का अभिनंदन समारोह एलटीजी सभागार में बुधवार की शाम कर्नाटक सरकार की ओर से आयोजित किया गया। कर्नाटक के धारवाड़ में जन्मे इस कलाकार के अभिनंदन के लिए मंच पर अनंत कुमार रासायनिक उर्वरक मंत्री, सदानंद गौड़ा कानून मंत्री, जीएम सिद्धेश्वर, रौशन बेग, अतुल तिवारी व सच्चिदानंद मूर्ति जैसे दिग्गज मौजूद थे। पत्र-पुष्प और अंग वस्त्रादि से उनके सत्कार के बाद शास्त्रीय गायन का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

उन्होंने अपने प्रभावशाली गायन का शुभारंभ गोधूलि वेला के संधिप्रकाश राग पूरियाधनाश्री से किया। पूरियाधनाश्री का मुख्य राग के लिए चुनाव इस सायं कालीन संगीत सभा के लिए सर्वथा समीचीन था। राग के परिचयात्मक औचार के बाद विलंबित एकताल का पारंपरिक बड़ा खयाल ‘अब तो रुत मां…’ गाते हुए उन्होंने इस राग की बढ़त आलाप, बहलावे और बोल आलाप इत्यादि से करते हुए विधिवत स्थाई और अंतरा सहित बंदिश भरी। फिर थोड़ी सी लय बढ़ाकर लयात्मक काम और विविध तानों की बौछार सहित तीनताल के मशहूर छोटे खयाल ‘पायलिया झंकार..’ से सुधी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

वेंकटेश के खयाल गायन में ग्वालियर और किराना दोनों ही गायकी के श्रेष्ठ तत्वों का अनूठा समन्वय दिखाई देता है। इस शाम भी विलंबित खयाल के बर्ताव में अगर ग्वालियर के तत्व उजागर थे तो हरहराती आकार की ताने पं भीमसेन जोशी की याद दिला रही थी। मुख्य राग के बाद हमीर में सुरीला और लयात्मक विपर्यय था। इस राग की जानी पहचानी तीनताल में बंधी बंदिश ‘कैसे घर जाऊं लंगरवा’ को उन्होंने एक अलग अंदाज में अपने हस्ताक्षर के ठप्पे के साथ पेश किया। तीनताल के ठेके के साथ अतीत और अनागत के खेल के चलते बंदिश के बोलों की लुकाछिपी और छेड़-छाड़ व आठ-आठ मात्राओं की छोटी-छोटी तानों के बाद उनके मुखड़ा पकड़ने के अंदाज में श्रोताओं को विशेष आनंद आया।

इसके बाद कन्नड़ भाषी श्रोताओं के आग्रह पर उन्होंने उनकी बोली-बानी में कई रचनाएं सुनाईं। जिन्हें भाषा की समझ नहीं थी उन श्रोताओं को भी छायानट जैसे रागों की छाया ने सम्मोहित किया। इस यादगार शाम का समापन रीति के अनुसार उन्होंने भैरवी से किया।

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